सफाई अभियान तथा उत्सव से फुर्सत हो, तो अब प्रतिमाह एक रोजागर अभियान भी चलाए, प्रशासक महोदय!

सफाई अभियान तथा उत्सव से फुर्सत हो, तो अब प्रतिमाह एक रोजागर अभियान भी चलाए, प्रशासक महोदय! | Kranti Bhaskar
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आज़ दमन-दीव व दानह की जनता को सबसे अधिक आवश्यकता है रोजगार की। दमन तथा दानह में हजारों उधोग है उन हजारों उधोगो में लाखों मजदूर है, लेकिन उन लाखों मजदूर तथा मजदूरों की ठेकदारी करने वाले ठेकदारों के भविष्य का फ़ैसला चंद भाईगीरी करने वाले नेताओं के हाथ में है, इस पर क्रांति भास्कर ने कई ख़बरे प्रमुखता से प्रकाशित भी की लेकिन प्रशासन के कानों तले जू-तक नहीं रेंगी, खेर इस वक्त मामला कुछ और है, और वो मामला है रोजगार का।  

अब तक दमन-दीव व दानह में कितने सफाई अभियान हुए, कितने स्वच्छता पखवाड़े हुए, कितने फेस्टिवल मनाए गए, कितने उत्सव मनाए गए, कितनी प्रतयोगिताएँ हुई, तथा उन तमाम फ़ेस्टिवलों में तथा उत्सवाओं में कितना खर्च आया इसका तो पता नहीं, लेकिन सफाई अभियान, फेस्टिवल और उत्सव जैसे मामलों में व्यस्थ प्रशासन को पहले गरीब के पेट के लिए सोचना चाहिए या प्रत्येक पखवाड़े और माह अलग अलग उत्सवो में व्यस्त होकर उन गरीब मजदूरो को तथा उन नो-जवान बेरोजगारों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए इसका जवाब तो प्रशासन को देना ही होगा।

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क्यों की पिछले लम्बे समय से यह देखा जा रहा है की प्रशासन फेस्टिवल में अधिक व्यस्त है, हम फेस्टिवल का विरोध नहीं करते, वह अपनी जगह है, लेकिन किसी गरीब का पेट तो रोजगार से ही भर सकता है इस बात को प्रशासन यदि नहीं समझ सकती तो फिर उन तमाम बेरोजगारो के भविष्य का भगवान ही मालिक है, जिनके माता-पिता ने अपना पेट काट-काट कर उन्हे बेहतर शिक्षा दी, ताकि उन्हे बेहतर रोजगार मिल सके।  

रोजगार संबन्धित मामला हे तो आप को यह भी बता दे कि, प्रधान मंत्री मोदी जब दानह आए, तब एक रोजगार मेले का आयोजन हुआ था, उस रोजगार मेले में दानह के कितने बे-रोजगारो को रोजगार मिला इसकी जानकारी लेने के लिए क्रांति भास्कर टिम दानह के श्रम विभाग के अधिकारी प्रशांत जोशी के पास पहुंची थी पर उक्त अधिकारी ने यह जानकारी देने से माना कर दिया, तथा अन्य अधिकारियों से इस मामले में जानकारी लेने को कहकर क्रांति भास्कर के सवालो से किनारा कर लिया, इसका कारण क्या समझा जाए? क्या श्रम निरक्षक के पास उस वक्त का आंकड़ा तक नहीं है जब प्रधान मंत्री दानह आए और रोजगार मेले का आयोजन किया गया? अब यदि ऐसे अधिकारी को प्रशासक प्रफुल पटेल श्रम विभाग के लायक समझते है तो फिर इस प्रशासन के साथ साथ प्रशासक प्रफुल पटेल को भी जवाब देना होगा। क्रांति भास्कर उन लाखों बे-रोजगार का दर्द समझ सकती है जिनके माता-पिता ने अपनी गाढ़ी कमाई उनकी शिक्षा पर केवल इस लिए खर्च कर दी की उन्हे भी बेहतर रोजगार मिल सके।

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वैसे जहां तक रोजगार की बात है तो आपको यह भी बता दे दमन-दीव व दानह में सेकड़ों पद खाली पड़े है, सेकड़ों पद ऐसे है जिन-पर चंद गिने चुने अधिकारियों को नियुक्त कर तथा दर्जनों अतिरिक्त प्रभार देकर सालों से उस पद पर कोई नई नियुक्ति नहीं की गई? आखिर उन चंद अधिकारियों में दर्जनों विभाग बांटने का क्या कारण? क्यों उन तमाम विभागो में नए नो-जवानों को रोजगार देने के बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है?

इतना ही नहीं सेकड़ों कर्मचारी ऐसे है जिनके प्रमोशन सालो से लंबित है लेकिन प्रशासन इस मामले में भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। जब दमन-दीव व दानह के कर्मचारियों की फाइले ही समय पर प्रमोशन के लिए नहीं आगे बढ़ रही फिर इस प्रशासन से जनता की भलाई तथा बे-रोजगारो को नोकरी देने के लिए ठोस कदम की क्या उम्मीद की जा सकती है यह सोचने वाली बात है।

  • दमन-दीव व दानह की जनता को रोज़गार चाहिए।
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इस पूरे मामले को देखने के बाद वास्तव में यदि प्रशासन को जनता के रोजगार की चिंता है तो सबसे पहले श्रम विभाग को दुरुस्त करे तथा दमन-दीव व दानह में जीतने भी कर्मचारियों का प्रमोशन लंबित है उन्हे प्रमोशन दे, तथा खाली पड़े तमाम पदों पर तत्काल नई नियुक्तियों हेतु कार्यवाही शुरू करें, जिससे की प्रशासन का काम भी ठीक तरह से हो और जनता को रोजगार भी मिले। शेष फिर।

इन तमाम सवालों के जवाब श्रम विभाग के पास भी नहीं, तो फिर श्रम विभाग के अधिकारी किस बात की तंख्वाह लेते है और कैसे विभाग में काम करते है, इस सवाल का जवाब मांग रही है दमन-दीव व दानह की जनता।