दमन में करोड़ो का काला धन सफ़ेद…

संध प्रदेश दमन और Daman में काले धन की चर्चा कोई नई बात नहीं है इस प्रदेश में काला धन रखने वालों के नामों की फेहरिस्त तो काफी लंबी है ही साथ ही, साथ ही साथ समय समय पर आयकर विभाग की टीमों द्वारा यहां छापे मारी होती रही है। लेकिन भारत सरकार और प्रधानमंत्री द्वारा जो निर्णय काले धन को लेकर लिया गया है तथा उस निर्णय के तहत जो नियम बनाए गए है, उन नियमों से, काले धन को दबा कर बैठे कई बादशाहों की एक बार तो चुले अवश्य हिला डाली है। यह और बात है की अभी भी कुछ उधमी ऐसे है जो भारत सरकार की आंखों में धूल झोंक कर, अपने काले धन को सफ़ेद करने की भरपूर कोशीस कर रहे है, वही बताया यह भी जाता है की कुछ उधोगपति, ठेकेदारों तथा श्रमिकों की मदद से तथा उन पर दबाव बनाकर एवं लालच देकर, दमन के कुछ खास नेताओं ने शराबमाफिया ने, एवं दो-नंबर का व्यापार करने वाले व्यापारियों ने अपने काले धन को सफ़ेद किया है यह और बात है कि इसकी पुष्टि हम अभी नहीं कर सकते कि किस ने कितना काला धन सफ़ेद किया है लेकिन जो चर्चाएँ इस वक्त बाजार में सुनी जा रही है उसे सुनने के बाद तो यही मालूम जान पड़ता है कि इनकी तरकीबों और जुगाड़ के सामने भारत सरकार और आयकर विभाग बोनी दिखाई पड़ती है।

दमन में वैसे तो ऐसे कई बड़े बड़े नाम है, जिनके बारे आम बाजार में उनके काले धन कि चर्चाओं से हमेशा चर्चाओं का बाज़ार गर्म रहा, लेकिन इस वक्त बात करते है उन नामों की जो जनता की नजर में काले धन और अकूत संपत्ति के बादशाह बताए जाते है, लेकिन अगर इन नामों में पहले नंबर पर कोन है और अंतिम नंबर पर कोन, तो इसका आंकलन लगाना बामुश्किल दिखाई पड़ता है, इस लिए जिस तरह जनता में चर्चा है उसी तरह उसी अंदाज में बात की जाए तो ही बेहतर होगा!

काले धन और बे-नामी संपत्ति को लेकर इनके चर्चे भी जोरों पर…   

आम जनता और बाज़ार में जहां एक तरफ काले धन को लेकर लालुभाई पटेल का नाम बाज़ार गर्म कर रहा है तो वहीं दूसरी और केतन पटेल का नाम। यह दोनों ही पिछले कई वर्षों से सक्रिय राजनीति में है और जनता की सेवा करने का दावा करते रहे है लेकिन जनता की सेवा करते करते अब तक इनहोने कितना मेवा अंदर किया उसका हिसाब तो सरकार और जांच एजेंसिया ही लगा सकती है। वैसे अभी तक यह तो साफ़ नहीं हुआ है कि इनहोने कितना काला धन सफ़ेद किया है लेकिन इस बात कि चर्चाएँ थमने का नाम ही नहीं ले रही है कि इनके पास भी काले धन कि भरमार है! हालांकि क्रांति भास्कर को इस मामले से संबधित जो जानकारियाँ प्राप्त हुई है उसे देख कर लगता है की इस मामले में अभी भी और ख़ोज-बीन की आवश्यकता है इस लिए इस मामले में क्रांति भास्कर जल्द मामले की पूरी खोजबीन कर मामले को जनता और सरकार के सामने रखेगी, वैसे अगर जानकारों कि माने तो इन दोनों नेताओं के पास इतना काला धन और बे-नामी संपत्ति है कि जिसे देखकर शायद एक बार प्रधानमंत्री श्री मोदी कि भी आंखे चौंधिया जाए!

वैसे इन दो नामों के अलावे और कई नाम और भी बताए जाते है जिनमे सुरेश पटेल उर्फ सूखाभाई और रमेश पटेल उर्फ रमेश माइकल, बताया जाता है की इनके पास भी काले धन की भरमार है और इनके कई काले कारनामों कि दासता, काली स्याही से गुजरात के कई न्यायालयों में लिखी पड़ी है। साथ ही साथ यह भी बताया जा रहा है कि यह कई अलग-थलग तरकीबों के सहारे काले को सफ़ेद करने का काम भी कर रहे है।

नाम केवल यही नहीं है नामों कि फेहरिस्त तो काफी लम्बी है लेकिन अब अधिकतर इन नामों के अलावे जिन की सर्वाधिक चर्चा बाज़ारों में है वो या तो इन के करीबी है या सगे संबंधी या फिर किसी ना किसी व्यवसाय में घोषित तथा अधोषित साझेदार, लेकिन समस्या यह है कि इन सब पर एक साथ आयकर विभाग नज़र कैसे रखेगा और कैसे इनके काले धन को सेफेद होने से रोकेगा? जबकि इन नामों में से कई नाम और इनके साथी यहां के बाहुबलियों में से आते है और जिनके बारे में बताया जाता है कि उनके रास्ते कि रुकावट बनना अपने बुरे हस्र को न्योता देने के बराबर बताया है, हालांकि क्रांति भास्कर को भी कई बार यह चेतावनी मिल चुकी है कि अगर इन्हे बे-नकाब किया तो हस्र बड़ा भयानक होगा, लेकिन क्रांति भास्कर को चुनोती या चेतावनी देने वाले शायद यह भूल गए कि क्रांति भास्कर जनता कि वो चोथी जागीर है जो किसी टपोरी के धमकाने से अपने कर्तव्यों को भूलने वाली नहीं, क्रांति भास्कर पहले भी जनता कि आवाज थी और आगे भी जनता कि आवाज बने रहने के लिए प्रतिबद्ध है।

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अब बात करते है उस तकनीक और चाल कि जिसके बल पर Daman के यह नेता और माफ़िया अपना काला धन सफ़ेद कर रहे है, तो जैसा कि सभी जानते है कि Daman में उधोगों कि कोई कमी नहीं है, और ना ही ठेकेदारों कि तथा ना ही श्रमिकों कि। बस इस बात का फाइदा उठाकर यह लोग अपने काले धन को सफ़ेद करने में लगे है।

काले धन को सफ़ेद करने कि तकनीक नंबर -1

बताया जाता है कि औधोगिक इकाइयों से श्रमिकों को मिलने वाला सफ़ेद धन तो ठेकेदार रख लेता है और उसके बदले में, जो नाम ऊपर दिए गए है उनका काला धन, 500 रुपये और 1000 रुपये के बड़े नोट के रूप में उन श्रमिकों में बांट दिया जाता है और इसी तरीके से अब तक ना जाने कितने करोड़ रुपए बदले गए है इसकी जांच तो आवश्यक है ही, लेकिन आयकर विभाग को इस बात का ब्योरा लेने के लिए सबसे पहले उन ठेकेदारो और उधोगिक इकाइयों के यहां छापे-मारी करनी होगी जो ठेकेदारो और श्रमिकों को नगद भुगतान करती है।

काले धन को सफ़ेद करने कि तकनीक नंबर -2 

अब दूसरा वो ज़रिया है जिसके बारे में जानने के बाद सरकार और आर-बी-आई दोनों कि नींदे उड़ जाएगी, हालांकि इस पर भी जांच कि जा सकती है लेकिन जब तक सरकार जांच करेगी तब तक यह लोग कहीं अपने काले कारनामों पर पर्दा ना डाल दे। बताया जाता है कि दमन कि गरीब जनता जो अपनी गाढ़ी कमाई, सरकारी फरमान के चलते बेंक में बदलवाने जाती है, उसके आई-डी कार्ड को बेंक कर्मी दूसरी बार अपनी आवश्यकता अनुसार इस्त्माल कर, पुनः उसी के नाम पर एक एंट्री और चढ़ा कर, उन लोगो का काला धन सफ़ेद कर रहे है जिनहोने बेंक में कोई आई-डी कार्ड नहीं दिया। इस तरीके से भी अब तक दमन कि कई बेंकों में करोड़ों के वारे-न्यारे हो चुके है ऐसी चर्चा और शंका जताई जा रही है।

काले धन को सफ़ेद करने कि तकनीक नंबर -3 

इसके अलावे तीसरा तरीका और भी है वह सीधे सीधे किसी ठगी से कम नहीं दिखाई पड़ता, बताया जाता है कि कुछ बेंक ऐसी है जो गरीब जनता को 4000 हजार रुपये प्रति व्यक्ति कि जगह मात्र 2000 रुपये प्रति व्यक्ति दे रही है, और इस कमी का कारण पूछने पर जनता को बेंक में नगदी कि कमी का हवाला देकर जनता को लोटा दिया जाता है, लेकिन वास्तव में इसका यह अर्थ मालूम जान पड़ता है कि गरीब जनता के प्रत्येक पहचान पत्र पर 2000 रुपये बेंक ने बचा लिए जिसे वह बड़ी रकम जमा कर किसी बड़े माफ़िया को दे सकेगी या उसका काला धन बदल सकेगी!

सूखा पटेल और रमेश माइकल कर रहे है करोड़ो का काला धन सफ़ेद… 

अब यह जानना भी आवश्यक है कि इस मामले में सबसे अधिक नाम सुरेश पटेल उर्फ सूखा पटेल और रमेश पटेल उर्फ रमेश माइकल का क्यो लिया जा रहा है, तो इसका कारण यह बताया जाता है कि इन दोनों कि छवि बाहुबली कि है, तथा दमन कि कई औधोगिक इकाइयों में श्रमिकों के ठेके सुरेश पटेल उर्फ सुखभाई कि देख-रेख में चलते है तथा अधोषित रूप से सुखाभाई कई ठेकेदारो के साझेदार है और उनसे हफ्ता लेते है इस मामले में क्रांति भास्कर पहले भी अपनी ख़बर प्रकाशित कर चुकी है।

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दमन में वीर सिक्योरेटी सर्विसिस सुखभाई के रिसतेदार भारत पटेल कि बताई जाती है और बताया जाता है कि दर्जनों औधोगिक इकाइयों द्वारा इस ठेकेदार कि कंपनी को ठेके प्राप्त है, इसके आलावे अरुण दुबे, बबलू, अनिल सिंह जैसे कई ठेकेदार है जिनके पास कई इकाइयों के ठेके है और इन सभी के बारे यह बताया जाता है कि यह सुखभाई के काफी नजदीकी है तथा दर्जनों इकाइयों में ठेका चला रहे है। बताया जाता है कि इन ठेकेदारो को तथा इन ठेकेदारो कि कंपनियों में काम कर रहे श्रमिकों कि मदद से भी अब तक करोड़ो का काला धन सफ़ेद किया जा चुका है।

कई बड़े बड़े कारनामों में अनिल अग्रवाल का नाम… 

इन ठेकदारों के अलावे एक और नाम है जो है अनिल अग्रवाल का यह वो नाम है जो कई जगह लिया जाता रहा है फिर चाहे मामला सचिवालय में अधिकारियों के तबादले कि लोबिंग करने के लिए हो या फिर किसी राजनीतिक समझोते का, अनिल अग्रवाल वैसे तो दमन के एक जाने माने उधोगपति है जो आए दिन दमन के बड़े बड़े अधिकारियों के साथ देखे जाते रहे है लेकिन अधिकारियों को शायद यह पता ही नहीं कि उक्त उधोगपति कि जमीनी छवि क्या है और उक्त उधोगपति के साथ अधिकारियों कि मीटिंग को जनता किस नज़र से देखती है और उक्त उधोगपति के साथ बैठने के बाद उक्त अधिकारी और प्रशासन पर किस प्रकार का कीचड़ उछलता है! खेर इस विषय पर क्रांति भास्कर किसी और अध्याय में विस्तार से प्रशासन को सच्चाई बताने का प्रयत्न करेगा। फिलवक्त पुनः काले धन के मुद्दे पर आते है। बताया जाता है कि जहां ठेकेदारो और श्रमिकों से काला धन बदलवाने का काम सुरेश पटेल उर्फ सूखाभाई कर रहे है वही दूसरी और उधोगिक इकाइयों से बड़ी बड़ी रकम को काले धन से सफ़ेद धन का पायजामा पहनाने का काम अनिल अग्रवाल कर रहा है। और यह एक ऐसा विषय है जिस पर ना ही प्रशासन जांच से मुह मोड सकती है और ना ही आयकर विभाग के अधिकारी क्यों कि यदि कल कुछ अधिक गड़बड़ी इनके वजह से हो गई, तो देश के प्रधानमंत्री श्री मोदी के कड़े रुख और तेवर देखने के बाद काही से भी यह नहीं लगता कि वो किसी भी प्रकार कि गलती और लापरवाही मांफ करेगे।

इस पूरे मामले में कही कोई बड़ा नेता शामिल है तो कही कोई कोई बड़ा दो-नंबरी कारोबारी, तो कही कोई बड़ा ठेकेदार, और कही बाहुबली और टपोरी, जिनकी बात मानने के लिए ठेकेदार भी मजबूर है और श्रमिक भी क्यों कि इनके नाम पर तो पुलिस में शिकायत करने से भी जनता डरती है, वैसे यदि सरकार और प्रशासन को इनके बाहुबली और गुंडागर्दी कि रिपोर्ट देखनी है तो इनके नाम पर दमन और गुजरात में चल रहे मामलों पर एक नज़र डाल दे।

दमन-दीव प्रशासन तथा प्रशासक श्री प्रफुल पटेल इस मामले में या तो सतर्कता विभाग से जांच करवाएँ या फिर इस मामले कि जांच के लिए सीबीआई को पत्र लिख सीबीआई से जांच करने का आग्रह करे, क्यों कि यदि दमन में काले धन को सफ़ेद होने से नहीं रोका गया तो भारत सरकार और प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र्भाई मोदी द्वारा काले धन को लेकर लिए गए इस कठोर निर्णय का वह परिणाम नहीं निकल पाएगी जिसकी कामना इस देश को है।

 

काले धन को लेकर प्रधान मंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी द्वारा लिए गए इस नेक निर्णय के बाद से दिनांक 17-11-2016 तक, क्रांति भास्कर कि टिम को जो जानकारिया मिली है, केवल उन जानकारियों पर ही उक्त ख़बर प्रशासन तथा जनता के सामने रखी है, लेकिन काले धन को सफ़ेद करने का जो गोरख धंधा अभी भी जारी बताया जाता है उसमे आगे कि जानकारियाँ मिलने के बाद क्रांति भास्कर इस मामले में आगे कि ख़बर प्रकाशित कर, प्रशासन तथा जनता के सामने जमीनी हकीकत लाने का प्रयास करेगी। शेष फिर।