50 प्रतिशत काला धन, 2 लाख की पार्किंग और आजीवन का एडवांस मेंटेनेंस वसूल रहा है यह बिल्डर…

50 प्रतिशत काला धन, 2 लाख की पार्किंग और आजीवन का एडवांस मेंटेनेंस वसूल रहा है यह बिल्डर...

वापी। गुजरात में मकान, फ्लेट, दुकान या आफिस खरीदना काफी जोखिम का काम हो गया है। जोखिम इस लिए क्यों की दर्जनों बिल्डरों के पास जाने के बाद, कोई एक आद बिल्डर ही ऐसा मिलता है, जो सरकार द्वारा बनाए नियमों के तहत टैक्स की चोरी किए बिना बिक्री करता हो। अधिकांश बिल्डर सरकार द्वारा तय नियम को नहीं मानते और खरीददारों से भी नियमों की अवहेलना करने को कहते है खरीदार इतने मजबूर हो जाते है की उन्हे ना चाहते हुए भी नियमों की अवहेलना करने और सरकार को चुना लगाने की जोखिम उठानी ही पड़ती है।

गुजरात के ( Valsad ) वलसाड जिले में ऐसे दर्जनों बिल्डर है जिनकी कार्यप्रणाली देखकर लगता है कि उनका नियमों से कोई सरोकार नहीं, और यह जनता को लूटने और देश को बर्बादी के कगार पर ले जाने के लिए ही बिल्डर बने हो! कोई 10 प्रतिशत काला धन मांगता है तो कोई 20 प्रतिशत, तो कोई 50 प्रतिशत, कोई कहता है मकान, फ्लेट, दुकान या आफिस खरीदने के साथ पार्किंग भी अलग से खरीदनी पड़ेगी, तो कोई कहता है जिंदगीभर का मेंटेनेश आज ही एडवांस में चाहिए। इतना ही नहीं, इस सबके बाद आयकर को कैसे चुना लगाना है, जीएसटी को कैसे चुना लगाना है, स्टेंप में कैसे रेवेन्यू विभाग को चुना लगाना है यह सब ठीक तरह से जब ग्राहक समझ लेता है और सरकार को चुना लगाने कि जोखिम उठाने को राजी हो जाता है तब उसके साथ आगे का सौदा किया जाता है।

ये भी पढ़ें-  मिडकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया

गुजरात मॉडल की एक हक़ीक़त यह भी…

वापी ( VAPI ) के ही नेशनल हाइवे 8 पर निर्माणाधीन एक प्रोजेक्ट ओरबिट में एक दुकान के लिए बिल्डर ने एक एस्टीमटे दिया है। दुकान का क्षेत्रफल है 1210 स्क्वेयर फीट है और बिल्डर का कहना है कि 10000 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट के हिसाब से दुकान की बिक्री की जाएगी और 5000 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट के हिसाब से 50 प्रतिशत रकम का एग्रीमेंट किया जाएगा, बाकी 50 प्रतिशत रकम काला धन देना पड़ेगा, स्टेंप ड्यूटी भी आधी कीमत के हिसाब से लगेगी और जीएसटी भी आधी कीमत के हिसाब से लगाया जाएगा, 2 लाख रुपये पार्किंग का देना पड़ेगा, तथा आजीवन का मेंटेनेस भी एक साथ देना होगा जो 737000 है, सब कुछ मिलकर बिल्डर ने उक्त दुकान की कुल कीमत 14181000 बताई है। जिसका एग्रीमेंट 6050000 रकम का होगा। अब यह पूरा हिसाब किताब एक दुकान का है और सवाल यह है कि क्या इतने खुलेआम काले-धन का लेन-देन और टैक्स चोरी, आयकर विभाग या अन्य संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना हो सकती है?

ये भी पढ़ें-  जानलेवा वायु प्रदूषण पर योगी आदित्यनाथ को घेरा..

बिल्डर द्वारा दिया गया एस्टीमेट का फोटो…

50 प्रतिशत काला धन, 2 लाख की पार्किंग और आजीवन का एडवांस मेंटेनेंस वसूल रहा है यह बिल्डर...

जनता जानती है कि देश आर्थिक मंदी से झुंझ रहा है। महंगाई बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान छु रहे है। मोदी सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो रही है। नौबत यहां तक आ गई कि सरकारी कंपनियां बेची जा रही है। ऐसे में इस तरह कि टैक्स चोरी कोई कैसे बर्दाश्त कर सकता है। दिल्ली और गुजरात में बैठे आयकर विभाग के आला अधिकारी क्या कर रहे है? यह हिसाब एक दुकान का है और एक दुकान में जितनी रकम कि टैक्स चोरी की जा रही है उतनी रकम एक गरीब परिवार अपने पूरे जीवन में नहीं कमा पता होगा। ऊपर से कोरोना और बेरोजगारी का दौर। आयकर विभाग ( Income tax ) के आला अधिकारियों को चाहिए कि समय रहते बिल्डरों के प्रोजेक्ट पर खरीददार बनकर भी विजिट करें, और उक्त मामले में तत्काल संज्ञान लेकर उक्त बिल्डर के सभी प्रोजेक्ट में खरीद-बिक्री एवं एग्रीमेंट पर तब तक के लिए रोक लगाए जब तक उक्त मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती और टैक्स चोरी की रिकवरी नहीं हो जाती। शेष फिर।

ये भी पढ़ें-  वापी में जमीन का भाव आया जमीन पर, मात्र 298 रुपये प्रति स्क्वेयर फुट के हिसाब से बिकी जमीन।

यह भी पढ़े…

वलसाड, वापी और दमण, सिलवासा के बिल्डर टैक्स चोरी में अव्वल। 8 नहीं बल्कि 800 करोड़ की टैक्स चोरी का अनुमान!

बिल्डरों को मिली छापेमारी की गुप्त सूचना, सबने अपने अपने तरीक़े से ठिकाने लगाए काले धन के काले कागजात।

जब तक ब्लेक मनी नहीं मिलेगी तब तक कोई लीगल डोक्यूमेंट नहीं बनेगा : Nagjua