दानह विधुत निगम का नया टेरिफ प्लान, बडे उद्योगों के स्थान पर अब छोटे उद्योगों को मिलेगा लाभ।

दानह विधुत निगम का नया टेरिफ प्लान, बडे उद्योगों के स्थान पर अब छोटे उद्योगों को मिलेगा लाभ। | Kranti Bhaskar
DNH Power Distribution Corporation ( Silvassa )

दानह विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को घाटे से उबारने के लिए एवं ओपन एक्सेस के कारण हो रहे घाटे को रोकने के लिए बडे उद्योगों पर बढाया फिक्स चार्ज तथा छोटे उद्योगों को पीपीसीए के तहत तय सीमा तक ही देना होगा सरचार्ज, इससे छोटे उधोगों को मिलेगा बड़ा फाइदा।

जेईआरसी द्वारा दानह विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के टैरिफ ऑर्डर को मंजूरी दी है जिसके तहत घरेलू, कॉमर्शियल, कृषि, छोटे उद्योग के लिए बिजली कीदर पिछले वर्ष की तरह ही कायम रखे हैं।

लेकिन बडी इंडस्ट्रीज के फिक्स चार्ज में जबजस्त बढोत्तरी करते हुए बडी इंडस्ट्रीज को ओपन एक्सेस में जाने से रोकने की कवायद इस टैरिफ प्लान में नजर आ रही है। हालांकि बडे उद्योगों की बिजली दरो में 10 से 15 पैसे की राहत दी गई है लेकिन पहले जो 11 केवी के लिए फिक्स चार्ज 275 रुपये था उसे 300 कर दिया गया है। हालांकि एनर्जी चार्जिस में 3.40 रुपये के स्थान पर 3.25 रुपये प्रति यूनिट किया गया है। 220 के लिए फिक्स चार्ज 275 के स्थान पर 450 रुपये प्रति केवीए कर दिया गया है। हालांकि उन्हें एनर्जी चार्जिस में 25 पैसे की छूट भी दी गई है। 66 केवीए 275 रुपये प्रति केवी था उसे 400 रुपये प्रति केवीए, 66 केवीए से ऊपर भी इसी प्रकार की बढोत्तरी है।

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इस श्रेणी में भी 3.40 रुपये से घटाकर 3.10 करने की मंजूरी दी गई है। इसी तरह सरचार्ज वसूलने में जो सीमा अधिक थी उसे श्रेणीबद्ध तरीके से फिक्स कर दिया गया है। 47 पैसे से लेकर महत्तम 66 पैसा तक सरचार्ज के रुप में वसूला जायेगा जो पहले सभी के लिए प्रति यूनिट 1 रुपया था। कुल मिलाकर देखा जाये तो दादरा नगर हवेली में रिलायंस, आलोक जैसी बडी इंडस्ट्रीज दादरा नगर हवेली विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के पास से नहीं बल्कि ओपन एक्सेस से बिजली सप्लाई लेती थी जिसके चलते दादरा नगर हवेली प्रशासन द्वारा 2011-12 में किये गये समझौते के तहत सप्लाई होने वाली बिजली बिना उपयोग के पडी रहती थी और उसका चार्ज दादरा नगर हवेली विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को चुकाना पडता था, जो करोडो में था।

लेकिन प्रशासक प्रफुल पटेल ने दिसंबर 2016 के आखिरी सप्ताह में पदभार संभालने के बाद दादरा नगर हवेली विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का लेखा जोखा जांचा तो पता चला कि हर वर्ष करोडो रुपया विद्युत वितरण निगम बिना बिजली के खर्च किये चुका रहा है।

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प्रशासक प्रफुल पटेल ने थोडा और निगम का पोस्टमार्टम किया तो पता चला कि दादरा नगर हवेली की बडी-बडी इंडस्ट्रीज ने 2011-12 में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर महंगी बिजली खरीदने पर मजबूर किया था।

लेकिन एकाद साल के बाद ओपन एक्सेस से बिजली खरीदने की सुविधा प्राप्त हुई, कि तुरंत ही बडे-बडे उद्योगों ने दादरा नगर हवेली विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को ठेंगा दिखाकर ओपन एक्सेस से बिजली लेना शुरु किया।

अचानक बडे उद्योगों द्वारा बिजली लेना बंद करने से दादरा नगर हवेली विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को करोडो रुपये का घाटा होने लगा क्योंकि कोंट्राक्ट के मुताबिक उन्हें फिक्स चार्ज का तो पैसा चुकाना ही था। कुल मिलाकर देखा जाये तो अब नये टैरिफ प्लान के बाद अगर कोई भी दानह की बडी इंडस्ट्रीज ओपन एक्सेस से भी पावर लेती है तो निगम को ज्यादा नुकसान नहीं होगा क्योंकि फिक्स चार्ज 275 से बढाकर श्रेणीबद्ध तरीके से 300 से लेकर 450 रुपये प्रति केवीए बढा दिया गया है। उदाहरण स्वरुप कोई एक इंडस्ट्रीज 80 मेगावॉट बिजली ओपन एक्सेस भी लेती है तो 80 हजार केवीए होता है। यानि कि उस इंडस्ट्रीज को 3 करोड 60 लाख रुपये तो निगम को फिक्स चार्ज के रुप में चुकाना ही है।

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इसके अलावा प्रति यूनिट जो ओपन एक्सेस का चार्ज अलग से लगेगा। यानि कि अब बडे उद्योगों के लिए निगम से ही बिजली खरीदना मुनासिब होगा। प्रशासन का यह दाव सफल होता है तो 31 मार्च 2018 तक दादरा नगर हवेली विद्युत वितरण निगम लिमिटेड घाटे से काफी हद तक उबर जायेगा। दादरा नगर हवेली विद्युत वितरण निगम लिमिटेड विभागीय व्यवस्था में और सुधार करें तो 2018-19 में निगम को पीपीसीए चार्ज (सरचार्ज) लगाने की भी नौबत नहीं आयेगी। गौरतलब है कि दादरा नगर हवेली विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के गठन के बाद अधिकारियों ने उसकी व्यवस्था एवं उसके भविष्य के बारे में ठीक से रोड मेप तैयार नहीं किया था। जिसके चलते लगातार पिछले 3 सालों से दादरा नगर हवेली विद्युत वितरण निगम लिमिटेड करोडों रुपये के घाटे में फंसता ही जा रहा है। लेकिन अब प्रशासक प्रफुल पटेल ने घाटे की मूल वजह पर ध्यान केन्द्रित करते हुए जेईआरसी से ऐसा टैरिफ प्लान मंजूर करवा लिया है जिसके चलते आने वाले वर्षों में निगम की आर्थिक स्थिति काफी हद तक सुधर जायेगी।