नेताओं के हक भी यहां हवा हो गए… जनता का तो भगवान ही मालिक…

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दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति में जन प्रतिनिधियों की नियुक्ति रोके बैठे है देबेन्द्र दलाई और संदीप कुमार…

संध प्रदेश दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के अध्यक्ष संदीप कुमार और सदस्य सचिव देबेन्द्र दलाई पर्यावरण संबंधित समस्याओं पर किस तरह का काम कर रहे है इसके तो कई उदाहरण अखबारों की सुर्खियाँ बन चुकी है, लेकिन अब जो मामला सामने आया है उसे देख-कर लगता है की प्रदूषण नियंत्रण समिति के यह दोनों अधिकारी जनता के साथ साथ जन प्रतिनिधियों का हक भी छिन रहे है और इस बात पर अवश्य जन प्रतिनिधियों को सोचना होगा, क्यों की अगर जनता के हकों की बात करने वाले जन प्रतिनिधि अपने हकों की रक्षा नहीं कर सके तो वह जनता के हक जनता को कैसे दिलाएगी यह सोचने वाली बात है।

संध प्रदेश दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति से संबंधित कुछ चौकाने वाले दस्तावेज हाथ लगे है, जिन्हे देखकर लगता है की इस विभाग के अधिकारी इस विभाग पर केवल अधिकारित्व चाहते है तथा जनता या जन प्रतिनिधि को उक्त विभाग के लिए तथा पर्यावरण के लिए कार्य नहीं करने देना चाहते है।

मामला यह है की दिनांक 14 अक्टूम्बर 2010 को दमन-दीव व दानह के तत्कालीन वन एवं पर्यावरण सचिव पी-के गुप्ता द्वारा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति को दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के पुनर्गठन हेतु पत्र लिखा, जिसमे सदस्य सचिव के पद हेतु मुख्य वन संरक्षक को योग्य बताते हुए यह प्रस्ताव रखा की दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव के पद पर मुख्य वन संरक्षक की नियुक्ति की जाए। उक्त प्रस्ताव पर केंद्रीय प्रदूषण समिति ने अपनी स्वीकृति देदी और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास उक्त मामले में आगे फाइल भेज दी गई।

  • मंत्रालय ने कई बार मांगे जन प्रतिनिधियों के नाम, लेकिन अब तक नहीं मिले मंत्रालय को नाम।
  • वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति में प्रतिनिधियों की नियुक्ति पिछले कई वर्षों से रोके बैठी है संध प्रशासन।
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इसी मामले में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने दिनांक 23 जून 2011 को दमन-दीव व दानह वन एवं पर्यावरण सचिव को पत्र लिखा और बताया की आपने को प्रस्ताव भेजा है वह पूर्ण नहीं है, तथा उक्त प्रस्ताव में किसी जन प्रतिनिधि का नाम नहीं है, मंत्रालय ने अपने पत्र में कहाँ की दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति में दमन-दीव तथा दानह से जन प्रतिनिधियों की नियुक्ति की जाएगी, तथा इन नियुक्तियों के लिए वन एवं पर्यावरण सचिव दमन-दीव व दानह से नाम भेजे जिन्हे मंत्रालय द्वारा नियुक्त किया जाएगा। लेकिन दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव, अध्यक्ष, तथा वन एवं पर्यावरण सचिव इन तीनों अधिकारियों ने किसी का नाम नहीं भेजा ताकि उक्त विभाग में इनका अधिकारित्व कायम रह सके।

इस के उपरांत दिनांक 20 जनवरी 2012 को पुनः वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने उक्त मामले में दमन-दीव व दानह के तत्कालीन प्रशासक नरेन्द्र कुमार को पत्र लिखा और मंत्रालय ने दिनांक 23 जून 2011 के पत्र का हवाला देते हुए कहां की अभी तक दमन-दीव व दानह वन एवं पर्यावरण सचिव द्वारा जन प्रतिनिधियों के नाम मंत्रालय को नहीं मिले है तथा जल्द मंत्रालय को उन जन प्रतिनिधियों के नाम उपलब्ध कराएं जिनके नाम दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति में नियुक्ति हेतु दर्ज किए जा सके। लेकिन इस पर भी दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के अध्यक्ष व वन एवं पर्यावरण सचिव जन प्रतिनिधियों का हक मारते रहे और मंत्रालय को किसी के नाम नहीं दिए गए, क्या दमन-दीव व दानह वन एवं पर्यावरण सचिव यह समझते है की दमन-दीव व दानह में योग्य जन प्रतिनिधि है ही नहीं? क्यों की मंत्रालय की बार बार मांग पर भी नाम नहीं देने का और क्या कारण हो सकता है? शायद दमन-दीव व दानह के जन प्रतिनिधियों को तो यह पता ही नहीं की उनके साथ मीटिंगों में पकवान खाने वाले कुछ अलग-थलग ही खिचड़ी पका रहे है!

  • क्या दोनों संध प्रदेशों में वन एवं पर्यावरण सचिव संदीप कुमार की नजर में कोई काबिल जन प्रतिनिधि नहीं?
  • दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति में जन प्रतिनिधियों की नियुक्ति रोके बैठे है संदीप कुमार!
  • दमन-दीव व दानह के नेताओं के साथ यह कैसा अन्याय कर रहे है वन एवं पर्यावरण सचिव संदीप कुमार!
  • जनता को हक दिलाने वाले नेताओं के हक भी इस प्रदेश में सलामत नहीं!
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अब इस पूरे मामले को देख-कर यही लगता है, की दमन-दीव व दानह के वन एवं पर्यावरण सचिव श्री संदीप कुमार और सदस्य सचिव देबेन्द्र दलाई यह नहीं चाहते कि, दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति में मंत्रालय द्वारा किसी जन प्रतिनिधि की नियुक्ति हो, इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि इन दोनों अधिकारियों को लगता हो कि अगर उक्त प्रदूषण नियंत्रण समिति में जन प्रतिनिधियों की नियुक्ति हो गई तो इनकी हुकूमत में जंग अवश्य लग जाएगा।

लेकिन भारत सरकार तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के नियमों के साथ साथ उच्चतम न्यायालय के आदेश भी यही कहते है कि संध प्रदेश दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समति में जन प्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिले, लेकिन अब तक तो इस मामले को दमन-दीव व दानह के संबंधित अधिकारियों ने दबा कर क्यों रखा यह जानने के लिए तो दमन-दीव व दानह के नेताओं को ही आगे आना पड़ेगा।