गृह राज्य मंत्री के भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा खुलासा… संध प्रदेशों में हुए घोटालों में गृह-राज्यमंत्री का हिस्सा!

haribhai chaudhary BJP
haribhai chaudhary BJP

दमन-दीव के नेता, सांसद, सामाजिक कार्यकर्ता और अधिकारी जनता से भले ही भ्रष्टाचार मिटाने का वादा और दावा करते हो लेकिन यह यह वादा और दावा कितना सफल साबित हो सकता है यह तो आप इस खबर को पढ़कर अपना अंदाजा लगा ही सकते है।

संध प्रदेश दमन के सरकारी विभागों में कितने घोटाले हुए और अभी भी हो रहे है उसकी गणना तो अभी तक नहीं हुई है, लेकिन उन घोटालों पर की गई शिकायतों की गणना अगर की जाए तो प्रशासक और प्रशासन के साथ साथ दमन-दीव के कई नेता शर्मिंदगी अवश्य महसूस करेंगे ऐसा हमारा मानना है।

बात उस वक्त की है जब दमन-दीव विधुत विभाग के भ्रष्टाचार को लेकर एक एक कर के दमन-दीव के तमाम नेता सड़कों पर उतरे थे, उन नेताओं की ने नाम की फेहरिस्त इतनी लंबित है की यह समझ में नहीं आता की इस अध्याय में किसके नाम को शामिल किया जाए और किसे इस मामले से दूर रखा जाए, शायद ही दमन-दीव का कोई ऐसा नेता और सामाजिक कार्यकता हो जिसने दमन-दीव में उस वक्त चल रहे भ्रष्टाचार के आंदोलन में हिस्सा ना लिया हो, उस वक्त चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में दमन-दीव सांसद के अलावे कई नेता और भी थे जिन्हे जनता का पूरा पूरा सहयोग मिला, और नेताओं तथा जनप्रतिनिधियों के साथ साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं की यह मांग थी की विधुत विभाग की तत्काल सीबीआई जांच कारवाई जाए और दमन-दीव विधुत विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले को तत्काल निलंबित किया जाए।

मामला जितना लम्बा, उतने ही अधिक चौकाने वाले खुलासे इस विभाग को लेकर रोज होते रहे, और रोज एक नए खुलासे के साथ एक और जांच की मांग व शिकायत फाइल में दर्ज होती रही, कभी कार्यपालक अभियंता के भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच मांग धीरे धीरे दमन-दीव की उन सखसियतों के गिरेबान को छू-लिया जिसकी परिकल्पना ना ही प्रशासक ने की थी ना ही सासद महोदय लालुभाई पटेल ने।

इस मामले में कार्यपालक अभियंता के बाद विभाग के सहायक अभियंता, कनिय अभियंता और अंत में मामले की आँच विधुत सचिव तक पहुंच गई, बाजार में खुले तौर पर इस बात की चर्चा होने लगी की इस विभाग में हुए घोटाले को तथा कार्यपालक अभियंता को उस वक्त पर रहे विधुत सचिव ज्ञानेश भारती का संरक्षण है! और फिर जनता व जनप्रतिनिधियों ने विधुत सचिव तक के शामिल होने और भ्रष्टाचार में हिस्सा लेने की जांच को लेकर मांग करनी शुरू कर दी।

लेकिन लगातार चल रही इस मांग पर भी प्रशासक ने अभी जांच शुरू भी नहीं की थी की एक और खुलासा हुआ और वह खुलासा किया क्रांति भास्कर की खोजी टिम ने, क्रांति भास्कर की टिम ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया जिसमे उस वक्त के वित्त सचिव पी-एस रेड्डी ने यह बताया की विकास आयुक्त व विधुत सचिव ज्ञानेश भारती दमन-दीव में हुए विधुत घोटाले में शामिल थे और उन्होने इस घोटाले के आलावे कई और घोटाले भी किए है जिससे दम पर लगभग वह 300 करोड़ रुपये की काली कमाई कर के दमन की जनता और नेता को ठेंदा दिखाकर दिल्ली लौट गए। इस खुलासे के बाद एक बार पुनः विधुत विभाग काफी चर्चे में आई गई, जनता व जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में पुनः लंबित जांच की मांग को एक बार तेज कर दिया और प्रशासक से इस मामले में भी सीबीआई जांच करवाने की मांग की गई।

दमन-दीव विधुत विभाग के विधुत सचिव, कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनिय अभियंता तथा कई ओघोगिक इकाइयों द्वारा इस विभाग को करोड़ों का चुना लगाया गया, इस बात की सेकड़ों शिकायते गृह मंत्रालय के गृह सचिव, संयुक्त सचिव, विधुत मंत्रालय, सीबीआई, सीवीसी, प्रधान मंत्री कार्यालय, एवं गृह मंत्री तथा गृह राज्य मंत्री को की गई। इन तमाम शिकायतों का क्या हुआ और आगे क्या होगा यह अब तक केवल एक राज की बात है क्यों की जिस विभाग के अधिकारी व अभियंता को लेकर इतनी शिकायते हुई उनकी अब तक जांच तक शुरू नहीं हुई, इस मामले को देखकर यह अवश्य अंदाजा लगाया जा सकता है की इस देश के नेता और अधिकारियों के साथ साथ दमन-दीव के सांसद लालुभाई पटेल द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त दमन-दीव करने की बात कभी ना पूरे होने वाले सपने के समान दिखाई देती।

  • अभियंता भी वहीं है और विभाग भी वहीं फिर नेताओं की चाल क्यों बदल गई?

किसी समय जिस विभाग और अभियंता के निलंबन को लेकर दमन-दीव के Daman CBIनेता सड़कों परआंदोलन कर रहे थे, उस विभाग की जांच हुए बिना तथा अधिकारी का निलंबन हुए बिना आखिर उस विभाग में ऐसा क्या बदलाव आ गया की दमन-दीव के नेताओं के सुर और ताल दोनों इस विभाग और विभागीय अभियंता के लिए बदल गए यह अवश्य जनता जानना चाहेगी कि, क्या कारण है कि अभियंता भी वहीं और विभाग भी वहीं फिर नेताओं की चल अचानक क्यों बदल गई?

जब इसी मामले में क्रांति भास्कर की टिम ने अपनी तहकीकात जारी रखी तो पता चला की गृह मंत्रालय द्वारा इस मामले में दमन-दीव प्रशासक से कई बार टिप्पणी व जवाब मांगा तथा कई जांच के आदेश भी जारी किए लेकिन प्रशासक की तरफ से क्या जांच हुई और केसी जांच हुई यह तो प्रशासक ही जानते है, लेकिन जब क्रांति भास्कर के हाथ वह दस्तावेज लगे जिनमे गृह मंत्रालय ने प्रशासक से मामले में तत्काल रिपोर्ट मांगी तो क्रांति भास्कर की टिम उन दस्तावेजों का हवाला लेकर गृह राज्य मंत्री श्रीहरिभाई चोधरी के पास अपने उन सवालों की फेहरिस्त लेकर पहोंची जिनके जवाब अब भी बाकी थे, क्रांति भास्कर के संपादक ने हरिभाई चौधरी से पूछा की क्या आपको दमन-दीव में हुए विधुत घोटाले के बारे में पता है और क्या आपको दमन-दीव भाजपा की और से ऐसे कोई भी दस्तावेज मिले है जिनमे इस विभाग व विभागीय अधिकारियों ने जांच की मांग की है? तो गृह राज्य मंत्री हरिभाई चोधरी ने कहां की दमन-दीव भाजपा द्वारा विधुत विभाग के भ्रष्टाचार व घोटाले से जुड़े दस्तावेज तत्काल प्रशासक को जांच के लिए सोंप दिए गए थे, लेकिन उस पर प्रशासक ने क्या किया यह तो नहीं पता।

इसे सी-बी-आई अवश्य पढ़े….

दमन-दीव के इस विभाग और विभागीय अभियंताओं के भ्रष्टाचार में सीबीआई के कुछ अधिकारियों को हफ्ता तथा हिस्सा मिलता रहा ऐसी कई बाते दमन-दीव की जनता के साथ साथ दमन-दीव के कई अधिकारियों द्वारा सुनने को मिली, शायद यह बात और इस बात की आंच सीबीआई तक भी अवश्य पहुंची होगी, लेकिन अब तक तो दमन-दीव का सबसे भ्रष्ट विभाग और अभियंता सीबीआई के चंगुल से बचे है..! और आगे कब तक बचे रहेंगे इसका फ़ैसला तो सीबीआई की कार्यप्रणाली पर निर्भर करता है। इस विभाग में हुए भ्रष्टाचार के कारण सीबीआई पर जितना कीचड़ उड़ा है और उड़ रहा है उसकी परिकल्पना भी करना मुश्किल है यह अलग बात है की देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को यह नहीं पता हो कि उसके बारे में इस बाजार में किस बात की चर्चाएँ आम है।

हमारा दूसरा सवाल यह था की हमने जब गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आर-के सिंह को इस Kranti-Bhaskar-(Bhuchal)मामले में जानकारी दी व आर-के सिंह से यह पूछा की दमन-दीव विधुत विभाग व विभागीय अधिकारियों के भ्रष्टाचार संबंधित मामले में गृह मंत्रालय में दर्जनों शिकायते लंबित है उन पर जांच क्यों नहीं हो रही है, और क्या गृह मंत्रालय के अधिकारी इस घोटाले को संरक्षण दे रहे है तथा जांच नहीं करने के आवज में हिस्सा ले रहे है तो संयुक्त सचिव ने तत्काल एक जांच का आदेश जारी करते हुए प्रशासक से निश्चित समयवधि में इस मामले में तत्काल पूरी रिपोर्ट जमा करवाने को कहां, जो अभी तक लंबित बताई जाती है, गृह राज्य मंत्री हरिभाई चोधरी को यह सब सुनकर शायद यह एहसास नहीं हो रहा था की वह अब इसका प्रति उत्तर क्या दे, तो उन्होने कहां की मेरे पास भी शिकायते आई है और मे उन पर जल्द जांच करवाउंगा! इसके बाद गृह राज्य मंत्री ने जांच करवाने के लिए क्रांति भास्कर की टिम से कागजात पेश करने को कहां तो क्रांति भास्कर के संपादक ने गृह राज्य मंत्री हरिभाई चोधरी को बताया की आप अपने मंत्रालय की फाइले खंगाले आपको दमन-दीव की जनता व जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजी गई सेकड़ों फाइले मिल जाएंगी, तथा उन्ही फाइलों को आधार बनाकर आपके मंत्रालय के संयुक्त गृह सचिव आर-के सिंह ने तो दमन-दीव प्रशासक से जांच की रिपोर्ट मांगी है, हम तो उन आदेशों की अवलेहना और लंबित का कारण पूछ रहे है जिन्हे सवंय गृह मंत्रालय ने प्रशासक को लिखे है।

  • क्या प्रशासक आशीष कुन्द्रा ने भी इस भ्रष्टाचार की नदी में अपने हाथ गंदे किए है?

अब तक जो खुलासे हुए है उन्हे दिखकर बस एक ही सवाल सामने आता है कि क्या दमन-दीव के प्रशासक आशीष कुन्द्रा भी इस विभाग के भ्रष्टाचार में शामिल है और भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे है? क्यों की इतनी शिकायतों व गृह मंत्रालय द्वारा मिले जांच के आदेशों के अनुसार तो प्रशासक आशीष कुन्द्रा को अब का इस विभाग के अभियंताओं की जांच शुरू कर इन्हे निलंबित कर देना चाहिए था, लेकिन ऐसा अब तक तो हुआ नहीं, जिसका कारण या तो कोई दबाव या सनलिपप्ता ही हो सकता है!  

अंत में क्रांति भास्कर के संपादक ने गृह राज्यमंत्री से पूछा की आखिर क्या कारण है जिसके चलते एक लंबे समय से यह मामला और इस मामले की जांच लंबित है एवं कई सूत्रों का कहना है की इस घोटाले के अलावे अन्य घोटालों का हिस्सा जांच को प्रभावित करने व जांच नहीं करने के लिए गृह मंत्रालय के कुछ अधिकारियों को दिया जाता है? इस पर आपका क्या कहना है? गृह राज्य मंत्री ने केवल इसी प्रश्न को हल नहीं किया अब क्यों यह तो वहीं जाने….!

अब तक हुए स्टिंग ऑपरेशन पर एक नजर….

दमन-दीव के तत्कालीन वित्त सचिव ने तो बताया ही कि दमन-दीव विधुत विभाग में करोड़ों का घोटाला हो रहा है और उस घोटाले का हिस्सा गृह मंत्रालय तक जाता है तथा तत्कालीन विधुत सचिव भी घोटाला कर दमन से करोड़ो को काली कमाई कर के गए है और इस में तत्कालीन प्रशासक की भी सहभागिता हो सकती है, लेकिन इस बात को दमन-दीव प्रशासक इतने हल्के में लेगी इसका अंदाजा शायद किसी को ना था, इसके आलावे दमन के सतर्कता विभाग धीरूभाई टंडेल ने भी बताया था कि विधुत विभाग में करोड़ों का भ्रष्टाचार चल रहे है, और इसके साथ यह भी बताया था कि दमन-दीव उप-विधुत सचिव भी इस भ्रष्टाचार के दम पर करोड़ों कमाते है, लेकिन प्रशासक और प्रशासन इसे कोमेडियन स्टोरी समझकर पढ़ते रहे। इसके अलावे एक और स्टिंग क्रांति भास्कर ने किया जिसमे दमन में स्थित विलनोन पोलिएस्टर लिमिटेड कंपनी द्वारा बताया गया की वह दमन-दीव विधुत विभाग के कनिय अभियंताओं को प्रतिमाह 50-50 हजार रुपये रिश्वत के देती है, लेकिन इस स्टिंग को भी दमन-दीव प्रशासक ने दरकिनार कर भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने का काम किया, उक्त कंपनी ने यह भी बताया कि जब विधुत आवंटन किया जाता है तो कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले को रिश्वर देनी पड़ती है हमने दी है और सभी देते है इसके बिना विधुत का आवंटन नहीं हो सकता, लेकिन इन तमाम स्टिंग ऑपरेशन को प्रशासक, विकास आयुक्त, एवं विधुत सचिव ने दरकिनार कर भ्रष्ट अधिकारियों को सजा देने की बजाय संरक्षण देने का काम किया।

दमन-दीव विधुत घोटाले में गृह राज्यमंत्री हरिभाई चौधरी यह साHaribhai-Parathibai-Chaudhary Bhuchalफ कर चुके है की उस घोटाले की जांच के लिए उन्हे दस्तावेज मिले, और उन्होने वह दस्तावेज प्रशासक आशीष कुन्द्रा को दे दिए, अब यह कहकर हरिभाई क्या साबित करना चाहते है यह तो वहीं जाने लेकिन इस मामले में सूत्रों का यह साफ कहना है की उन्हे भी दामन-दीव के घोटालो का हिस्सा मिलता रहा है यह दिगरबात है कि, इसका सबूत तो नहीं है, लेकिन जांच के आगाज़ की तोप हमेशा चर्चा के बारूद से ही शुरू हुई है!

“अबकी बार” भाजपा का भ्रष्टाचार!  बे-नकाब हुई मोदी सरकार!

 

ये भी पढ़ें-  वेट विभाग के साथ गोपाल टंडेल कि दादागिरी।

100 से अधिक स्टिंग के बाद किया गया गृह राज्य मंत्री को हफ्ता मिलने का खुलासा….

अभी तक इस मामले में लगभग 100 से अधिक स्टिंग किए गए और कई खुलासे भी समय समय पर किए जा चुके है, इस मामले को पूर्णरूप से सत्यता के साथ एवं विश्वसनीयता के साथ उजागर करने के लिए दमन-दीव के बड़े बड़े अधिकारियों का स्टिंग ऑपरेशन कर यह पता लगाया गया की हकीकत क्या है? तमाम स्टिंग ओपरेशनों में दमन-दीव के कई सममानीय व ऊंचे पद पर बैठे अधिकारियों द्वारा जब यह इस बात को रिकॉर्ड कर लिया गया की दमन-दीव विधुत विभाग में घोटाला हुआ है और हो रहा है तथा जिसका हिस्सा दमन-दीव विधुत सचिव के साथ साथ कई बड़े बड़े अधिकारियों व गृह मंत्रालय के अधिकारियों में बांटा गया और गृह राज्य मंत्री भी इस मामले से अछूते नहीं रहे तो इस बात की पुष्टि होती दिखाई दी के दमन-दीव विधुत विभाग के घोटाले व घोटाले में भागीदारों के तार गृह मंत्रालय तक है।

अब प्रशासन इस मामले में कोई जांच कर अधिकारियों को निलंबित करती है या पत्रकारिता पर अपने अधिकारित्व का दुरुपयोग कर दबाव बानती है, यह तो समय ही बताएगा।