VBCH की व्यवस्थाओं पर फिर सवाल, दवा के अभाव में गरीब मरीजों की हालत राम भरोसे।

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संध प्रदेश दादरा नगर हवेली में स्थित विनोबा भावे सिविल अस्पताल की देख-रेख पिछले कई वर्षों से डाक्टर दास के जिम्मे है। डाक्टर दास उक्त अस्पताल के अधीक्षक है। सीधी भाषा में कहे तो उक्त अस्पताल के मुख्या डाक्टर वी-के दास है। जिनके पास कई विभागो के अतिरिक्त प्रभार भी है। अब यदि मुख्या ही अपने अस्पताल से नदारद हो अन्य कर्मचारियों अधिकारियों पर दोष मंढ़ना कहा तक सही होगा। खेर मामला यह नहीं है कि डाक्टर दास अस्पताल में क्यो नहीं मिलते, मामला तो यह है की मरीज़ों को अस्पताल में सभी दवाइयाँ क्यो नहीं मिलती।

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बताया जाता है कि विनोबा भावे सिविल अस्पताल में मरीजों को 6 न. से दवा लेने के लिए कहा जाता है। जिसमे हैरान करने वाली बात यह है कि 24 घंटे दवा वितरण करने वाली खिड़की को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक बंद कर दिया जाता है जिससे मरीजो को दवा लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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इलाज कराने आए मरीजों को इलाज के लिए काफी बड़ी लाइनों से भी गुजरना पड़ता है जिससे मरीजो का काफी समय इंतजार में गुजर जाता है वही डॉक्टर द्वारा दिये गए दवाइयों को लेने के लिए भी एक लंबी कतार से गुजरना पड़ता है इतना ही नहीं बताया यह भी जाता है कि इलाज कराने के बाद मरीजो को डॉक्टरों द्वारा लिखी दवाइयां भी पूरी तरह से नही मिल पा रही है मरीजो को छोटी मोटी दवाइयां तो मसक्कत के बाद दवा वितरण खिड़की से मिल जाती है किन्तु बड़ी ओर महंगी दवाइयां मरीजो को बाहर से लेनी पड़ रही है, अब ऐसा क्यो है? इसका पता तो वह अधिकारी लगाए, जिसने उक्त अस्पताल के अधीक्षक का पद डाक्टर दास को दिया है। वैसे मामले में जो जानकारी मिली है उसमे कितना सच है यह जानने के लिए, प्रशासन को सभी सीसीटीवी के वीडियो एक बार देख लेने चाहिए।