भ्रष्टाचार, भाईगीरी, हफ्ता-वसूली और माफियागिरी पर अंकुश लगाने में प्रशासक प्रफुल पटेल भी फैल!

दमन में, भ्रष्टाचार, भाईगीरी, माफियागिरी, हफ्ता-वसूली और शराब-तस्करी करने वाले, प्रशासक प्रफुल पटेल की गोद में नहीं बैठे है तो क्या प्रशासक प्रफुल पटेल उनकी गोद में है? यह सवाल इस लिए है क्यों की प्रशासक पद पर प्रफुल पटेल की नियुक्ति के बाद, अब तक ना ही दमन में भ्रष्टाचार बंद हुआ, ना ही भाईगीरी बंद हुई, ना ही माफियागिरी और ना ही हफ्ता-वसूली, चंद छोटे-मोटे मामलों में अवश्य शराब तस्करो पर गाज़ गिरी, लेकिन उस गाज़ का श्रेय भी गुजरात प्रशासन को मिला। दमन प्रशासन ने तो गुजरात पुलिस की छापे मारी के तुरंत बाद, उन शराब कारोबारियों को भी पुनः शराब बेचने की स्वीकृति दे दी, जिनके खिलाफ गुजरात में दर्जनों मामले लंबित है।

क्या किसी बच्चे के नेटवर्क से भी कमजोर है प्रशासन का नेटवर्क?

क्या दमन-दीव प्रशासन के बड़े बड़े अधिकारियों का नेटवर्क एक बच्चे के नेटवर्क से भी कमजोर है? क्यों की दमन के किसी समजदार बच्चे से भी पूछा जाए, तो वह भी तुरंत बता देगा की दमन के किस क्षेत्र में किस भाई का राज है, और किस क्षेत्र में काम करने के लिए किस भाई को नमस्ते करना पड़ेगा?

कमाल फोटो का या फोटो वाले का?

सुरेश पटेल, जिगगु पटेल तथा केतन पटेल जैसे नेताओं पर, प्रशासन केवल इस लिए कार्यवाही नहीं करती है कि वह नेता है और प्रशासक प्रफुल पटेल के साथ हस्ते हुए फ़ोटो खिचवाते है? तो जरा सोचिए प्रशासक प्रफुल पटेल, प्रशासन के इस रवैये से जनता और अपराधियों में क्या संदेश जाता होगा?

अब तक कई कथित भ्रष्ट अधिकारियों पर विकास के नाम पर मेहरबानी दिखा चुके है प्रशासक प्रफुल पटेल। जिस पर जीतने अधिक आरोप उस पर उतनी ही अधिक मेहरबानी!

VK-DAS-Hindi-news-in-silvassa

दानह स्वस्थ्य विभाग के अधिकारी वी-के दास को दमन-दीव का अतिरिक्त प्रभार, दमन-दीव विधुत विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले को, दानह विधुत निगम का अतिरिक्त प्रभार, दमन लोक निर्माण विभाग के अभियंता पंकज पटेल को, दमन नगर निगम तथा जिला पंचायत के कार्यपालक अभियंता का अतिरिक्त प्रभार तथा लोक निर्माण विभाग के कनिय अभियंता बिपिन पवार को दमन आर-टी-ओ का अतिरिक्त प्रभार देने से पहले, प्रशासक प्रफुल पटेल ने इन अधिकारियों के काम करने की काबिलियत को देखा या भ्रष्टाचार करने के बाद बचे रहने की काबिलियत को देख कर यह अतिरिक्त प्रभार दिए गए है? यह सवाल अब दमन-दीव व दानह की प्रबुद्ध जनता के उन मुह पर है, जिन पर प्रशासन अभी तक किसी प्रकार की भय की टेप लगाने में असफल रही!

दर्जनों अधिकारी विकास करने के बजाए हो रहे विनाश पर अंकुश लगाए तो जनता के लिए ज्यादा बेहतर होगा…

दमन के किस इलाके का भाई कोन है और वह किस कंपनी तथा ठेकेदार से कितनी वसूली करता है यदि इसकी जानकारी भी प्रशासक प्रफुल पटेल के पास नहीं है तो दमन-दीव व दानह प्रशासन में इतने आई-ए-एस एवं आई-पी-एस अधिकारी क्या कर रहे है इसका जवाब तो प्रशासक प्रफुल पटेल को ही देना होगा?

क्या आई-बी को भी पता नहीं है दमन में भाई-राज और माफियागिरी के बारे में?

वैसे इतने अधिकारियों के अलावे दमन में आई-बी के अधिकारी भी मौजूद है और इस तरह की जानकारी हांसील करने में आई-बी के अधिकारियों को महरथ हासिल है, प्रशासक महोदय यदि वास्तव में आप भाईगीरी, माफियागिरी और हफ्ता-वसूली की जानकारी से अनभिज्ञ है तो आई-बी के अधिकारियों से इस मामले में तहक़ीक़ात करवाइए!

क्या दमन का फील्ड-पब्लिसिटी विभाग भी चाटुपत्रकारिता प्रेमी है?

हालांकि क्रांति भास्कर ने, भाईगीरी, माफियागिरी और हफ्ता-वसूली जैसे मामलों में इससे पहले भी कई बार प्रमुखता से ख़बरे प्रकाशित की है लेकिन लगता है अब तक प्रशासक प्रफुल पटेल तक क्रांति भास्कर की उन खबरों की कतरने नहीं पहुंची, या फिर दमन-दीव के फील्ड-पब्लिसिटी विभाग को भी केवल चाटुपत्रकारिता वाली खबरों की कतरने जमा करने की आदत लग गई है?

10 आई-ए-एस, 4 आई-पी-एस, 3 आई-एफ-एस और दर्जनों दानिक्स एवं दानिप्स अधिकारियों की उपस्थिती के बाद भी व्यस्व्स्था अस्थ-व्सस्थ।

संध प्रदेश दमन-दीव व दानह में इस वक्त प्रशासक प्रफुल पटेल के पास, 10 आई-ए-एस अधिकारी है, 4 आई-पी-एस अधिकारी है, 3 आई-एफ-एस अधिकारी है तथा लगभग 1 दर्जन से अधिक दानिक्स एवं दानिप्स अधिकारी है अब इतने वरीय तथा काबिल अधिकारियों की निगरानी के बाद भी यदि भ्रष्टाचार, अनियमितताएँ, भाईगीरी, माफियागिरी और हफ्ता-वसूली बदस्तूर जारी रहे तो यह दमन-दीव व दानह प्रशासन के लिए चुल्लू-भर पानी तलाशने वाली बात है!

एक नोटिस बोर्ड ऐसा भी लगाए और जनता समय एवं पैसा बचाए!

दमन-दीव व दानह प्रशासन यदि भ्रष्टाचार के मामलों में, जनता की शिकायतों पर जांच नहीं करना चाहती अथवा जांच की फ़ाईले दबाकर रखना चाहती है, तो कृप्या प्रशासक प्रफुल पटेल को, सचिवालय के बाहर तथा अन्य सरकारी विभागो एवं कार्यालयों के बाहर, सतर्कता विभाग के नाम पर लगे नोटिस बोर्ड की तरह, जनता के लिए एक और अतिरिक्त बोर्ड भी लगा देना चाहिए, जिसमे लिखा हो की कृप्या भ्रष्टाचार के मामले में भ्रष्ट अधिकारियों की शिकायत करके अपना कीमती समय एवं पैसा खर्च ना करें!

दमन का बच्चा बच्चा जानता जिग्नेश पटेल उर्फ जिग्गुभाई की हफ्ता-वसूली और कारगुजारियों के बारे में और सीबीआई केतन पटेल के यहां पहुँच गई, इसे कहते है कही पर निगाहे कही पर निशाना!

Sukha patel Daman News

संध प्रदेश दमन-दीव व दानह प्रशासन में ऐसे कई अधिकारी है जो पूर्व में किसी ना किसी घोटाले में तथा भ्रष्टाचार के मामले में पकड़े जा चुके है और निलंबन का स्वाद चख चुके है, अब ऐसे अधिकारियों के हाथों में प्रशासनिक विभागों की बागडोड देकर प्रशासक प्रफुल पटेल किस तरह का और किस किसम का विकास करना चाहते यह तो वही जाने, लेकिन ऐसे अधिकारियों पर प्रशासन की मेहरबानी देखकर जनता का यह सवाल है की क्या प्रशासन के पास इन अधिकारियों के अलावे कोई और विकल्प है ही नहीं या प्रशासन सवय जान-बुझ कर कोई विकल्प तलाशना नहीं चाहिए।

  • ना ही भ्रष्टाचार में कमी आई ना ही भाईगीरी में…
  • प्रशासक प्रफुल पटेल को जनता से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों पर भरोसा।
  • जनता की शिकायते धूल चाट रही है और भ्रष्ट अधिकारी मलाई चाट रहे है।
  • चंद पत्रकारो को सरकारी विज्ञापन का लालच देने से, सच्चाई छुपती नहीं प्रशासक महोदय।

प्रशासक महोदय भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात करने से पहले, प्रशासक कार्यालय तथा प्रशासनिक विभागों में लंबित पड़ी शिकायतों पर गौर कीजिए और उन अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर उन तमाम अधिकारियों को तत्काल निलंबित कीजिए जिनके जांच एवं निलंबन की मांग जनता जनर्धन करती आई है। पिछले कई वर्षों से दमन-दीव व दानह प्रशासन, जनता को उनकी शिकायतों हुई कार्यवाही की जानकारी नहीं दे रही है, क्या सतर्कता विभाग में यदि अधिकारियों की कमी है तो दमन-दीव व दानह के काबिल बे-रोजगारो इस विभाग में नोकरी दीजिए जिससे विभाग ठीक तरह से चल सके।

दमन-दीव व दानह के किसी नेता ने गड़बड़ी की है तो उसका जवाब तो जनता समय आने पर अपने वोट से भी दे सकती है इस लिए राजनेताओं पर गाज़ गिराने के बजाए उन अधिकारियों के माथे पर से अपना हाथ हटाये, जिनके भ्रष्टाचार का कीचड़ आपसे पहले कई अन्य प्रशासकों की सफ़ेद कमीज को धुंधला कर चुका है।

यदि जनता की शिकायते अधिक है और दमन-दीव व दानह सतर्कता विभाग के पास जांच का समय नहीं है तो उन तमाम अधिकारियों की जांच सीबीआई अथवा किसी केंद्रीय जांच एजेंसी से करवाएँ, आखिर उनका काम ही यही है, तो समय व्यर्थ ना करते हुए जांच की और कदम बढ़ाए और इस देश का पैसा बचाएं।

क्रांति भास्कर इससे पहले भी कई बार भ्रष्टाचार और भाईगीरी के मामलों में प्रशासन की पोल खोल चुकी है और प्रशसन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर चुकी है आगे भी भ्रष्टाचार और भाईगीरी पर अंकुश लगाने के लिए क्रांति भास्कर देश हित में अपनी यह मुहिम जारी रखेगी, चाहे उसे शडियंत्र में फंसा देने की धम्की ही क्यो ना मिले, क्रांति भास्कर प्रशासन अथवा किसी भ्रष्ट अधिकारी की धमकियों से नहीं डरती, बल्कि निडरता से पत्रकारिता करती है, यहां की प्रशासन भले-ही चाटुकारिता की आदि हो चुकी हो, लेकिन क्रांति भास्कर चाटूपत्रकारिता नहीं जानती, बल्कि उन तमाम नोकरशाहों की चूल हिला डालने की कुबत रखती है जिनहोने देश की जनता का धन लूटा।

प्रशासक महोदय, दमन-दीव व दानह का भला करने की बात से जनता भला नहीं होने वाला, वास्तव में यदि जनता का भला करना है तो जनता की शिकायतों पर जांच करें और भ्रष्ट अधिकारियों को निलंबित करें, वरना भ्रष्टाचार के मामलो में जांच नहीं करने पर, हो सकता है की जनता कल आपकी भी जांच की मांग कर बैठे। शेष फिर।

 

Leave your vote

500 points
Upvote Downvote

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of