DIA से दूरी बना रहा है दमन प्रशासन!

  • पारिख और गौर ने नेतृत्व से कुछेक उधोगपति नाराज।
  • दागी सदस्यों के चलते डी-आई-ए की गरिमा को धक्का!
  • गृह राज्य मंत्री के दौरे से क्यों दूर रखा गया डी-आई-ए को?
  • कुछेक दागी सदस्यों के चलते प्रशासन पूरे डी-आई-ए को कैसे कर सकता है नजरंदाज? 

दमन का एक ही ओधोगिक संगठन है, और उसे भी प्रशासन दरकिनार करे तो यह दमन के उधोगों के लिए एक चिंता का विषय है। वैसे तो डी-आई-ए व डी-आई-ए कुछ खास सदस्य काफी विवादों में रहे है, फिर चाहे वह प्रशानिक मामले हो या राजनीतिक। पूर्व में डी-आई-ए के चुनाव में राजनीतिक दखल सबने देखी, कुछेक ने बंद कमरे में आवाज उठाई तो कुछेक ने खामोशी से राजनीति की गुर्राती बिल्ली के सामने सिर झुकाने में ही भलाई समझी। और शायद इसी में उन्होने अपनी भलाई समझी! क्यों की व्यापारी अगर नेतागिरी के जंजाल में पड़ जाए तो भला व्यापार कैसे करेगा। हालांकि दमन में इकाइयों की संख्या कम नहीं है, लेकिन उनकी संख्या भी कम नहीं जो डी-आई-ए के नाम का ईस्त्माल कर अपने सितारे चमकाते रहे, नतीजा यह निकला कुछेक दागी सदस्यों से आज डी-आई-ए जैसी संस्थान की गरिमा को धक्का लगता देखा गया।
संध प्रदेश दमन में गृहराज्य मंत्री श्री हरिभाई चौधरी का आगम हुआ, विकास और व्यवस्था के नए आयाम तय किए गए, लेकिन इस पूरे दौरे में डी-आई-ए अलग-थलग सा देखा गया, बताया गया की मंत्री जी के इस दौरे में डी-आई-ए को बुलावा भी नहीं दिया गया, अब इसका कारण क्या है यह तो डी-आई-ए जाने, लेकिन कुछ प्रबुध इसका कारण विवादों से दरकिनार रहने का बता रहे है, कहां जा रहा है की डी-आई-ए के बुलावे मुख्य रूप से तीन महुनुभवों को आमंत्रित किया जाना था, जिसमे श्री अग्रवाल, श्री कुंदानी, तथा श्री गौर थे, लेकिन गौर और वेलनोन पॉलिएस्टर लिमिटेड पर लगे आरोप और विधुत विभाग से जुड़े मामले को देखते हुए, प्रशासन ने डी-आई-ए को अलग ही रखा, अब इस बात में कितनी हकीकत है यह तो डी-आई-ए अधिक जानता है लेकिन इस प्रकार की चर्चा डी-आई-ए की गरिमा के लिए अच्छी साबित नहीं होती दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी और यह भी बताया जाता जाता है की गृह राज्य मंत्री को जांच हेतु जो फाइल सोंपी गई है, उनमे कुछेक इकाइयों के नाम भी शामिल है, और इसे भी एक कारण बताया जाता है। अब इस पूरे मामले में सवाल यह उठते है की संध प्रदेश के डी-आई-ए का भला इसमे क्या दोष, यदि आरोप इकाइयों पर है तो उनका खामियाजा पूरा डी-आई-ए क्यों भरे, लेकिन इस पूरे मामले से यह तो साफ हो गया की प्रशासन को अब साफ छवि के प्रतिनिधियों के साथ ही काम करने में रुचि है, वैसे भी जाहीर सी बात है की पूर्व में कई बार डी-आई-ए के कुछेक दागी सदस्यों से प्रशासन की सफ़ेद कमीज पर दाग लगे थे शायद प्रशासन उस वाक्या को दोहराने से पहरेज कर रही है।

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क्या कारण पांच सदस्यों वाली सलाहकार समिति है?
हालांकि डी-आई-ए को नजरंदाज करने का एक और कारण भी बताया जा रहा है, बताया जाता है की पूर्व में प्रशासक कुन्द्रा ने एक पांच सदस्यों वाली उधोगिक सलाहकार समिति का गठन किया था, तथा इसके चलते अब अधिकतम फैसले प्रशासक उसी पांच सदस्यों वाली सलाहकार समिति के साथ करेंगे, हालांकि उक्त समिति के सदस्यों के नाम से फिलवक्त क्रांति भास्कर अंजान है लेकिन एक सदस्य का नाम जरूर सामे आया है, बताया जाता है इस सलाहकार समिति में भी वेलनोन पॉलिएस्टर लिमिटेट के मालिक श्री गुप्ता जी है, अन्य चार सदस्यों के नाम के लिए आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन जल्द क्रांति भास्कर उक्त समिति के अन्य सदस्यों के नाम आप के सामने रखेगी। शेष फिर।