226 करोड़ का 2 प्रतिशत 4 करोड़ 52 लाख का कमिसन…. या घोटाला?

निर्माण अभी हुआ नहीं और घोटाले की बू- आ गई। संध प्रदेश दादरा नगर हवेली में स्वास्थ्य सेवा हेतु एक नए अस्पताल के निर्माण की योजना बनाई गई। उक्त योजना को अमलीजामा पहनाया जाए उस से पहले इस मामले में गडबड़ियों की बू आती नजर आ रही है। हालांकि दानह स्वास्थ्य सेवा व चिकित्सा विभाग के अधिकारी डाक्टर वी-के दास द्वारा कि गई अनियमितताओं व गडबड़ियों को लेकर कई खुलासे होते रहे है, लेकिन यह और बात है कि प्रशासन के कानों तले अब तक जू-नहीं रेंगी!

226 करोड़ Consultant Project Report
155 करोड़ P.W.D (i) Silvassa. Estimate Report No. 1.
94 करोड़  P.W.D (i) Silvassa. Estimate Report No. 2.

बताया जाता है कि इस टेण्डर व प्रोजेक्ट कंसल्टंसी में कई गडबड़िया हुई है और अभी भी गडबड़ियों का दौर जारी है। बताया जाता है कि इस प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट ने अपनी रिपोर्ट में इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 226 करोड़ बताई है।

वहीं लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाए गए एस्टिमेट में इस प्रोजेक्ट कि लागत लगभग 155 करोड़ बताई है, लेकिन इस 155 करोड़ वाले एस्टिमेट को जब दुबाDr.-Das-01रा बनाया गया तो उस नए एस्टिमेट में इस प्रोजेक्ट कि लागत लगभग 94 करोड़ बताई गई है।

अब सवाल यह उठते है कि इस प्रोजेक्ट की लागत में इतना फेर-बदल कैसे हुआ? अगर प्रोजेक्ट की लागत 226 करोड़ नहीं है तो कंसल्टेंसी करने वाली कंपनी को 226 करोड़ की रिपोर्ट के अनुसार कैसे रकम अदा कि गई? जब कंसल्टेंसी कंपनी को यह काम मिला था तब स-ओ-आर क्या थे और अब क्या है?

लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता व अधीक्षक अभियंता क्यों बार बार इस रिपोर्ट को बदल रहे है, क्यों बार बार अलग अलग एस्टिमेट बनाए जा रहे है? इस मामले में कैसा घोटाला हो रहा है और कैसा घोटाला हो चुका है, इस मामले प्रशासक को जांच करने की जरूरत है।

कुछ खास सवाल…. जब टेण्डर चार वर्ष पहले निकाला गया तो उसके कार्य की अंतिम दिनांक क्या थी?
अगर कंसल्टेंट कंपनी के पास स्टाफ नहीं था तो उसे टेण्डर कैसे मिला?
प्राइवेट कंसल्टेंट कंपनी को ओ-आई-डी-सी का स्टाफ कैसे दिया गया?
अगर लोक निर्माण विभाग इस प्रोजेक्ट की एस्टिमेट रिपोर्ट बना रही है तो कंसल्टेंट ने क्या किया?
लोक निर्माण विभाग द्वारा बार बार क्यों अलग अलग एस्टिमेट बनाया जा रहा है?

इस मामले में तथा टेण्डर से जुड़े कई ऐसे दस्तावेज हाथ लगे है जिन्हे देख कर लगता है कि, इस मामले में सरकार को चुना लगाने का काम संध प्रदेशों के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, और दस्तावेजों व जानकारी के अनुसार इस मामले में श्री विनोबाभावे अस्पताल के अधीक्षक डाक्टर दास, कर्मचारी पायल ठक्कर, ओ-आई-डी-सी के सहायक अभियंता परमार व लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं द्वारा कई अनियमितताएँ बरती गई है, जिनकी जांच अनिवार्य है।