दोनों प्रदेशों के ऊर्जा विभागो में भारी घोटाले की शंका, आरटीआई के तहत जानकारी देने से इनकार

daman and diu electricity department
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दमण-दीव और दादरा नगर हवेली, इन दोनों संध प्रदेशों के ऊर्जा विभागो एवं विभागीय अधिकारियों के भ्रष्टाचार की कहानी काफी अजीबो-गरीब है उक्त दोनों विभागो एवं विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई बार सवाल खड़े होते रहे है। संध प्रदेश दादरा नगर हवेली के ऊर्जा विभाग एवं विभागीय अधिकारियों की गड़बड़ियों को लेकर पूर्व में एक सीबीआई जांच भी हुई थी, लेकिन दमण-दीव ऊर्जा विभाग एवं विभागीय अधिकारी सीबीआई जांच से बचे रहे, अब क्यो बचे रहे, किसकी मदद से बचे रहे? इन सवालो का जवाब तो स्वय प्रशासन ही दे तो बेहतर होगा। वैसे चौकाने वाली बात यह है कि दमण-दीव ऊर्जा विभाग एवं विभागीय अधिकारियों की खराब कार्यप्रणाली, भ्रष्ट तथा कमाउनीति के चलते कई बार सीबीआई जांच की मांग हो चुकी है, लेकिन जांच नहीं हुई।

तत्कालीन प्रशासक नरेन्द्र कुमार के समय से, सीबीआई जांच की मांग होती रही।
दमण-दीव ऊर्जा विभाग के अधिकारी मिलिंद इंगले की खराब कार्यप्रणाली ओर विभाग में हुए जबरदस्त घाटे के बाद, तत्कालीन प्रशासक नरेन्द्र कुमार के समय में पहली बार जनता द्वारा सीबीआई जांच की मांग की गई, उसके बाद प्रशासक भल्ला ने प्रभार संभाला, प्रशासक भल्ला के बाद प्रशासक कुन्द्रा ने प्रभार संभाला तब भी कई बार जांच की मांग हुई, लेकिन जांच नहीं हुई। प्रशासक पद पर प्रफुल पटेल की नियुक्ति के बाद जनता को ऐसा लगा कि पूर्व में हुई गड़बड़ियों ओर घोटालो से पर्दा उठेगा, लेकिन किसे पता था कि अभियंता इंगले, बिल बकाया ओर बिल वसूली में उलझकर या उलझाकर संध प्रदेश दादरा नगर हवेली ऊर्जा विभाग का प्रभार भी प्राप्त कर लेंगे।

जारी आदेश देखकर जनता ने दाँतो तले उंगलिया दबा ली
जब दमण-दीव ऊर्जा विभाग के कार्यपालक अभियंता को दादरा नगर हवेली ऊर्जा विभाग का प्रभार देने का आदेश जारी हुआ तो उक्त आदेश को देखकर दोनों प्रदेश की जनता हक्की-बक्की रह गई, दाँतो तले उंगलिया दबा ली और अपने आप से सवाल करने लगी यह नामुमकिन कैसे मुमकिन हुआ? उस वक्त यह सवाल तो उठा, लेकिन उस वक्त से लेकर चुनाव तक, एक के बाद एक ऐसे भारी भरकम मामले सामने आते रहे जिसके नीचे यह अहम सवाल दब गया।

क्या अभी जारी है विधुत चोरी? क्या अभी भी विधुत चोरी करने के लिए, मीटर जलाए जाते है? क्या अभी भी विधुत बिल की गलत रीडिंग के आधार पर बिल बनाते है? कौन करेगा जांच, कैसे सामने आएगा सच?

आज नहीं तो कल पता चल ही जाएगा।
खेर इस वक्त उक्त पूरा मामला फिर से जमीन फाड़, बाहर आता नज़र आ रहा है। पूर्व में जिस तरह विभागीय अधिकारियों की खराब कार्यप्रणाली को, उक्त विभाग के अधिकारियों कि चुगलखोर नीति ने उजागर किया था, उसी तरह इस वक्त भी विभागीय अधिकारी, जनता के सामने इसी विभाग की खराब कार्यप्रणाली का भांडा फोड़ते देखे गए। विभागीय अधिकारियों द्वारा की जा रही चुगलखोरी ने एक बार फिर उक्त दोनों प्रदेशों के ऊर्जा विभाग एवं विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है। जनता अब सवाल कर रही है कि प्रशासक प्रफुल पटेल ने कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले में ऐसी क्या ख़ूबी देखी कि दमण-दीव ऊर्जा विभाग के अभियंता मिलिंद इंगले को, दानह ऊर्जा विभाग का प्रभार भी दे दिया? क्या दमण-दीव ऊर्जा विभाग, दादरा नगर हवेली ऊर्जा विभाग से अधिक मुनाफा कर रहा था या फिर अधिक घाटा कर रहा था? इन दोनों वजहों में से कोई एक वजह तो अवश्य होगी ओर आज नहीं तो कल उस वजह का पता भी चल ही जाएगा।

सवाल यह भी है कि दमण-दीव ओर दादरा नगर हवेली ऊर्जा विभाग के कार्यपालक अभियंता के पद हेतु, प्रशासन के पास कुल कितने योग्य अधिकारी है? क्या मिलिंद इंगले के अलावे प्रशासन के पास कोई अन्य योग्य अधिकारी नहीं है जो दोनों संध प्रदेशों के ऊर्जा विभाग को संभाल सके? इस सवाल का जवाब जब मिलेगा तब मिलेगा, लेकिन उससे पहले एक ओर सवाल भी फन उठाए हुए है वह सवाल यह है कि दोनों संध प्रदेशों के ऊर्जा विभाग के कार्यपालक अभियंता का प्रभार एक ही अधिकारी को क्यो? यदि दमण-दीव ओर दादरा नगर हवेली ऊर्जा विभाग का प्रभार एक अधिकारी को दिया जा सकता है तो दमण लोक निर्माण विभाग में तीन कार्यपालक अभियंता के पद है, पहला लोक निर्माण, दूसरा जिला पंचायत का लोक निर्माण, तीसरा नगर निगम का लोक निर्माण ओर दादरा नगर हवेली लोक निर्माण विभाग में कुल चार कार्यपालक अभियंता के पद है, लोक निर्माण विभाग का भवन खंड, रोड खंड, जिला पंचायत खंड और पालिका खंड, ऐसे में दमण ओर दादरा नगर हवेली में कुल सात कार्यपालक अभियंता की जगह किसी एक ही अभियंता को सभी विभागो के प्रभार क्यो नहीं दे दिया जाता? केवल मिलिंद इंगले में ही ऐसी क्या खूबी है की उन्हे ही दोनों प्रदेशों के कार्यपालक अभियंता का प्रभार दिया गया? क्या इन सवालो का जवाब कभी जनता को मिलेगा या जनता को इन सवालो का जवाब हासिल करने के लिए सूचना के अधिकार का सहारा लेना पड़ेगा?

वैसे आप सोच रहे होंगे की अगर दमण-दीव ऊर्जा विभाग के कार्यपालक अभियंता को दादरा नगर हवेली ऊर्जा विभाग के कार्यपालक अभियंता का प्रभार भी दे दिया गया, तो इसमे कोनसी बड़ी बात है ओर कोनसी चिंता का विषय है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको पहले यह जानना होगा की मिलिंद रामभाऊ इंगले कौन है? मिलिंद रामभाऊ इंगले वह नाम है जिसकी शिकायतों का पुलिंदा, प्रशासक कार्यालय, गृह मंत्रालय, सिविसी और सीबीआई कार्यालय के साथ साथ ना जाने अन्य कितनी जांच एजेंसियों में सालो से जांच के लिए लंबित है केवल इतना ही नहीं दोनों संध प्रदेशों में मिलिंद इंगले एकलोते ऐसे अभियंता है जिनकी कार्यप्रणाली को लेकर सीबीआई जांच के लिए आंदोलन हुए, जनता सडको पर आई ओर कई स्थानीय नेताओं ओर सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सांसद लालू पटेल भी जनता की भीड़ का हिस्सा बने, लेकिन इंगले ने सांसद लालू पटेल को भी आम जनता साबित कर दिया। इस सबके बाद भी मिलिंद इंगले पर कोई आंच नहीं आई, शिकायतों का पुलिंदा तो छोड़ो, जनप्रतिनिधियों के आंदोलन का सेलाब भी इंगले अंजुली में भरकर पी गए ओर जनप्रतिनिधि देखते रह गए। अब ऐसे अधिकारी को दोनों संध प्रदेशों के ऊर्जा विभाग का प्रभार देना कहाँ तक सही है?

अधिकारियों को प्रसाद दिए बिना, ऊर्जा खपत बढ़ानी या घटानी मुश्किल।
दोनों संध प्रदेशों में बे-शुमार औधोगिक इकाइयों स्थापित है ओर दोनों संध प्रदेशों के उधोगपतियों को अपनी अपनी इकाई की ऊर्जा खपत बढ़ाने ओर घटाने के लिए ऊर्जा विभागो के चक्कर लगाने पड़ते है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली ओर भूमिका शंकास्पद हो तो उसका असर औधोगिक इकाइयों पर पड़ना लाज़मी है, यदि औधोगिक इकाइयों पर इसका असर पड़ा तो उसका सीधा असर प्रदेश की जनता के रोजगार पर भी पड़ेगा, इसमे कोई दो राय नहीं। वही ऐसे अधिकारी यदि इकाइयों से किसी प्रकार की रिश्वत मांगे तो उधोगपति भी शिकायत करने से परहेज करेंगे, ऐसा इस लिए क्यो की पूर्व में उधोगपति, जनता और जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए जन आंदोलन देख चुके है परिणाम कुछ नहीं निकला, ऐसे में उनकी शिकायत का परिणाम भी नहीं निकलेगा यही सोचकर उधोगपति भी शिकायत करने से परहेज करेंगे जो प्रदेश की जनता के हित में नहीं है।

सूत्रों की माने तो दमण-दीव ऊर्जा विभाग ओर विभागीय अधिकारी आज भी अपनी भ्रष्ट कार्यप्रणाली के जरिये अपनी ऐशगाह आबाद करने का काम कर रहे है, उन्हे ना प्रशासक प्रफुल पटेल का खोफ़ है ना देश की अब तक की सबसे अधिक ईमानदार सरकार होने का दावा करने वाली मोदी सरकार का। सूत्रो का कहना है कि दमण-दीव ओर दादरा नगर हवेली ऊर्जा विभाग के अधिकारी टेण्डर प्रक्रिया में भारी अनियमितता ओर भ्रष्टाचार कर अपने अपने हिस्से की चांदी काट रहे है, टेण्डर कैसा भी हो ओर किसी भी रकम का हो, टेण्डर किसी भी ठेकदार या एजेंसी को मिले, विभागीय अधिकारियों को प्रसाद दिए बिना किसी काम का, बिल पास नहीं किया जाता, इतना ही नहीं छोटे छोटे टेण्डर में तो अधिकारी ऐसे बड़े बड़े घोटालो को अंजाम दे देते है जिसकी परिकल्पना भी शायद किसी ने ना की हो, एक ही ठेकेदार से तीन तीन कोटेशन मंगवाकर, दोनों प्रदेशों के ऊर्जा विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार कर अपनी अपनी तिजोरियाँ भर रहे है ओर इसकी जानकारी से या तो ऊर्जा सचिव अनभिज्ञ है या फिर ऊर्जा सचिव भी शामिल है? अब यदि इस मामले में ऊर्जा सचिव दूध का दूध ओर पानी का पानी करना चाहते है तो उन्हे दमण-दीव ओर दादरा नगर हवेली, इन दोनों संध प्रदेशों के ऊर्जा विभाग द्वारा निकाले गए सभी टेण्डर तथा बोली दाताओं की जांच सीबीआई की इकोनोमिक विंग से करवानी चाहिए।

आरटीआई एक्ट की अवमानना में भी उक्त अभियंता अव्वल।
आरटीआई के तहत उक्त विभाग में, कुल कितने आवेदन किए गए, कितने आवेदनों के तहत आवेदनकर्ताओं को जानकारी दी गई, कितने आवेदनकर्ताओं को जानकारी नहीं दी गई ओर जानकारी क्यो नहीं दी गई, क्या इसकी जानकारी विधुत सचिव ओर प्रशासक को है?

दोनों प्रदेशों के ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के पास प्रदेश में कितनी संपत्ति है? प्रदेश के बाहर कितनी संपत्ति है? कितनी बेनामी संपत्ति है? कितने फ्लेट है? कितनी दुकाने है?
कोनसा अधिकारी कितनी औधोगिक इकाइयों का मालिक है? कोनसा अधिकारी, सरकारी विभाग में बैठकर अपनी एवं अपने रिशरेदारों के नाम पर चल रही इकाइयों का संचालन करता है? इन सवालो का जवाब तो सिर्फ सीबीआई जांच से ही मुमकिन है।

दिनांक 04-03-2011 को सांसद लालू पटेल द्वारा, प्रशासक को, ऊर्जा विभाग के ( 120 करोड़ ) संबंध में एक पत्र लिखा था, दिनांक 30-03-2011 को ऊर्जा विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव पुंजा बामणिया द्वारा सांसद लालू पटेल को उक्त पत्र का जवाब दे दिया गया, उस जवाब के बाद सांसद लालू पटेल ने क्या किया?

हफ्तखोर नेता ओर भ्रष्ट अधिकारी, अफवाहों के साहरे भी उठाते रहे लाभ।

एक तरफ चर्चा यह भी है कि प्रशासक प्रफुल पटेल की वजह से, अब दोनों प्रदेशों के ऊर्जा विभागो में बरती गई अनियमितता ओर विभागीय अधिकारियों के भ्रष्टाचार की शिकायते नहीं करता, क्यो कि शिकायतकर्ताओं को डर है की प्रशासक प्रफुल पटेल के नेतृत्व काम करने वाले अधिकारियों के भ्रष्टाचार ओर कमाउनीति कि पोल खोली गई तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा, लेकिन यह चर्चा एक अफवाह से अधिक कुछ नहीं लगती।

ऐसा इस लिए क्यो कि जब से संध प्रदेश में बतौर प्रशासक प्रफुल पटेल आए है तब से ही वे भ्रष्ट अधिकारियों और चौर नेताओं के आँख की किरकिरी बने हुए है। वे पहले ही दिन से अपने काम में लग गए थे ओर उन्होने पहले ही दिन से कड़े अनुशासन को बरकरार रखा और दमण-दीव तथा दादरा नगर हवेली में विकास की झड़ी लगा दी।

अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान उन्होने दबंग लोगो के अतिक्रमण हटाने, औधोगिक इकाइयों से हफ्ताखोरी बंद करने, नेताओं के आपराधिक मामलो को उजागर करने ओर उनपर सख्त कार्यवाही करने का उल्लेखनीय काम किया।

उनके सख्त अनुसासन और कठोर कार्यवाही से भ्रष्ट अधिकारियों और हफ्ताखोर नेताओं में दहसत फैल गई ओर बहोत हद तक औधोगिक इकाइयों में हफ्ताखोरी गुंडागर्दी पर अंकुश लग गया, सरकारी विभागों में भी भ्रष्टाचार कम होने लगा। अब ऐसे में प्रशासक के तबादले की अफवाह हफ्ताखोर नेताओं ओर भ्रष्ट अधिकारियों के लिए संजीवनी साबित हुई, प्रशासक प्रफुल पटेल को अब तक तो अपने तबादले की अफवाह के बारे में पता होगा लेकिन उक्त अफवाहों के सहारे हफ्ताखोर नेता ओर भ्रष्ट अधिकारियों ने कितना ओर कैसे लाभ उठाया यह जानकारी शायद प्रशासक प्रफुल पटेल को नहीं।

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