कैसे हटा सीबीआई की लिस्ट से इनका नाम?

daman and diu electricity department
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पूर्व में विधुत विभाग के अभियंता मिलिंद इंगले के खिलाफ जन आंदोलन के बाद जब प्रशासक भल्ला ने उक्त अभियंता का कार्यभार व विभाग के कार्यपालक अभियंता पद सहायक अभियंता विशंभर सिंह को दे दिया, तो काइयों को यह महसूस हुआ की इस नेक निर्णय में कहीं न कहीं भल्ला की नेकदिली छुपी है। लेकिन आज जो बाते सामने आ रही है उसे देखकर लगता है की मिलिंद इंगले को उस वक्त पद से हटाकर भल्ला ने कहीं न कहीं मिलिंद इंगले को बचा लिया था।
बताया जाता है की पूर्व में हुए विधुत घोटालों की जांच के लिए कई शिकायत सीबीआई के कार्यालयों में पहुची, जिनमे मुंबई से लेकर दिल्ली के कार्यालयों की लिस्ट भी शामिल है। बताया जाता है की दर्जनों मामले आज भी सीबीआई के पास लंबित है। तथा विधुत विभाग एवं कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले की जांच की शिकायतों पर अब भी धूल नहीं जमी है। पूर्व में विधुत विभाग के खिलाफ एवं विभागीय अन्य अधिकारियों के खिलाफ दर्जनों शिकायतों के कारण यह विभाग एवं इस विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले का नाम सीबीआई की उन लिस्टों तक आ गया था जिनपर सीबीआई को अपनी पेनी नजारे रखने वाली थी, तथा इस सूची की जानकारी कैसे जाहीर हुई यह तो अभी तक एक सवाल से अधिक कुछ भी नहीं है, लेकिन बताया जाता है की उस लिस्ट में से अपना नाम अलग करने का काम मिलिंद इगन्ले द्वारा उस वक्त किया गया जब उनके पास कार्यपालक अभियंता का प्रभार नहीं था, और बताया जाता है की अपना नाम उस लिस्ट से अलग करवाने में मिलिंद इंगले कामयाब भी रहे और उसके बाद उन्हे पुनः कार्यपालक अभियंता का प्रभार दे दिया गया।
यह मामला और सवाल जितना सीधा लगता है उतना है नहीं।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है की मिलिंद इंगले को कैसे पता चला की उनका नाम और वह खुद सीबीआई की नजर में है। और अगर उन्हे किसी सूत्रों से यह पता चल भी गया तो उन्होने अपना नाम उस लिस्ट में से कैसे गायब करवाया। इस मामले में तो प्रशासक कार्यालय की फाइलों और विधुत विभाग की फाइलों की जांच मुंबई सीबीआई टिम को करनी चाहिए।