देश के विकास और सुरक्षा की देख-रेख करने वाले गृह मंत्रालय के बड़े बड़े IAS भी भ्रष्ट!

Kranti Bhaskar - Daman News, Silvassa News, Vapi News and Valsad News | गृह राज्य मंत्री हरिभाई को मिलता है संध प्रदेशों में हुए भ्रष्टाचार का हिस्सा....! image 2

पढिए अगर भ्रष्टाचार करना है तो किस किस को हिस्सा देकर बच सकते है…
हफ्ताखोर नेता, भ्रष्ट अधिकारी और निकम्मी सरकार की यह अजीब कहानी!

वैसे तो भारत एक आजाद देश है लेकिन आजादी के बाद भी लूटखसोट का दौर तो जारी ही है। अधिकतर देखा जाता रहा है की देश के धन का सर्वाधिक दुरुपयोग सरकार वह चंद अधिकारी करते है जिनके सर पर बड़े अधिकारियों का और नेताओं का हाथ होता है, अगर किसी किसी वजह से पकड़े भी जाते है तो वह धन तो सरकार को वापस नहीं मिलता जिनकी डकार वह सालों पहले मार चुके थे!
भ्रष्टाचार का एक ऐसा ही मामला हमारे पास आया, जिसकी छानबीन भी गई मामले में कार्यवाई हेतु प्रशासन को समय समय पर सूचित भी किया गया, मामला कितना बड़ा है इस पर रोशनी डालने से पहले यह जानना जरूरी है की मामले में शामिल कोन कोन है।
एक कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनिय अभियंता के भ्रष्टाचार और घोटाले की शिकायते, स्थानीय नेताओं को की गई, मामले में कार्यावाई के लिए उक्त विभाग के सचिव को सेकड़ों पत्र लिखे गए, लेकिन जब उस पर भी कोई कार्यवाई देखने को नहीं मिली तो, प्रशासक को बताया गया, और प्रशाक भी जब हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे तो गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव को बताया गया, प्रधान मंत्री कार्यालय को सूचित किया गया, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव से फोन पर बात कर के भी पूरे मामले की जानकारी दी गई। 
गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने इस मामले में प्रशासक को जांच कर रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सोंपने के आदेश तो दे दिए, लेकिन इस के बाद भी मामला अभी भी दबा हुआ है, जिसे देख कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है की हमारे देश के बड़े बड़े अधिकारी कितने कार्यशील है।
इसी मामले में संध प्रदेश प्रशासक, विधुत विभाग के सचिव, विकास आयुक्त, तथा अन्य कई अधिकारियों पर सनलिपप्ता के आरोप लगे हुए है, जिनकी जांच प्रशासक अपनी कुर्सी के नीचे दबाकर बैठे है। इसी मामले में सीबीआई के पास भी सेकड़ों शिकायते है लेकिन सीबीआई भी उक्त मामले को क्यों दबाकर बैठी है यह तो सरकार ही जाने!
ज्ञात हो देश एक मात्र गृह मंत्रालय ऐसा है जिसके अधीन बेड़ी बड़ी जांच एजेंसियाँ, खुफिया जांच एजेंसियाँ, और कई गोपनीय विभाग देश के विकास और सुरक्षा के लिए कार्य करते है, लेकिन उसी मंत्रालय के संयुक्त सचिव एक मामूली कार्यपालक अभियंता और सहायक एवं कनिय अभियंता के भ्रष्टाचार पर कार्यवाई नहीं कर सके, यह एक ऐसा सवाल है जो इस पूरे देश की सरकार व प्रशासन के लिए शर्मिंदगी की बात है।
वैसे इस मामले में सूत्रों का कहना है की संध प्रदेश के भ्रष्टाचार में चपरासी से लेकर प्रशासक तक का हिस्सा तय होता है हा यह और बात है की कुछ एक मामले ऐसे भी होते है जिनके भ्रष्टाचार की जानकारी प्रशासक को नहीं होती, लेकिन जिन मामलों की जानकारी प्रशासक को होती है उन मामलों में चाहे जितनी श्कायते सबूत पेश कर लो, उस भ्रष्टाचारी अधिकारी को कुछ नहीं होता जिसका संरक्षण प्रदेश के प्रशासक कर रहे हो!
अब ऐसे अधिकारियों को किस नजर से देखना चाहिए यह तो सरकार व जनता तय करे की देश के धन को लूटने वाले भ्रष्ट अधिकारी किस श्रेणी में आने चाहिए और इनके साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए!
फिलहाल यह मामला अभी भी जांच को तरस रहा है लेकिन अगर इस मामले में सीबीआई जांच होती है तो माममूली अभियंता से लेकर देश के गृह राज्य मंत्री तक हिस्सा पहोचता है इस बात के सबूत सीबीआई को अवश्य मिलेंगे! क्यों की इसी मामले में हुए घोटालों की पूरी जानकारी गृह राज्य मंत्री को भी दी गई थी जिस पर उन्होने ने भी अपनी आखे बंद कर ली!
इस पूरे मामले को देखकर लगता है की अगर भ्रष्टाचार करना है और जांच से बचना है तो हर उस अधिकारी को भ्रष्टाचार की रकम का हिस्सा दे दो जो जांच करवा सकता है फिर कभी जांच ही नहीं होगी, यही सील सिला चला रहे है भ्रष्ट अधिकारी।
अब आगे क्या होगा यह देखने वाली बात है: शेष फिर।

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इस पूरी खोज-बिन से यह सामने आया है कि, संध प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारी अपने अपने विभाग में भ्रष्टाचार जारी रखने व अपने आप को जांच से बचाने के लिए, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिवों तक को अपने भ्रष्टाचार का हिस्सा देकर, अपने आप को भी जांच से बचा लेते है, और बे-फिक्री से भ्रष्टाचार भी करते रहते है…