दमण विधुत विभाग में, करोड़ो के बकाया और वसूली में मास्टरमाइंड इंगले का हाथ!

daman and diu electricity department
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दमण-दीव विधुत विभाग के अभियन्ताओं ने करोड़ो का बकाया वसूल कर काफी सराहनीय कार्य किया है। लेकिन कभी कभी अधिक सराहना भी शक पैदा करती है और इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है, करोड़ो के बकाया वसूली मामले में जिनके नाम पर बकाया है वह तो बकाया चुका कर स्वतंत्र हो जाएंगे लेकिन जिनहोने बकाया रखने की खुली छूट दे रखी थी उनका रक्षण अब कौन करेगा? यह देखने वाली बात है।

दमण-दीव विधुत विभाग ने विधुत के बकाया बिलो की वसूली के काफी ठोस कार्यवाही की गई, कई नोटिस भी जारी किए गए। अब जनता में यह सवाल है की यह सब कुछ प्रशासक पद पर प्रफुल पटेल की नियुक्ति के बाद हुआ, इससे पहले क्यो नहीं हुआ? क्या इससे पहले विधुत विभाग के अभियंता करोड़ो का बकाया रखने वालो से मिले हुए थे? क्या विधुत विभाग के अभियन्ताओं को इतने सालो तक बिजली मीटर की रीडिंग लेते समय यह दिखाई नहीं देता था की जिसका बकाया है उसका बिजली कनेकसन काट देना चाहिए? जे-ई-आर-सी के नियमों के अनुसार तो दो बील से अधिक बील बकाया होने पर बिजली कनेकसन काट देने का प्रावधान है, लेकिन दमण-दीव विधुत विभाग के अभियंता सालो से अपने बनाए हुए नियमो से ही विधुत विभाग चलते रहे।

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क्या इससे पहले, सालो तक विभाग और विधुत चोरो में सांठ गाठ थी? क्या जिनके करोड़ो रुपये के बिजली बील बाकी थे वह बिजली कनेकसन नहीं काटने के लिए विभागीय अभियन्ताओं को रिश्वत देते थे? यदि ऐसा है तो विभाग के वह तमाम अभियंता भी दोषी साबित होते दिखाई दे रहे है जिनहोने समय पर नियमो के तहत बिजली बील बकाया होने पर भी बिजली कनेकसन नहीं काटे। दमण-दीव विधुत विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद रामभाऊ इंगले है और इस मामले में सर्वाधिक जिम्मेवारी कार्यपालक अभियंता की बताई जाती है ऐसे में क्या दमण-दीव विधुत सचिव उक्त अभियनता को चार्जशीट देने की बाते ही करेंगे या चार्जशीट भी देंगे? यह तो वक्त बताएगा।

वैसे श्री एस एस यादव तथा प्रशासक प्रफुल पटेल सालो पुराने बकाया बिलो की तरह सालो से संबित शिकायतों की हकीकत भी जान लेते तो बेहतर होगा! दमण-दीव विधुत विभाग में इससे पहले भी करोड़ो के घोटाले चर्चा हो चुकी है। जनता प्रशासन के खिलाफ आंदोलन कर चुकी है रेलिया निकाल चुकी है, प्रशासक प्रफुल पटेल को बकाया बील तो दिखाई दे गए, लेकिन क्या दमन-दीव प्रशासन के पास जनता द्वारा की गई शिकायतों का तथा रेलियों एवं आंदोलनो का भी कोई हिसाब या लेखा-जोखा है?

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सूत्रो का कहना है की कई मामलो में से एक मामला हाईकोर्ट पहुंचा है और लेकिन हाईकोर्ट को कोन बताएगा की बकाया मांगने वालो ने ही बकाया रखने की खुली छूट देकर रखी थी? दमण-दीव प्रशासन को चाहिए की यदि विधुत विभाग का बकाया वसूल हो चुका हो, तो अब अभियंता इंगले पर भी उसी ईमानदारी से कार्यवाही करके दिखाए जिस ईमानदारी से अब तक दमण-दीव व दानह के नेताओं पर कार्यवाही की है! शेष फिर।