तत्कालीन प्रशासक आशीष कुन्द्रा के कार्यकाल से लेकर प्रशासक प्रफुल पटेल के कार्यकाल तक कई अधिकारियों की भूमिका शंकसास्पद: मामले में सीबीआई जांच की मांग।

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Praful Patel, dadra nagar haveli liberation day

संध प्रदेश दमन-दीव व दानह की जनता द्वारा की गई शिकायतों पर प्रशासक प्रफुल पटेल के कार्यकाल में क्या कार्यवाही हो रही है? दमन-दीव व दानह प्रशासक पद पर, प्रशासक प्रफुल पटेल की नियुक्ति के पहले, जनता द्वारा जो शिकायते की गई उन शिकायतों का क्या हुआ, कितनी शिकायतों पर कार्यवाही की गई तथा कितनी शिकायतों पर कार्यवाही अब भी शेष है?

यह सवाल इस लिए है क्यो की शिकायत से संबन्धित एक ऐसा मामला सामने आया है जो दमन-दीव व दानह के कई अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है, मामला है दमन-दीव के तत्कालीन उप वन संरक्षक डेबेन्द्र दलाई द्वारा बरती गई अनियमितताओं का तथा अपने पद एवं सरकारी निधि के दुरुपयोग का।

इस मामले में अब दमन-दीव व दानह के तत्कालीन प्रशासक आशीष कुन्द्रा, तत्कालीन प्रशासक विक्रम देव दत्त, तत्कालीन विकास आयुक्त संदीप कुमार, तत्कालीन विकास आयुक्त जे-बी सिंह, तत्कालीन विकास आयुक्त उमेश कुमार त्यागी, तथा प्रशासक के सलाहकार एस एस यादव एवं दमन-दीव व दानह के प्रशासक प्रफुल पटेल की भूमिका भी शंकास्पद दिखाई देती है।   

मामला है जून 2015 का, डेबेन्द्र दलाई उप वन संरक्षक, के बारे में तत्कालीन प्रशासक आशीष कुन्द्रा को जून 2015 में एक शिकायत की गई थी, उक्त शिकायत में बताया गया की दमन-दीव के उप वन संरक्षक डेबेन्द्र दलाई ने कई नियमों का उलंधन किया है तथा सरकारी धन एवं अपने पद तथा अधिकारो का दुरुपयोग किया है। इसके साथ तत्कालीन प्रशासक आशीष कुन्द्रा को यह जानकारी भी दी गई की डेबेन्द्र दलाई ने दमन-दीव तथा दादरा नगर हवेली के वित्त विभाग द्वारा जारी मेमोरिएंडम का अनादर किया है तथा ई-भुगतान के माध्यम से सरकारी लेन-देन करने के निर्देश की भी अवहेलना की गई तथा गरीब मजदूरो को मिलने वाले पैसे को चंद अधिकारियों के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।

इस पूरे मामले में शिकायत के साथ साथ किस अधिकारी के खाते में कितनी रकम का ट्रांसफर किया गया तथा किस मेमोरिएंडम का अनादर किया गया इसकी प्रति एवं दस्तावेज़ भी सबूत के तौर पर शिकायत के साथ तत्कालीन प्रशासक आशीष कुन्द्रा को दिए गए थे।

Daman IFS Officer, Debendra Dalai IFS Daman IFS Officer, Debendra Dalai IFS

 

इसके बाद उक्त तमाम मामले की जानकारी तथा संबन्धित दस्तावेज़ तत्कालीन सचिव उमेश त्यागी सतर्कता विभाग दानह, को दी गई, उक्त मामले में त्यागी ने उक्त मामले की जानकारी दमन-दीव सतर्कता विभाग को दी तथा जांच के मामले को आगे बढ़ाया, दमन-दीव व दानह के तत्कालीन विकास आयुक्त संदीप कुमार के कार्यालय से होती हुई, मामले की फाइल मुख्य वन संरक्षक ओ-वी-आर रेड्डी के पास पहुंची।

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मामले में कार्यवाही शुरू हुई और प्रशासक आशीष कुन्द्रा का तबादला हो गया, प्रशासक आशीष कुन्द्रा के बाद दमन-दीव के प्रशासक पद का प्रभार विक्रम देव दत को मिला, इस मामले की पूरी जानकारी तब तत्कालीन प्रशासक विक्रम देव दत्त को दी गई तथा जो दस्तावेज़ प्रशासक आशीष कुन्द्रा को पूर्व में दिए गए थे वह तमाम दस्तावेज़ तत्कालीन प्रशासक विक्रम देव दत्त को दिए गए।

इस मामले में आगे चलकर यह जानकारी मिली की दमन-दीव व दानह के तत्कालीन विकास आयुक्त संदीप कुमार के कार्यकाल में ही दमन-दीव व दानह के तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक ओ-वी-आर रेड्डी ने मामले में पूरी जांच कर ली है तथा जांच में उप वन संरक्षक डेबेन्द्र दलाई दोषी पाए गए है।

इसके बाद क्या था, दमन-दीव व दानह के तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक ओ-वी-आर रेड्डी मामले की फाइल लेकर कभी तत्कालीन वन एवं पर्यावरण सचिव संदीप कुमार के पास चक्कर काटते रहे तो कभी तत्कालीन वन एवं पर्यावरण सचिव जे-बी सिंह के पास तो कभी तत्कालीन वन एवं पर्यावरण सचिव उमेश कुमार त्यागी के पास, लेकिन किसी ने इस मामले में ईमानदार मुख्य वन संरक्षक ओ-वी-आर रेड्डी का साथ नहीं दिया, डेबेन्द्र दलाई की करतूतों की फाइले कभी संदीप कुमार तो कभी जे-बी सिंह दबाकर बैठे रहे बची कूची कसर चक्कर कटवाने की उमेश कुमार त्यागी ने पूरी करवा दी।

इसके बाद दमन-दीव व दानह के प्रशासक पद पर प्रफुल पटेल की नियुक्ति हुई, प्रशासक के सलाहकार पद पर एस एस यादव की नियुक्ति हुई, मुख्य वन संरक्षक ओ-वी-आर रेड्डी ने एक बार बात-चित करते हुए यह बताया था की इस मामले की जानकारी प्रशासक प्रफुल पटेल को भी है तथा प्रशासक के सलाहकार एस एस यादव को भी है, लेकिन इसके बाद भी पता नहीं कोई इस मामले में डेबेन्द्र दलाई को निलंबित क्यों नहीं कर रहा है।

मामला अभी भी जस के तस है, मामले में ना ही तत्कालीन प्रशासक आशीष कुन्द्रा के कार्यकाल से अब तक जिसने भी प्रशासक का प्रभार संभाला तथा दमन-दीव व दानह विकास आयुक्त तथा वन एवं पर्यावरण सचिव का प्रभार संभाला, उन सभी को इस मामले की जानकारी थी, यहाँ तक की प्रशासक प्रफुल पटेल तथा प्रशासक के सलाहकार एस एस यादव को भी इस मामले की जानकारी होते हुए भी किसी अधिकारी ने डेबेन्द्र दलाई पर कोई कार्यवाही नहीं की।

अब इसके लिए तत्कालीन प्रशासक आशीष कुन्द्रा से लेकर प्रशासक प्रफुल पटेल तक तथा तकालीन विकास आयुक्त एवं तत्कालीन वन एवं पर्यावरण सचिव संदीप कुमार से लेकर प्रशासक के सलाहकार एस एस यादव तक, इस मामले से नाता रखने वाले किस किस अधिकारी ने, डेबेन्द्र दलाई आई-एफ-एस पर कठोर कार्यवाही नहीं करने के लिए कितनी रिश्वत ली? इसकी तो सीबीआई जांच होनी चाहिए क्यों की इस मामले में लगभग 1 दर्जन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े होते है ऐसे में वास्तव में सच तभी सामने आ पाएगा जब इस मामले में अब सीबीआई जांच हो। वैसे डेबेन्द्र दलाई के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामलों की लिस्ट इतनी लंबी है की उसकी पूरी फेहरिस्त सामने लाने में लिखते लिखते महीनों लग जाएंगे, तथा इस मामले एवं इस शिकायत के अलावे भी दमन के एक कोंट्रेक्टर श्रीयेश शर्मा के साथ मिलकर भी डेबेन्द्र दलाई ने कई घोटाले किए है जिसकी जांच की फाइल भी किसी बड़े अधिकारी के कार्यालय में धूल चाट रही है आने वाले अंकों में उस पर पुनः प्रकाश डालेंगे।

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फिलवक्त इस मामले को देखने के बाद अब दमन-दीव व दानह की जनता द्वारा की गई उन तमाम शिकायतों पर यह चिंता हो रही है की उन शिकायतों में किसी प्रकार के सबूत तथा दस्तावेज़ जनता ने संलग्न किए है या नहीं? क्यों की जब सबूत तथा दस्तावेज़ के साथ की गई शिकायत का या आलम है तो फिर गरीब जनता द्वारा की गई उन शिकायतों का क्या होगा जिनमे जनता ने विभागीय अधिकारियों पर भ्रष्टाचार तथा अनियमितताएँ के आरोप लगाए है?

क्या दमन-दीव व दानह प्रशासन, दमन-दीव व दानह की गरीब जनता को सीबीआई या जांच एजेंसी का कोई बड़ा अधिकारी समझती है जो दमन-दीव व दानह प्रशासन एवं प्रशासक को सभी सबूत सवय ही खोज कर लाकर दे दे? या दमन-दीव व दानह की जनता द्वारा की गई शिकायते लेकर उन शिकायतों पर कार्यवाही नहीं करने के लिए प्रशासन के बड़े बड़े अधिकारी उन अधिकारियों से पैसे एठते रहे है जिनके खिलाफ जनता की शिकायते आती है?  

दमन-दीव व दानह में प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कितनी शिकायते जनता द्वारा की गई? कितनी शिकायतों पर प्रशासन ने कठोर कार्यवाही की तथा कितनी शिकायतों पर कार्यवाही नहीं करने के लिए उन अधिकारियों से काली कमाई की जिनके खिलाफ जनता द्वारा भ्रष्टाचार तथा अनियंत्ताओं की शिकायते की गई? इसकी पूरी जानकारी और पूरा सच जानने के लिए या तो प्रशासन उन तमाम शिकायतों के आधार पर उन तमाम अधिकारियों की जांच करवाए या उन तमाम शिकायतो को प्रशासन अपनी वेबसाइट पर शिकायत की वास्तविक स्थाती तथा शिकायत पर की गई जांच एवं जांच की रिपोर्ट के साथ पूरी जानकारी उपलोड करके जनता को डिजिटल इंडिया और भ्रष्टाचार मुक्त भारत के दर्शन कराएं। शेष फिर।