दानह आबकारी निरीक्षक मिहिर भी घोटाले में माहिर, सरकारी जमीन को पार्किंग बताकर बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी करने की चर्चा जोरों पर।

दानह आबकारी निरीक्षक मिहिर भी घोटाले में माहिर, सरकारी जमीन को पार्किंग बताकर बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी करने की चर्चा जोरों पर। | Kranti Bhaskar
excise inspector silvassa bar and restaurants license

दादरा नगर हवेली में प्रशासक प्रफुल पटेल के नेतृत्व में काम करने वाले अधिकारी भी यदि इसी प्रकार नियमो को धतता बताते रहेंगे तो फिर वह दिन दूर नहीं जब हो रहे भ्रष्टाचार के छींटे प्रशासन के आला अधिकारियों की सफ़ेद कमीज़ को भी दागदार कर दे!

संध प्रदेश दादरा नगर हवेली में नरोली सिलवासा रोड़ पर, होटल 7 के पास, पतंग होटल के नाम से नियम वीरुध जाकर एवं नियमो को धतता बताकर, आबकारी विभा के अधिकारियों द्वारा पतंग होटल के नाम से बार एंड रेस्टोरेन्ट की स्वीकृति देने एक अजीनों-गरीब मामला सामने आया है।

इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि, पतंग होटल के पास 8 गुंठा जगह तो है लेकिन वाहन पार्किंग की जगह नहीं है, बताया यह भी जाता है कि बार एंड रेस्टोरेन्ट के लिए लगभग 20 वाहनो की पार्किंग होनी चाहिए जो कि पतंग होटल के पास नहीं है। इस पूरे मामले में एक चर्चा यह भी है की सरकारी जगह को 20 वाहनो की पार्किंग बताकर, पतंग होटल को बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स दे दिया गया है अथवा देने वाले है।

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वैसे लाइसेन्स दे दिया गया है या देने वाले है जब इस मामले की सत्यता जानने के लिए जब क्रांति भास्कर द्वारा आबकारी निरीक्षक मिहिर से यह पूछा गया कि क्या सरकारी जमीन को पार्किंग बताकर, पतंग होटल को बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी कर दिया गया है या जारी करने वाले है? तो उक्त निरीक्षक ने, ना ही हा मे जवाब दिया ना ही ना मे, बोखलाहट में उल्टा मीडिया से यह सवाल कर बैठे की आपको इससे क्या लेना देना, आबकारी अधिकारी की बोखलाहट और क्रांति भास्कर के सवालो से किनारा, इस बात की और साफ इशारा करती है की जो चर्चा बाजार में चल रही है वह सही है।

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एक तरफ़ चर्चा यह भी है….

पतंग होटल के इस मामले को देखते हुए यह चर्चा भी चल रही है की यदि इसी प्रकार पतंग होटल की तर्ज पर, आबकारी विभाग के अधिकारी, सरकारी जमीन को प्राइवेट पार्किंग दिखाकर बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स देने के लिए तैयार है तो दानह में सेकड़ों लोग ऐसे लाइसेन्स के लिए लाखो रुपये लिए कतार में खड़े है!

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तो क्या पतंग होटल के लाइसेन्स के लिए भी अधिकारियों एवं होटल मालिको के बीच कोई बड़ी डील एवं भ्रष्टाचार हुआ है? क्या इस लाइसेन्स के लिए भी लाखो रुपये लिए गए है? क्या अन्य होटलरों को भी प्रशासन इसी तर्ज पर लाइसेन्स जारी करने वाली है? सवाल कई है लेकिन जवाब तो जांच के बाद ही मिल सकता है। समय रहते इस मामले में आबकारी आयुक्त सवय जांच करवाए तो बेहतर होगा अन्यथा भ्रष्टाचार मुक्त भारत और भ्रष्टाचार मुक्त दानह जनता एवं प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र्भाई मोदी के लिए एक सपना ही रह जाएगा। शेष फ़िर।