- आखिर नेता होने के यही तो फायदे है, नहीं कोई कतार, नहीं अपोइंटमेंट बस एक आवाज दी और काम हो गया।
- जनता लाइन में खड़ी रही और मामलतदार सड़क के किनारे कोशील शाह की फाइल में हस्ताक्षर कर के चली गई।
शनिवार को दानह मामलतदार कार्यालय में लोक-अदालत का कार्य चल रहा था, उक्त कार्यालय में दानह मामलतदार, खानवेल मामलतदार समेत आर-डी-सी की उपस्थिती बताई जाती है, लेकिन लंच के बाद उक्त कार्यालय से दानह मामलतदार रांधा के लिए चली गई। आदिवासियों की लंबी लाइन लगी रही, मामलों के निपटारे हेतु, कितने मामलों में क्या निर्णय आया यह तो हमे पता नहीं, लेकिन कुछ ही समय में वहां दानह के भाजपा महा सचिव कोशील शाह का प्रवेश हुआ, तथा थोड़ी देर में दानह मामलतदार की गाड़ी भी सड़क किनारे रुकी, इतने में कोशील शाह की नजर मामलतदार पर पड़ी, कोशील शाह किसी फाइल में दस्तखत करने की बात कर रहे थे, तो मामलतदार ने भी उनकी बात को स्वीकार करते हुए, सड़क के किनारे ही गाड़ी के बोनट को मामलतदार कार्यालय बना दिया, वहीं दस्तखत कर दिए, भई-वाह जनता देखती रही के यह क्या हो रहा है, मामलतदार से लोक-अदालत में सुनवाई हेतु हम घंटों से खड़े है, और मामलतदार सड़क के किनारे कोशील शाह की किस फाइल पर दस्तखत कर रही है, फिर जनता भी समझ गई आखिर यह तो नेता है, भालेही इन्हे नेता हमने बनाया लेकिन, लेकिन नेता होने का फायदा तो इन्हे ही मिलेगा।
दानह प्रशासन में यह कैसा भद-भाव क्या कानून नियम भला किसी व्यक्ति को देख-कर बदल सकते है ? घंटों से लाइन में खड़े आम आदमी खड़े के खड़े ही रह गए, और मामलतदार पुनः रवाना हो गए, भई वाह।