निरक्षण तो नहीं, लेकिन कलेक्सन हेतु अवश्य आते है…. डाक्टर वी-के दास कृप्या दवा दुकानों पर भी ध्यान दे!

भ्रष्टाचार, भाईगीरी, हफ्ता-वसूली और माफियागिरी पर अंकुश लगाने में प्रशासक प्रफुल पटेल भी फैल! | Kranti Bhaskar image 1
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अगर आप दवा खरीद रहे है, तो इन बातों का रखे ध्यान… संध प्रदेश दादरा नगर हवेली प्रशासन में भ्रष्ट अधिकारियों की कितनी भरमार है, इसका अंदाजा लगाना तो मुश्किल है, लेकिन इस भरमार की जानकारी संध प्रदेश के कितने वरीय अधिकारियों को है, इसका अंदाजा उन शिकायती फाइलों को देखकर लगाया जा सकता है, जो प्रशासक के साथ अन्य विभागीय कार्यालयों में लंबित है।

संध प्रदेश दानह के स्वास्थ्य विभाग और श्री विनोभाभावे सिविल अस्पताल के साथ साथ दानह खाद्य पदार्थ एवं ओषधिनियंत्रक के अलावे न जाने कितने विभागों का जिम्मा प्रशासक ने डाक्टर वी-के दास को दे रखा है, और न जाने उन विभागों की हकीकत से अब तक प्रशासक कोसो दूर कैसे है? दानह में चाहे विनोभाभावे अस्पताल का मामला हो चाहे खाद्य विभाग का दोनों विभागों में कहीं अनियमितता तो कहीं लापरवाही देखने को मिलती रही। मामला चाहे भ्रष्टाचार का हो चाहे चमचागीरी का इन दोनों में मामलों में डाक्टर वी-के दास का नाम सामने आता रहा, लेकिन प्रशासक आशीष कुन्द्रा ने शायद संध प्रदेश दमन विधुत विभाग के तर्ज पर अब बाकी विभागों को शय देने की ठान ली है?  लेकिन अब दानह स्वास्थ्य विभाग एवं डाक्टर वी-के दास से जुड़ा एक नया मामला सामने आया है। जिस मामले में सरकारी निधि नहीं बल्कि आम जनों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है। पूर्व में दानह में खाद्य विभाग के कर्मचारी व अधिकारी कितनी कामचोरी और भ्रष्टनिती से काम कर रहे है इस मामले में तो खाद्य विभाग के अधिकारी डाक्टर वी-के दास पहले ही खुलासा कर प्रशासन को नग्न कर चुके है, यह बात और है की उस नग्न प्रशासन ने अब तक न हीं विभाग पर कोई संज्ञान लिया न हीं डाक्टर दास पर। और कहां जाता है की संज्ञान लिया भी नहीं जाएगा, क्यों की प्रशासन के कुछ अधिकारियों के साथ साथ कुछ राजनेताओं का अघोषित रक्षण भी डाक्टर साहब को प्राप्त है।

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लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक और मामला सामने आया है जिसमे बताया जाता है की दानह के कई ग्राम पंचायत क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर हेतु प्रशासन ने उन मेडिकल स्टोर को लाइसेन्स तो आवंटित कर दिए, लेकिन यह देखना भूल गई की कितने मेडिकल स्टोर पर फार्मसिस उपलब्ध है तथा कितनी ऐसी मेडिकल स्टोर है जहां दवा उपलब्ध कराने वाले को दवा का मतलब भी ठीक तरह से पता है । क्रांति भास्कर की टिम ने कई दवा दुकानों का मुआइना किया, तो पता चला की अधिकतर दुकाने ऐसी है जहां फार्मसिस उपलब्ध ही नहीं है, बल्कि कई मेडिकल स्टोर ऐसे है जिनके लाइसेन्स में जिनका नाम है वह अब संध प्रदेश से बाहर व्यवसाय कर रहे है और नवसिखयो को दुकान सोंप दी गई, जब क्रांति भास्कर की टिम ने यह पता लगाना चाहा की क्या स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई जांच तथा निरक्षण करने उक्त मेडिकल स्टोर पर आता है, तो बताया गया की निरक्षण तो नहीं लेकिन कलेक्सन हेतु अवश्य आते है, जब इस मामले में अधिक जानकारी जमा करने का प्रयास किया गया तो उक्त मामले में कलेक्सन करने वाले का नाम नहीं बताया गया लेकिन यह सुनकर भ-लेही क्रांति भास्कर टिम के होश उड़ गई हो, भले-ही जनता इसे पढ़ कर ताज्जुब करे, लेकिन अभी भी इस मामले में प्रशासक कोई संज्ञान नहीं लेंगे यह तो जनता भी जानती है और प्रशासक भी।

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इन बातों का रखे ध्यान…

वैसे बताया जाता है कि दानह में जीतने भी मेडिकल स्टोर है, उनका समय पर सवास्थ्य विभाग तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को निरक्षण करना चाहिए, तथा इस मामले में हो रही अनियमीताओं की जिम्मेवारी व जवाबदारी भी डाक्टर दास की दिखाई देती है, बिना फर्मासिस के चल रहे मेडिकल स्टोर पर मरीजों को कैसे दवा मिलती है इसका तो भगवान ही मालिक है, इसके आलावे यह भी सोचने की आवश्यकता है की अगर दवा गलत दी गई तो मरीज कितनी हानि हो सकती है। ऐसे में दवा खरीदने वाले को चाहिए की वह इस बात की पुष्टि कर ले की जिस दुकान से वह दवा खरीद रहा है उस दुकान में दवा देने वाला फार्मसिस उपलब्ध है या नहीं, तथा उक्त दुकान के दवा लाइसेंस पर जिस का फोटो है, वह दुकान में उपलब्ध है या नहीं, या कोई और ही नवसिखया दुकान चला रहा है।  medical store1

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बताया यह भी जाता है की सालों से मेडिकल स्टोर को लाइसेन्स देने से उन की अनियमिताओं पर पर्दा डालने तक के लिए उक्त तमाम अनियमितता फेलाने वाले मेडिकल स्टोर से संबन्धित अधिकारी अपनी जेबे गरम करते रहे है, और उस गर्मी का कुछ तापमान ऊपर तक पहुचता रहा है, लेकिन इस मामले सच्चाई कितनी है यह तो तब पता चलेगा की जब इस मामले में निसपक्ष जांच हो। लेकिन जिस विभाग के अधिकारी डाक्टर दास है उस विभाग की जांच संध प्रदेश के लिए किसी सपने से कम नहीं, यह और बात है ऐसे कई मामले है जिनकी जांच की मांग सालों से लंबित पड़ी है तो फिर इस की जांच हो इसकी उम्मीद करना भी बे-मानी है!

अब इस मामले के अलावे दानह में हो रहे भ्रष्टाचार, अनियमितताएँ एवं अफसरशाही पर अंकुश लगाने के लिए भारत के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को ही सोचना पड़ेगा, क्यों इस प्रशासन में प्रशासक की सोच पर भी अब आम जनों को शंका होने लगी है।