विधुत विभाग के अभियंताओं की आमदनी प्रशासक की पगार से भी अधिक.

संध प्रदेश दमन में अनियमितताओं की खुली छूट की कीमत केवल चंद नोटों के बंडल, अगर नोटों के बंडल दिखाई दिए तो हर मनमानी करने का लाइसेंस यहां मिल सकता है, यह हम नहीं कहते यहां के हालत बयान करते है। दमन में भ्रष्टाचार को ख़त्म करने वाले तो कई आए और कई अपनी अपनी झोली भर लौट गए, लेकिन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में लगभग सभी नाकाम साबित हुए, जिसका कारण चाटुकारिता और भ्रष्टाचार में सहभागिता बताई जाती है।


क्या एक ईमानदार अधिकारी होने के नाते दमन-दीव के विधुत सचिव श्री संदीप कुमार इस मामले में जांच के आदेश देंगे या वह भी भ्रष्टाचार व अनियमितताओं की इस दुकान का साथ देंगे?


पूर्व में दमन की एक इकाई ने यह खुलासा किया था कि, वह प्रतिमाह विधुत विभाग के दो अभियंताओं को पच्चास -पच्चास हजार रुपये की रिश्वर देती थी, उन दोनों अभियंताओं के नाम का खुलासा भी उक्त इकाई ने किया, जिनमे विधुत विभाग के सहायक अभियंता राजू एवं कनिय अभियंता जोशफ है। उक्त मामले में क्रांति भास्कर अपनी खबर और उक्त खुलासे की टेप दोनों पेश कर चुकी है। लेकिन बड़ी हैरत की बात है कि विधुत विभाग द्वारा एवं सतर्कता विभाग द्वारा इस मामले में संज्ञान देखने को नहीं मिला। हालांकि इस मामले में जिन दो अभियंताओं के नाम का खुलासा उक्त इकाई ने किया, उनमे से एक अभियंता जोशफ की एक मृत्यु हो चुकी है,लेकिन सहायक अभियंता अभी भी विभाग पर कुंडली मारे बैठे अपनी ऐशगाह आबाद किए है। खुलासा केवल दो अभियंताओं तक नहीं रुका,इकाई ने यह भी स्वीकार किया की वह विधुत विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले तक को धूस देती रही,तथा कई अभियंता एवं अधिकारी यहां की काली कमाई के हिस्सेदार है।

  • वैसे तो दमन के इस विभाग की जांच को लेकर कई बार मांग उठी, लेकिन जांच से यह विभाग बचती रही, अब शायद सीबीआई इस इकाई के आकाओं से पूछे इनकी बढ़ती विरासत का राज क्या है, ओपन एक्सेस या और कुछ?
  • दमन के अधिकारियों को धूस देने वाली इकाई का खुलासा, पच्चास-पच्चास हजार प्रतिमाह तो सामान्य अभियंताओं को दिया जाता है,वरीय अधिकारी कितनी धूस लेते होंगे इसका आंकलन संभव नहीं! 
  • इस इकाई से क्रांति भास्कर ने पूछा क्या आप लाईट चोरी करने के लिए पच्चास-पच्चास हजार रुपये महीने का देते हो, तो इस इकाई ने कहां नहीं हम लाईट चोरी नहीं करते, लाईट तो दूसरी इकाइयां चोरी करती है, वैसे भी भला कोन चोर यह कहता है कि हम चोरी करते है, जब जांच होगी तब पता चलेगा की चोर कोन है चोकीदार कोन है?
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अब सवाल यह उठते है कि आखिर उक्त इकाई प्रतिमाह पच्चास-पच्चास हजार अभियंताओं को क्यों देती रही,भला जिस दौर में कोई पच्चास रुपये बिना मतलब नहीं देता उस दौर प्रतिमाह पच्चास- पच्चास हजार देकर इस इकाई को कितना फाइदा हुआ होगा,इन पच्चास-पच्चास हजार रुपये के बदले उक्त इकाई उन दोनों अभियंताओं से कोनसा काला काम करवाती रही,तथा और कोन-कोन से अधिकारी है जिनको इस इकाई द्वारा प्रतिमाह धूस दिया जाता रहा,आखिर इस मामले में किन किन अधिकारियों के हाथ काले हुए है,और इस मामले में दमन प्रशासन एवं दमन विधुत सचिव द्वारा संज्ञान क्यों नहीं लिया गया,एसे कई सवाल है जो किसी जांच की तलाश में अपने अस्तित्व को खोज रहे है।

संध प्रदेश दमन के विधुत विभाग एवं विभागीय अभियंताओं के बारे में समय समय पर कई खुलासे सामने आते रहे है, दमन में विधुत घोटालों को लेकर कई बाते सामने आती रही है, जिनके तार दमन वेलनोन पोलिस्टर लिमिटेड के खुलासे से जुड़े है। वेलनोन पोलिएस्टर की अनियमितता केवल विधुत विभाग तक ही सीमित नहीं रही, उक्त इकाई ने गुजरात राज्य और संघ प्रदेश के कई नियमों की धज्जिया उड़ाई, गुजरात से अवैध गैस लाइन लेकर दमन की इकाइयों में यह इकाई गैस की सप्लाई कर रही थी, जिसका खुलासा भी क्रांति भास्कर ने किया, लेकिन दमन प्रशासन इसकी अनियमोत्ताओं का तमाशा देखती रही, जब संज्ञान की बात आई तो गुजरात प्रशाससन व एक्साइज़ विभाग ने उक्त मामले में संज्ञान लेकर उक्त अवैध गैस लाइन को बंद करवा दिया, शायद इसी संज्ञान और कर्मशीलता की वजह से गुजरात के मुख्य मंत्री को प्रधान मंत्री बनने में मदद मिली।

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संध प्रदेश दमन में विधुत घोटाले, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए सीबीआई को चाहिए की दमन में स्थित वेलनोन पोलिएस्टर के काले-कारनामों की जांच करे, तो शायद दमन के कई अधिकारी उक्त इकाई के मालिक के साथ सलाखों के पीछे नजर आएंगे।

उक्त इकाई ने आनन फानन में यह तो कह दिया कि पच्चास-पच्चास अभियंताओं को धूस देते है, लेकिन यह भूल गई की इस देश में धूस देना भी एक अपराध है, और उक्त इकाई भी इस खुलासे के बाद अपराधियों की श्रेणी में आती दिखाई दे रही है, साथ ही साथ इस इकाई ने अधिकारियों को जो धूस देने की बात कहीं तो वह काली कमाई का हिस्सा है, जिससे साफ जाहिर होता है की उक्त इकाई ब्लेक-मनी का लेन-देन कर रही है, और एसे कितने विभाग एवं अधिकारी होंगे जिन्हे यह इकाई धूस देती है इसका खुलासा तो जांच के बाद ही मुमकिन है, लेकिन एक बात इसमे बिल्कुल ठीक बैठती है और वह है घर का भेदी लंका ढाए, भाई अब भेदी तो सबके सामने है इंतजार है भ्रष्टाचार की लंका ढहने का। शेष फिर।

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