यहां तो शायद प्रधान मंत्री नेरेन्द्र मोदी को भी सूचना नहीं मिलेगी!

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संध प्रदेश दमन-दीव में अगर सूचना के अधिकार की बात करे तो कई विभागों में इस कानून का मज़ाक बना हुआ है, लेकिन सबसे प्रमुख मामला यह है की सुनचा के अधिकार का कानून लागू तो हो गया लेकिन कुछ विभागों में अभी तक इस कानून को अमल में नहीं लाया गया, जिसमे से एक दमन का विधुत विभाग है, दमन विधुत विभाग में सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त आवेदनों की संख्या तथा जनता को दी गई जानकारी की संख्या का आंकलन किया जाए तो पता चलेगा की यह विभाग कितने पानी में है।

यहां तो प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी भी अगर सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करेंगे तो शायद उनके आवेदन पर भी, विधुत विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले जानकारी मुहेया करवाने में परहेज करेंगे। दमन का यह एक एकेला ऐसा विभाग बताया जाता है जिसे इस कदर मनमानी करने की छूट मिली हो, लेकिन छूट देने वाले शायद यह भूल गए की विभाग और विभाग के दस्तावेज़ किसी अधिकारी की निजी संपत्ति नहीं होती, आम जनता से जानकारी छुपाने का काम कर रही यह विभाग और इस विभाग के अभियन्ताओं पर कारवाई प्रशासक कब करेंगे यह तो समय बताएगा लेकिन इन दिनों इस विभाग द्वारा सूचना के अधिकार को मज़ाक बनाने की चर्चाओं ने दमन की जनता को यह सोचने पर मजबूर कर दिया की क्या यहां कभी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मिलेगी, और क्या यह विभाग प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के आवेदन पर भी इसी प्रकार जानकारी मुहेय्य करवाने से कतराएगी?

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यहां तो प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी भी सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करे तो उन्हे भी यहां से सूचना नहीं मिलेगी!

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विधुत सचिव कब तक इस अधिकारी के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालते रहेंगे, क्या प्रशासक को पता है इस विभाग से कितनी काली कमाई प्रतिमाह होती है और उस काली कमाई का हिस्सा कहां कहां जाता है, नहीं पता है तो जल्द क्रांति भास्कर बताएगा, की दमन विधुत विभाग के भ्रष्टाचार में कोन कोन अधिकारी और नेता है शामिल, और क्या प्रशासक को भी मिलता है इस विभाग के भ्रष्टाचार का हिस्सा, खुलासा जल्द?