I.A.S अधिकारियों कि आमदनी उनके एक कार्यकाल में लगभग 100 करोड़ के बाहर….

संध प्रदेश दमन-दीव व दानह में हुए भ्रष्टाचार और घोटालों का हिस्सा गृह मंत्रालय के किन-किन अधिकारियों को जाता है? यह सवाल शायद गृह मंत्रालय के अधिकारियों को खले, लेकिन सवाल तो यही रहेगा।

ज्ञात हो कि, संध प्रदेशों में अधिकारियों कि नियुक्ति तबादले तथा भ्रष्टाचार के मामलों में संज्ञान लेना का काम, गृह मंत्रालय में यू-टी खंड के संयुक्त सचिव राकेश सिंह कि देख-रेख में होता है, तथा संध प्रदेशों में अधिकारियों द्वारा किए गए घोटालों तथा भ्रष्टाचार की जांच को लेकर मामले भी इसी खंड से होकर आगे बढ़ते है। अगर एक तरह से यह मान लिया जाए की, भारत में जीतने भी संध प्रदेश है उनकी देख-रेख इसी अधिकारी के हाथों में है तो यह गलत नहीं होगा।

संध प्रदेश दमन-दीव व दानह में ऐसे कई विभाग व विभागीय अधिकारी है जिनमे करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार और घोटाले होते रहे है और अभी भी लूट-खसोट की यह परंपरा जारी है। संध प्रदेश दमन-दीव व दानह में समय समय पर कई गडबड़ियाँ और घोटाले सामने आते रहे, कई मामलों में गृह मंत्रालय को कभी जनता द्वारा, तो कभी सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा तो कभी खोजी पत्रकारों द्वारा सबूतों के साथ शिकायते कर जांच की मांग की गई। जिस पर गृह मंत्रालय ने अपनी यह भूमिका निभाई की उस जांच की मांग व कि गई शिकायत पर टिप्पणी हेतु उक्त फाइल को कभी आरोपी अधिकारी तो कभी संध प्रदेश प्रशासक को प्रस्तुत कि, और प्रशासक से टिप्पणी मांगी गई की इस पर आगे क्या कार्यवाई करनी चाहिए। इसी मामले में सुचना के अधिकार द्वारा गृह मंत्रालय ने बताया कि, पिछले 14 वर्षों में कई मामले ऐसे है जिन पर अभी तक प्रशासक की टिप्पणियाँ प्राप्त नहीं हुई है, इस मामले में खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए। (चौदह वर्षों से सोते रहे दमन-दीव व दानह के सभी प्रशासक…)

भ्रष्टाचार में गृह मंत्रालय के बड़े बड़े अधिकारी भी शामिल….

संध प्रदेश दमन-दीव व दानह प्रशासन के भ्रष्टाचार का पर्दा-फ़ास करने के लिए क्रांति भास्कर तथा भूचाल न्यूज नेटवर्क के खोजी पत्रकारों ने मामलों की खोज-बिन की और कई स्टिंग किए तो पता चला की संध प्रदेश दमन-दीव व दानह प्रशासन के अधिकारियों के साथ साथ गृह मंत्रालय के कुछ बड़े अधिकारी भी संलिप्प्त है, जिनकी वजह से भ्रष्टाचार व घोटालों के मामलों में कोई जांच नहीं होती।

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सबसे पहले क्रांति भास्कर ने दमन-दीव सतर्कता विभाग के अधिकारी का स्टिंग कर उनसे यहां के हालतों तथा घोटालों की जानकारी जमा करने का प्रयत्न किया तो पता चला कि संध प्रदेश दमन-दीव सतर्कता विभाग के अधीक्षक धीरुभाई टंडेल को तो यहां के हर उस भ्रष्टाचार के बारे में पता है जो हुआ है या हो रहा है, लेकिन कार्यवाई के नाम पर वह भी केवल कुर्सी गरम कर रहे है। इस स्टिंग में सतर्कता विभाग के अधीक्षक ने बताया कि, कैसे दमन-दीव विधुत विभाग में करोड़ों रुपये की बिजली चोरी कारवाई जा रही है, और कैसे दमन-दीव के प्रशासक तमाशा देख-रहे है। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए…

300 करोड़ तो भ्रष्टाचार में कमाए है… घोटाला कितने करोड़ का होगा ?
गृह मंत्रालय के अधिकारियों को भ्रष्टाचार का हिस्सा देते है: तत्कालीन वित्त सचिव।   

इसके बाद क्रांति भास्कर के खोजी पत्रकार ने दमन-दीव के तत्कालीन वित्त सचिव से पूछा कि दमन-दीव विधुत विभाग में कितने करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ है और हो रहा है और इस भ्रष्टाचार में किस किस अधिकारी को हिस्सा मिलता है। तो दमन-दीव के तत्कालीन वित्त सचिव श्री पी-एस रेड्डी ने बताया की यहां तो भ्रष्टाचार का कोई हिसाब ही नहीं है, दमन-दीव के पूर्व विधुत सचिव लगभग 300 करोड़ की कमाई कर के दमन से गए है तो बाकी हिसाब आप ही लगा लीजिए,  पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए… इसके अतिरिक्त तत्कालीन वित्त सचिव ने यह भी कहां कि, दमन-दीव के प्रशासक भी विधुत विभाग के भ्रष्टाचार में हिस्सा लेते होंगे, इसी लिए तो कोई कार्यवाई नहीं करते, वरना क्यों इस विभाग की जांच नहीं होती, इसके आलवे तत्कालीन वित्त सचिव श्री रेड्डी ने यह भी बताया कि यहां के भ्रष्टाचार का हिस्सा तो गृह मंत्रालय के सचिवों तक जाता है, अगर नहीं जाता होता तो गृह मंत्रालय में बैठे सचिवों को भ्रष्टाचार की शिकायते मिलने पर वह तत्काल जांच करवा देते।

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इसके आलावे क्रांति भास्कर तथा भूचाल न्यूज नेटवर्क के खोजी पत्रकारों ने दमन-दीव विधुत विभाग के अभियंताओं के स्टिंग भी किए कि, आखिर कैसे करोड़ों का भ्रष्टाचार हो रहा है और इसका हिस्सा किन किन को जाता है, तो दमन के उन अभियंताओं ने बताया कि दमन-दीव विधुत विभाग के भ्रष्टाचार में दमन-दीव विधुत विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले का मुख्य रोल है, तथा इस विभाग के भ्रष्टाचार का हिस्सा दमन-दीव विधुत सचिव, दमन-दीव उप-विधुत सचिव एवं प्रशासक के साथ दमन-दीव के कई नेताओं को जाता है ताकि वह अपनी जुबान पर ताला लगाकर बैठे रहे, इसके आलावे कुछ रकम गृह मंत्रालय के अधिकारियों को भी भेजी जाती है जिसके चलते वह किसी शिकायत पर कोई कार्यवाई नहीं करे।

बात केवल एक विधुत विभाग कि ही नहीं है दमन-दीव व दानह में ऐसे कई विभाग है जहां के भ्रष्टाचार का आंकड़ा करोड़ों के बाहर है, दमन-दीव विधुत विभाग, दमन-दीव लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग, खाध्याव औषधिनियंत्रक विभाग, एक्साइज़ विभाग वेट विभाग, प्रदूषण नियंत्रण समिति जैसे कई विभाग विभाग है जिनमे करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हो रहा है और दमन-दीव के विकास आयुक्त संदीप कुमार इस भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकियाँ लगा रहे है, जिसकी जानकारी प्रशासक आशीष कुन्द्रा को भी है।

इसके आलावे ऐसे दर्जनों अधिकारियों से इस मामले में सवाल किए गए की गृह मंत्रालय में किस किस अधिकारी को यहां हुए घोटालों का हिस्सा दिया जाता है, तो उन दर्जनों अधिकारियों में से एक भी अधिकारी ऐसा नहीं मिला जिसने इस बात से इंकार किया हो कि दमन-दीव या दानह में हुए या हो रहे भ्रष्टाचार का हिस्सा गृह मंत्रालय के अधिकारियों को नहीं जाता हो।

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अब तक तो यही होता रहा है की इस संध प्रदेश में भ्रष्टाचार व घोटालों के खुलासे अखबारों की सुर्खियाँ बनते रहे, लेकिन जब भी जांच की बात या संज्ञान की बात आई तो गृह मंत्रालय में बैठे अधिकारियों ने शिकायत की फाइल को प्रशासक के हवाले कर के अपना पल्ला झाड़ लिया।

संध प्रदेशों के साथ साथ गृह मंत्रालय के भ्रष्टाचार पर एक खोजी रिपोर्ट…

लेकिन अब तक क्रांति भास्कर और भूचाल न्यूज नेटवर्क के खोजी पत्रकारों द्वारा जो तहकीकात की गई है, और जो भ्रष्टाचार के आँकड़े सामने आए है वह उस आकड़े से भी बड़े है जो दोनों संध प्रदेशों को संध प्रदेशों के विकास लिए दिया जाता है। संध प्रदेशों के अधिकारियों के जो स्टिंग व जानकारी खोजी पत्रकारों ने बटोरी है उसके अनुसार यहां के आई-ए-एस अधिकारियों कि आमदनी उनके एक कार्यकाल में लगभग 100 करोड़ के बाहर होती है, हालांकि ऐसे आई-ए-एस अधिकारियों की संख्या अधिक नहीं है जिनकी भ्रष्टाचार से की गई आमदनी 100 करोड़ के बाहर हो, लेकिन ऐसे अन-गिनत अधिकारी है जिनके भ्रष्टाचार की आमदनी करोड़ों में है, लेकिन बड़े बड़े हुनरमंद अधिकारी जब तक अपनी काली कमाई अपने रिश्तेदारों के नाम पर जमा करते रहेंगे, तब तक उनको पकड़ना नाकों तले चने चबाने से कम नहीं, लेकिन यह असंभव कार्य अगर ईमानदारी और लगन से किया जाए तो इस जांच में सीबीआई अवश्य सफल होगी, और देश के उन भ्रष्ट अधिकारियों को सबक सीखा पाएगी कि इस देश के धन को लूटने वाले उन अंग्रेजों का दूसरा अवतार है जो भारत को कई वर्षों पहले लूट कर चले गए।

इस पूरी खोज-बिन से यह सामने आया है कि, संध प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारी अपने अपने विभाग में भ्रष्टाचार जारी रखने व अपने आप को जांच से बचाने के लिए, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिवों तक को अपने भ्रष्टाचार का हिस्सा देकर, अपने आप को भी जांच से बचा लेते है, और बे-फिक्री से भ्रष्टाचार भी करते रहते है…