प्रदूषण फैलाने वाली डिस्ट्लरियों पर कोई कार्यवाही नहीं, 11 होटलों की बिजली काटी।

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संघ प्रदेश दमण प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के आदेश पर दमण सीफेज रोड पर स्थित कई होटलों की बिजली काटी गई है। यह कार्यवाही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के मानकों की अनुपालना करने तथा प्रदूषण नियंत्रण समिति के मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले होटलों के खिलाफ की गई है। एक साथ कई होटलों की बिजली काटे जाने पर होटल संचालकों में हडकंप मच गया है। होटल संचालक भी सतके में है कि औधोगिक इकाइयों से अधिक प्रदूषण फैलाने में उनका नाम कैसे आ गया और यह चमत्कार कैसे हुआ? वैसे जिन होटलों की बिज़ली काटी गई उनके नाम है, होटल ब्राइटोन, होटल दीपक, होटल न्यू नटराज गेस्ट हाउस, होटल प्रियंका, होटल गुरुकृपा, होटल सॉवेरिंग, होटल सांई अमर इंटरनेशनल, होटल सम्राट, होटल आनंद, होटल द इमरल्ड एवं होटल सन्नी बताए जाते है।

बताया जाता है कि इन होटलों द्वारा बिना ट्रीट किया गया पानी स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज में छोड़े जाने की जानकारी विभाग को मिली थी। कमाल की बात है की विभाग के अधिकारियों को होटलों द्वारा छोड़े जाने वाले गंदे पानी की जानकारी है जबकि कुछ समय पहले डिस्ट्लारियों द्वारा गंदे पानी छोड़े जाने का विडियों सामने आया था उसकी जानकारी नहीं? क्या होटलों पर कार्यवाही का दिखावा कर, पीसीसी के अधिकारी प्रदूषण फैलाने वाले बड़े बड़े उधोगों को डराकर पैसे वसूलने वाले है? यह सवाल इस लिए क्यो की दमण-दीव पीसीसी के कई कर्मचारियों के पास करोड़ों की संपत्ति है संपत्ति के बारे में पहले भी कई बार खबरें प्रकाशित होती रही है, वह संपत्ति कहा से आई, इसकी जांच आज तक किसी ने नहीं की। अब होटलों की बिज़ली काटे जाने से यही लगता है की दमण-दीव प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारी, बड़ी मछ्ली के लिए जाल बुन रहे है ताकि मछ्ली स्वय ही जाल में फंस जाए।

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बताया जाता है की पीसीसी द्वारा होटलों का निरीक्षण किया गया और उनके सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के इंस्टालेंशन, कार्य प्रक्रिया के साथ गंदे पानी को बिना ट्रीट किये स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज में छोड़ा जाना पाया गया। यह अच्छी बात है की पीसीसी के कर्मचारियों ने होटलों का निरक्षण किया, लेकिन क्या पीसीसी के कर्मचारियों ने दमण की डिस्ट्लरियों का निरीक्षण नहीं किया? क्या होटलों का प्रदूषण खेमानी डिस्टलरी और रॉयल डिस्टलरी से अधिक है, या फिर रॉयल और खेमानी के मालिक की ऊंची पहुँच पीसीसी के कर्मचारियों को निरीक्षण करने से रोक रही है? यह सवाल क्यो किया जा रहा है यह जनता भी जानती है ओर अधिकारी भी। वैसे मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि होटलों द्वारा बिना ट्रीट किये स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज में छोड़ा जाना पाया गया, इस पानी का सैंपल लिया गया और रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट के मुताबिक उपरोक्त होटल पीसीसी के मानकों पर खरा नहीं उतरे। जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने विधुत विभाग को 48 घंटे के अंदर ऐसे होटलों की बिजली काटने का आदेश दिए। पीसीसी द्वारा की गई यह कार्यवाही से जहां एक और जताना पीसीसी के अधिकारियों कि प्रशंसा कर रही है वही दूसरी और दमण की जनता पीसीसी के सदस्य सचिव और पीसीसी के कर्मचारियों से यह जानना चाहते है की क्या पीसीसी में टेक्निकल अभियंता है? यदि नहीं है तो जांच कौन करता है रिपोर्ट कौन बनाता है? जनता यह भी जानना चाहती है की होटलों की तर्ज पर पीसीसी के कर्मचारियों ने कितनी इकाइयों का निरक्षण किया, कितनी इकाइयों के नमूने लिए और कितनी इकाइयों की बिज़ली काटी गई? बड़ी बड़ी औधोगिक इकाइयों पर मेहरबानी दिखाने वाले अधिकारी आखिर होटलों के प्रदूषण का ठीकरा फोड़ क्या साबित करना चाहते है? होटलों पर प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारियों द्वारा जो कार्यवाही कि जनता उसके खिलाफ नहीं है लेकिन जनता जानती है कि दमण में प्रदूषण फैलाने वाले बड़े बड़े उधोग अधिकारियों के साथ साठ-गांठ कर कितना प्रदूषण फैला रहे है जनता चाहती है कि बड़े बड़े उधोगों पर भी इसी तरह सख्त कार्यवाही की जाए, इसी तरह उन तमाम प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की बिजली काटी जाए जिस तरह होटलों की बिज़ली काटी गई है।

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प्रदूषण नियंत्रण विभाग एवं विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर इससे पहले भी सवाल उठते रहे है। पिछले कई वर्षों से सी-फेस रोड पर चल रहे इन होटलों की गतिविधियों की जानकारी पीसीसी के अधिकारियों के पास थी? 2-3 साल पहले केंद्र सरकार के आदेश पर सभी होटलों में एसटीपी लगाना अनिवार्य किया गया था और उसकी समय-समय पर मॉनिटरिंग का प्रावधान भी था। तो फिर पीसीसी के कर्मचारी ओर अधिकारी अब तक क्यों दर्शक बने तमाशा देखते रहे? क्या इतने समय तक पीसीसी ने होटल मालिकों से कार्यवाही नहीं करने के लिए वसूली की थी? यदि नहीं तो देरी से संज्ञान लेने वाले अधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए क्यो की नियम तो अधिकारियों ने भी तोड़े है। होटलो पर कार्यवाही हो गई, अब अधिकारियों पर कार्यवाही होगी या नहीं यह वक्त बताएगा।