सांसद मोहन डेलकर ने कहा इस्तीफ़ा दे दूंगा तो पूर्व सांसद ने कहा जनता मांगने वाली ही थी!

सिलवसा। संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली का विकास किसने किया, सरकार ने, दानह प्रशासन ने, दानह के नेताओं ने, मोहन डेलकर ने, नटु पटेल ने, उधोगपतियों ने, श्रमिकों ने या फिर जनता ने? यह सवाल इस लिए क्यों की वर्षों से केवल विकास की लड़ाई चल रही है! एक कहता है विकास हुआ ही नहीं तो दूसरा एक कहता है विकास हुआ है। एक कहता है विकास उसके कार्यालकाल में हुआ तो दूसरा कहता है उसके कार्यकाल में। इस सब के बीच जनता का कार्यकाल कौनसा था? यह सवाल इस लिए क्यों की जिस तरह राजनीति में अलग-अलग पक्ष होते है उसी तरह दानह की जनता भी अलग-अलग पक्षों में बटी हुई देखी गई, या यह भी कह सकते है की नेताओं की राजनीति ने जनता को भी अलग-अलग पक्ष में बाँट दिया। जनता मे से कुछ लोग एक पक्ष की प्रशंसा करते है तो कुछ दूसरे पक्ष की। जो जिस पक्ष से जुड़ा होता है वह उसी पक्ष और नेता के गुण-गान करता देखा जाता है या यू कहे की अपने पक्ष के नेता की तारीफ करना वह अपना दायित्व समझता है। नेताओं के लिए यह सबसे बड़ी सफलता रही है की उन्होने जनता को भी अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया जिससे किसी भी पक्ष के नेता को कम से कम आधा समर्थन बिना कुछ किए ही मिल जाता है। मीडिया की खबरों पर भी इसका असर दिखाई देता है किसी भी खबर में सबसे पहले यह देखा जाता है की यह किसके पक्ष में है और किसके विरोध में, खबर जिस पक्ष के पक्ष में दिखाई देती है उस पक्ष के लोग उक्त खबर को शेयर करना शुरू कर देते है और जिस पक्ष के विरोध में दिखाई देती है उस पक्ष के लोग उक्त खबर लिखने वाले को बिकाऊ मीडिया का तगमा दे देते हुए अभद्र टिप्पणियाँ करना शुरू कर देते है कुल मिलाकर यह कह सकते है की सबने अपने अपने अलग अलग माप-दण्ड तय कर रखे है वैसे होना तो यह चाहिए की खबर को जनता के माप-दण्ड से देखा जाए ना की किसी पक्ष के प्रशंसक अथवा प्रचारक के माप-दण्ड से। क्रांति भास्कर सदेव खोजी पत्रकारिता में विश्वास रखते हुए जनहित में पत्रिकारिता करती रही है। क्रांति भास्कर केवल और केवल जनता के पक्ष में है और ख़बर पाशने वाले से यही उम्मीद करती है की खबर पढ़ते समय अपनी आँखों से पक्ष की पट्टी उतार दे।

खेर अब मुद्दे पर आते है, मुद्दा है सांसद मोहन डेलकर के त्यागपत्र की घोषणा का। सांसद मोहन डेलकर ने दिनांक 05 जुलाई 2020 को यूट्यूब पर एक एक विडियों जारी किया और उक्त विडियों में प्रशासन पर कई घभीर आरोप लगाए।

मोहन डेलकर का कहना है प्रशासन के अधिकारी ऊपर से आए आदेश पर काम करते है। सवाल यह है की मोहन डेलकर क्या चाहते है? क्या वह यह चाहते है की प्रशासनिक अधिकारी उनसे आदेश लेकर काम करें? सांसद मोहन डेलकर का कहना है की उन्होने जनहित में जीतने भी मुद्दे उठाए उनके लिए उन्हे भारत सरकार की और से पूरा सहयोग मिला, जवाब मिला, लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा किसी मामले में कोई जवाब नहीं मिला, ना ही प्रशासन ने किसी भी मुद्दे का हल निकाला गया, उल्टा जनसमस्यों पर प्रशासन के सामने बोलने पर मुझे हैरान किया गया गया, टार्गेट किया गया, मोहन डेलकर का कहना है की कुछ दिनों पहले उन्हे एक पुलिस वाले का फोन आया की उन्हे एक मामले में आरोपी बनाया जाने वाला है ऊपर से आदेश है, मोहन डेलकर का सवाल है की एक सांसद के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है तो सामान्य जनता का हाल क्या होगा? मोहन डेलकर के अनुसार आज प्रदेश की हालत ब्रिटिश शासन से बत्तर हालत हो गई है और मे कुछ नहीं कर पा रहा हु इस लिए आने वाले लोक सभा सत्र में, लोक सभा में, लोक सभा पद से इस्तीफ़ा दे दूंगा। वैसे उन्होने उक्त विडियों में क्या क्या आरोप लगाए है और क्या कहा है यह विस्तृत में जानने के लिए आप नीचे दिए गए उक्त विडियों को देख सकते है।

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सांसद मोहन डेलकर द्वारा जारी इस विडियों के बाद दानह के पूर्व सांसद नटु पटेल द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मोहन डेलकर पर कई घंभीर आरोप लगाए गए। उक्त प्रेस नोट में कहा गया कि अपने आप को आदिवासीयों का नेता कहने वाले वर्तमान सांसद और भोले भाले आदिवासी भाईयो के वोट लेकर 7 बार संसद मे पहुचे पर उन्होने अपने 6 टर्म के कार्यकाल मे आदिवासी भाईयो को अगर कुछ दिया है तो हर 5 वर्ष बाद सिर्फ बडी-बडी बाते और झुठे वादे।

उक्त प्रेस नोट में बताया गया कि अपने 10 वर्ष के कार्यकाल मे पुर्व सांसद श्री. नटुभाई पटेल ने आदिवासी बाहुल क्षेत्र मे अनगिनत कार्य किए है सबसे पहले अगर आदिवासी भाईयो को किसी सुविधा की जरुरत थी तो वो थी स्वास्थ संबधी सेवाएं। इतने वर्षो से सत्ता मे रहते हुए वर्तमान सांसद नाही कभी किसी आदिवासी भाई-बहनो और बच्चो के स्वास्थ कोई जिम्मेदारी समझी ना कोई कदम उठाया। दुर दराज के क्षेत्र मे कोई सुविधा नही होने से मरीज को खानवेल या सिलवासा लाना पडता था वो भी बिना किसी साधन के जो बहुत की कठीन होता था। नटुभाई पटेल ने जब यह जाना तो सबसे पहले 108 एंबुलंस सुविधा शुरु की और पुरे प्रदेश मे कीसी भी क्षेत्र से मरीज को अस्पताल लाना आसान हो गया। इसके पश्चात एंबुलंस को हर गाव जाने के लिए सडक तक नही थी। पुर्वसांसद ने हर गाव तक सडको का निर्माण किया और कई पुलो का निर्माण किया, घर घर तक पेवर ब्लॉक लगाएं। आज इस जनकल्याणकारी सेवा का लाभ सभी प्रदेशवासीयों को मिल रहा है। खानवेल मे 100 बेड का हास्पीटल, सभी पंचायतो मे प्राथमिक स्वास्थ केंद्र (PHC) बनाएं। वर्तमान सांसद के 6 टर्म मे ऐसी क्या मजबुरी थी की आदिवासी भाईयो की स्वास्थ संबधी मुलभुत जरुरत भी पुरी ना हो सकी।

दुसरी महत्वपुर्ण सुविधा पुर्व सांसद नटुभाई पटेल ने की वो है शिक्षा के क्षेत्र मे. आदीवासी भाई गरीब और अशिक्षीत थे, शिक्षा के अभाव मे रोजगार नही मिलता था और प्रदेश मे कोई सरकारी कोलेज ना होने से दुसरे प्रदेशो मे जाकर पढना काफी महंगा पडता था। पुर्व सांसद ने प्रदेश मे आर्ट, कोमर्स और सायंस का सरकारी कोलेज शुरु किया जिसमे प्रदेश के सभी तबके के विद्यार्थी पढाई कर रहे है। कई स्कुलो का निर्माण, होस्टल का निर्माण, और यहा तक की मेडीकल कोलेज भी प्रदेश मे लेकर आए। ताकी गरीब आदिवासी छात्रो को अपने प्रदेश मे अच्छी शिक्षा मिले सके।

उक्त प्रेस नोट में कहा गया कि जनता पुर्व सांसद नटुभाई पटेल के कार्य को देख चुकी है और वर्तमान सांसद कार्य नही कर पा रहे है यह जानने के बाद जनता खुद इनसे त्यागपत्र मांगती इससे पहले अपनी अयोग्यता को छिपाने के लिए त्यागपत्र देने का नाटक शुरु कर दिया और भोली-भाली आदिवासी जनता के साथ राजनिती खेल बारगला रहे है।

अब उक्त दोनों मामले को देखकर क्या लगता है? एक पक्ष को लगेगा की दूसरा पक्ष गलत है और दूसरे पक्ष को लगेगा की पहला गलत है! लेकिन जनता की नज़र से देखे तो जनता दोनों से सवाल करती रही है जनता ने पूर्व में मोहन डेलकर के राज में चलने वाली गुंडा-गर्दी भी देखी है और नटु पटेल के यहाँ सीबीआई और आयकर के छापे भी देखे है और जनता ने फतेसिंह चोहान पर सख्त कार्यवाही भी देखी है। क्रांति भास्कर ने उक्त सभी खबरों को प्रमुखता से जनता के सामने रखा है क्यों की क्रांति भास्कर जनता के पक्ष में है। सच जानना जनता का अधिकार है जनता जानना चाहती है की नटु पटेल और मोहन डेलकर जैसे नेताओं के पास करोड़ों की संपत्ति कहा से आई? मोहन डेलकर का कहना है की प्रदेश में गरीबी इतनी अधिक है की यहाँ के आदिवासी कुपोषण का शिकार हो रहे है फिर सवाल यह है 6 बार चुनाव जीतने के बाद भी मोहन डेलकर उक्त छोटे से प्रदेश से आदिवासियों की गरीबी और कुपोषण के मामले क्यों नहीं दूर कर पाए, इस वक्त बे 7वी बार सांसद बने है और उनका कहना है की उनकी कोई सुन नहीं रहा है लेकिन जब पहले 6 बार सांसद बने थे तब तो उनकी चलती थी तो फिर आज भी आदिवासी गरीब क्यों? मोहन डेलकर का कहना है की आज वह जनता के लिए कुछ नहीं कर पा रहे है इस लिए वह अपने पद से इस्तीफ़ा दे देंगे। सच तो यह है की जनता आज तक यह नहीं समझ पाई की मोहन डेलकर और नटु पटेल जैसे नेता, जन सेवा करते करते करोड़ों के मालिक कैसे बने?

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DELKAR MOHANBHAI SANJIBHAI

Relation Type Total Income Shown in ITR
self 2017 – 2018 * Rs 5,02,553 ~ 5 Lacs+
2016 – 2017 * Rs 4,97,997 ~ 4 Lacs+
2015 – 2016 * Rs 4,83,757 ~ 4 Lacs+
2014 – 2015 * Rs 4,82,193 ~ 4 Lacs+
2013 – 2014 * Rs 4,84,260 ~ 4 Lacs+
spouse 2017 – 2018 * Rs 1,14,60,230 ~ 1 Crore+
2016 – 2017 * Rs 1,25,43,024 ~ 1 Crore+
2015 – 2016 * Rs 66,57,116 ~ 66 Lacs+
2014 – 2015 * Rs 67,32,924 ~ 67 Lacs+
2013 – 2014 * Rs 60,86,972 ~ 60 Lacs+
huf 2017 – 2018 * Rs 4,82,544 ~ 4 Lacs+
2016 – 2017 * Rs 5,88,152 ~ 5 Lacs+
2015 – 2016 * Rs 4,89,462 ~ 4 Lacs+
2014 – 2015 * Rs 9,01,851 ~ 9 Lacs+
2013 – 2014 * Rs 6,77,625 ~ 6 Lacs+

 

PATEL NATUBHAI GOMANBHAI

Relation Type Total Income Shown in ITR
self 2017 – 2018 * Rs 1,37,10,445 ~ 1 Crore+
2016 – 2017 * Rs 92,58,835 ~ 92 Lacs+
2015 – 2016 * Rs 20,08,478 ~ 20 Lacs+
2014 – 2015 * Rs 15,48,609 ~ 15 Lacs+
2013 – 2014 * Rs 57,60,481 ~ 57 Lacs+
spouse 2017 – 2018 * Rs 16,86,299 ~ 16 Lacs+
2016 – 2017 * Rs 41,33,014 ~ 41 Lacs+
2015 – 2016 * Rs 2,02,13,272 ~ 2 Crore+
2014 – 2015 * Rs 9,74,384 ~ 9 Lacs+
2013 – 2014 * Rs 10,35,306 ~ 10 Lacs+
huf 2017 – 2018 * Rs 5,49,630 ~ 5 Lacs+
2016 – 2017 * Rs 3,20,689 ~ 3 Lacs+
2015 – 2016 * Rs 5,06,915 ~ 5 Lacs+
2014 – 2015 * Rs 3,23,875 ~ 3 Lacs+
2013 – 2014 * Rs 2,97,593 ~ 2 Lacs+

 

मोहन डेलकर और मोहन डेलकर की पत्नी तथा नटु पटेल और नटु पटेल की पत्नी प्रतिवर्ष कितना आयकर टैक्स अदा करते है अब यह भी देख लीजिए, उक्त नेताओं तथा नेताओं की आय में जितनी वृद्धि हुई है क्या उतनी वृद्धि जनता की आय में हुई है? यदि जनता की आय में वृद्धि नहीं हुई तो अपना सारा समय जनसेवा में खर्च करने वाले नेताओं की आय में इतनी वृद्धि कैसे हुई? वैसे आपको जानकार हैरानी होगी की यह आंकड़े तो वह व्हाइट इन्कम के है जिसकी जानकारी उक्त नेताओं ने सरकार को दी है उक्त नेताओं के पास कितना काला-धन है इसकी जानकारी सरकार के पास है या नहीं इसका तो अभी पता नहीं। अब इतना टैक्स देने वाले के पास कितना पैसा होगा, कितनी संपत्ति होगी और क्या इन्हे रोज़गार या नोकरी की चिंता होगी? मोहन डेलकर कह रहे है की उन्हे गरीब आदिवासियों की चिंता है नटु पटेल का भी यही कहना है, तो क्यों ना उन सभी गरीब आदिवासियों को एक ही दिन में गरीब से अमीर बना दिया जाए? यह मुमकिन कैसे होगा? मोहन डेलकर और नटु पटेल अपनी चल-अचल संपत्ति का थोड़ा हिस्सा दानह के गरीबों में बांट दे तो यह नामुमकिन मुमकिन हो सकता है।