ओ-आई-डी-सी का बढ़ा घोटाला, जे-बी सिंह पर शक की सुई !

ओ-आई-डी-सी का बढ़ा घोटाला, जे-बी सिंह पर शक की सुई ! | Kranti Bhaskar
fateh singh chauhan silvassa

दानह के पीपरिया में लगभग 7 हजार फिट का एक गोदाम ओ-आई-डी-सी के पास किराए पर लिया हुआ बताया जाता है, यह गोदाम ओ-आई-डी-सी ने सालों पहले हवेली एंटरप्राइजेज़ से लिया, तथा उक्त हवेली एंटरप्राइजेज़ दानह भाजपा नेता फतेसिंह चोहान कि बताई जाती है।

लेकिन बताया जाता है कि कुछ माह पूर्व ओ-आई-डी-सी एवं हवेली एंटरप्राइजेज़ के बीच गोदाम को लेकर, किए गए करार कि समय अवधि समाप्त हो चुकी है, इसके बाद भी उक्त गोदाम को खाली करने कि जगह, ओ-आई-डी-सी द्वारा पिछले चार माह में दो-बार, उक्त गोदाम के किराए में, किस कारण बढ़ोतरी ( इंक्रीमेंट) किया गया इसका जवाब तो ओ-आई-डी-सी के एम-डी श्री जे-बी सिंह को देना चाहिए।

अब इसी मामले का दूसरा पहलू यह है कि, ओ-आई-डी-सी द्वारा पूर्व में हवेली एंटरप्राइजेज़ से, किराए पर लिए गए गोदाम के करार कि समय अवधि समाप्त होने के बाद। ओ-आई-डी-सी ने दिनांक 21-07-2016 को गोदाम के लिए एक नया टेण्डर जारी किया। अब इस टेण्डर में भी जे-बी सिंह द्वारा किए गए एक बड़े घोटाले की बू-आती नज़र आ रही है।

50 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट, करार करार समाप्त, लेकिन इंक्रीमेंट के साथ किराया जारी।
27 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट, गोदाम का इस्त्माल शुरू नहीं किया, किराया चालू।
17 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट, इसके साथ तो करार ही नहीं किया, शायद सस्ती और अच्छी जगहो पर आम्दानी नहीं होगी!

क्यो कि बताया जाता है कि नए गोदाम के लिए ओ-आई-डी-सी ने 27 रुपये प्रति स्क्वेयर-फिट के अनुसार जलराम डव्लपर्स के साथ एग्रीमेंट किया है, जबकि इसी टेण्डर में एक कंपनी द्वारा 17 रुपये प्रति स्क्वेयर-फिट के हिसाब से आवेदन किया गया था। अब 17 रुपये प्रति स्क्वेयर-फिट वाले को छोड़ कर 27 रुपये प्रति स्क्वेयर-फिट वाले के साथ एग्रीमेंट करने के किए ओ-आई-डी-सी के एम-डी जे-बी सिंह ने कितने रुपये प्रति स्क्वेयर-फिट कि रिश्वत ली? इसकी जांच प्रशासक प्रफुल पटेल ही करे तो बेहतर होगा! लेकिन प्रशासक प्रफुल पटेल को इस पर भी ध्यान देना होगा की और ऐसे कितने विभाग है जिनमे विकास के नाम पर जे-बी सिंह ने अपनी मनमर्जी चलाई तथा नियम-अधिनियम और जनता की गाढ़ी कमाई को ठेस पहुंची? इस मामले में एक मुख्य चर्चा यह भी है की ओ-आई-डी-सी के अध्यक्ष सवय प्रशासक प्रफुल पटेल है, तो क्या अपने इस विभाग में हुई इस गड़बड़ी पर वह सख्त कार्यवाही करेंगे, या सालों से जनता के तमाम आरोपो से, अब तक के ओ-आई-डी-सी के तमाम एम-डी जैसे जांच से बचते आए है, वैसे यह एम-डी जे-बी सिंह भी बच जाएंगे?

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इस पूरे मामले में केवल एक गड़बड़ी हो तो और बात है लेकिन यहाँ तो गड़बड़ियों कि फुलझड़ी लगी दिखाई देती है, पहले तो ओ-आई-डी-सी द्वारा समय पर गोदाम खाली नहीं किया गया जिसकी समय सीमा समाप्त हो गई थी, उल्टा भाजपा नेता फतेसिंह चोहान कि कंपनी हवेली एंटरप्राइजेज़ को पिछले चार माह में दो बार इंक्रीमेंट दे दिया।

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इसके अलावे 17 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट के आवेदक को दर किनार कर, 27 रुपये प्रति स्क्वेयर-फिट के आवेदक के साथ एग्रीमेंट कर ओ-आई-डी-सी के एम-डी जे-बी सिंह कोन सी ईमानदारी साबित करना चाहते है यह तो प्रशासक प्रफुल पटेल उनसे पूछे तो ही बेहतर होगा।

अब आलम यह है की जहां एक तरह हवेली एंटरप्राइजेज़ को ओ-आई-डी-सी द्वारा लगभग 50 रुपये प्रति स्क्वेयर-फिट के हिसाब से किराया दिया जा रहा है, वही दूसरी तरफ जलराम डव्लपर्स ने भी प्रतिमाह 27 रुपये प्रति स्क्वेयर-फिट के हिसाब से ओ-आई-डी-सी को बिल देना शुरू कर दिया। जबकि अभी तक ना ही हवेली एंटरप्राइजेज़ से लिया गया गोदाम खाली हुआ और ना ही जलराम डव्लपर्स से लिया गया गोदाम इस्त्माल हुआ। कुल मिलाकर आलम यह रहा की जहां 17 रुपये प्रति स्क्वेयर-फिट के गोदाम को छोड़कर, ओ-आई-डी-सी लगभग दो गोदाम के मिलकर 77 रुपये प्रति स्क्वेयर फिट की चपत खा रही है, अब इसे घोटाला ना कहा जाए तो क्या कहां जाए? शायद इसका जवाब भी प्रशासक प्रफुल पटेल को देना चाहिए क्यो की ओ-आई-डी-सी के मुख्या भी वही है और दोनों प्रदेशों के प्रशासक भी वही है। और शायद प्रशासक प्रफुल पटेल की दानह में नियुक्ति के बाद यह पहला ऐसा मामला होगा जिसमे सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और घोटाले की बु-आती हो।