एक अरब का वन संरक्षक…

भोपाल/उज्जैन. राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा के आला अफसर के बाद अब भारतीय वन सेवा के अधिकारी के यहां अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है. लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार के रोज फिर से बड़ी कार्रवाई करते हुए आईएफएस अधिकारी बी के सिंह के ठिकानों पर छापा मारा जिसमें करीब 100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति का खुलासा किया गया है. इसके ठीक दिन पहले लोकायुक्त पुलिस ने राजधानी में बिजली कंपनी के बाबू के यहां से 40 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा किया था.

लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार की सुबह राजधानी और उज्जैन स्थित वन संरक्षक बीके सिंह के उज्जैन व भोपाल के चूनाभट्टी स्थित निजी आवास पर एक साथ छापा मार कार्रवाई की. यह कार्रवाई देर शाम तक जारी रहीे. इस दौरान लोकायुक्त पुिलस को अधिकारी के पास से 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं.

भागने की कोशिश विफल

लोकायुक्त की टीम ने उज्जैन स्थिति आईएफएस अधिकारी बसंत कुमार के सरकारी आवास में जैसे ही छापा मारा बसंत कुमार पीछे के दरवाजे से भागने की कोशिश करने लगे. उन्होंने अपने साथ 7 लाख रुपए नकद एवं रिवाल्वर भी ले रखी थी.लेकिन छापामार कार्रवाई के दौरान पिछले दरवाजे पर पहले से ही मौजूद लोकायुक्त की टीम ने बसंत कुमार को पकड़ लिया. सूत्रों के अनुसार बीके सिंह ने इस अवैध संपत्ति को अपने परिवार के सदस्यों के नाम कर रखा है, इनमें पत्नी वीणा सिंह, बेटे अभिनव सिंह और सास एवं ससुर शामिल हैं.

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 इन संपत्तियां का पता लगा

भोपाल के होशंगाबाद रोड स्थित मॉल में पार्टनरशिप के अलावा 350 एकड़ का एक फार्महाउस जोनपुर उत्तरप्रदेश में, बुधनी में सास-ससुर के नाम से 75 एकड़ कृषि भूमि, 20 बीघा जमीन भोपाल में, 22 बीघा जमीन,सीहोर में, बनारस में 5 होटल, बनारस में ही एक पेट्रोल पंप, 12 लाख रुपए नकद भोपाल में, 7 लाख रुपए नकद उज्जैन में, 1 किलो सोना मूल्य 30 लाख 60 हजार रुपए, 2 किलो चांदी, 10 लाख रुपए मूल्य के आभूषण, 80 लाख रुपए की एफडी, सहित अन्य संपत्ति से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं.

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खाने के लिए सोने-चांदी के बर्तन

उज्जैन. अय्याशी का आलम यह था कि सोने-चांदी के बर्तनों में खाना खाया जा रहा था वहीं कई एकड़ जमीन के साथ-साथ यह भ्रष्टाचारी 5 होटलों का भी मालिक है. लोकायुक्त को सूचना मिलने के बाद पिछले कई दिनों से उज्जैन संभाग के वन संरक्षक वी.के. सिंह पर निगाह रखी जा रही थी.

शाम तक चली इस कार्रवाई में करीब 70 करोड़ रुपये की सम्पत्ति लोकायुक्त के निगाह में आ चुकी थी जिसमें सात लाख नगद, एक किलो सोना, एक किलो चांदी, चांदी के बर्तन, सैंकड़ों एकड़ जमीन खरीदी के दस्तावेज, करीब 15 लॉकर, लाखों रुपयों की एलआईसी सहित सोने-चांदी, हीरे के जवाहरात, पासपोर्ट, विदेश मुद्रा, रिवाल्वर व कारतूस मिले हैं.1987 बेच का यह अधिकारी सागर, होशंगाबाद, शहडोल, उज्जैन, भोपाल, जहां-जहां भी पदस्थ रहा करोड़ों के वारेन्यारे किए.
बताया जा रहा है कि सबसे पहले लोकायुक्त की टीम भोपाल के कोलार रोड स्थित दो मंजिला निवास पर पहुंची थी उसके एक घंटे बाद उज्जैन निवास पर छापा मारा गया. संभवत: तब तक अधिकारी को छापे की कार्रवाई का अंदेशा हो चुका था और वह रुपयों सहित जमीन के कागजात लेकर निकल जाने की जुगत में था. लोकायुक्त एस.पी. अरूण कुमार मिश्रा ने नवभारत को बताया कि जब हम सुबह इसके सरकारी निवास पर पहुंचे तो यह अधिकारी कुछ रुपया व कागजात लेकर भागने की फिराक में था. इसने पत्नी व ससुर के नाम से सर्वाधिक सम्पत्ति खरीदी है और बनारस में इसका एक पेट्रोलपम्प भी है. इस अधिकारी को 25 साल की नौकरी में वेतन के रूप में 54 लाख रुपये मिले थे जबकि सम्पत्ति करोड़ों का आंकड़ा पार कर गई है.