प्रफुल पटेल के तबादले की अफवाह हफ्तखोर नेता ओर भ्रष्ट अधिकारी के लिए संजीवनी।

वफादारी से बड़ा भय होता है यह इस मामले को देखकर पता चलता है! | Kranti Bhaskar
Praful patel daman

जब से संध प्रदेश में बतौर प्रशासक प्रफुल पटेल आए है तब से ही वे भ्रष्ट अधिकारियों और चौर नेताओं के आँख की किरकिरी बने हुए है। वे पहले ही दिन से अपने काम में लग गए थे ओर उन्होने पहले ही दिन से कड़े अनुशासन को बरकरार रखा और दमण-दीव तथा दादरा नगर हवेली में विकास की झड़ी लगा दी।

अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान उन्होने दबंग लोगो के अतिक्रमण हटाने, औधोगिक इकाइयों से हफ्ताखोरी बंद करने, नेताओं के आपराधिक मामलो को उजागर करने ओर उनपर सख्त कार्यवाही करने का उल्लेखनीय काम किया। उनके सख्त अनुसासन और कठोर कार्यवाही से भ्रष्ट अधिकारियों और हफ्ताखोर नेताओं में दहसत फैल गई ओर बहोत हद तक औधोगिक इकाइयों में हफ्ताखोरी गुंडागर्दी पर अंकुश लग गया, सरकारी विभागों में भी भ्रष्टाचार कम होने लगा। अब ऐसे में प्रशासक के तबादले की अफवाह हफ्ताखोर नेताओं ओर भ्रष्ट अधिकारियों के लिए संजीवनी साबित हुई, प्रशासक प्रफुल पटेल को अब तक तो अपने तबादले की अफवाह के बारे में पता होगा लेकिन उक्त अफवाहों के सहारे हफ्ताखोर नेता ओर भ्रष्ट अधिकारियों ने कितना ओर कैसे लाभ उठाया यह जानकारी शायद प्रशासक प्रफुल पटेल को नहीं।

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दोनों संध प्रदेशों में कई बार प्रशासक प्रफुल पटेल के तबादले की अफवाएँ उड़ती रही। कुछ लोगो ने सोशल मीडिया के जरिए भी कई बार अफवाह फैलाई की दादरा नगर हवेली और दमण-दीव में प्रशासक प्रफुल पटेल का तबादला होने वाला है अभी कुछ समय पहले ही सोशल मीडिया पर एक नई अफवाह भी उडी थी की किरण बेदी आ रही है।
अब सवाल यह उठता है कि इस तरह की अफवाह कौन फैला रहा है और क्यो फैला रहा है? ऐसी अफवाहों से किसका, कैसे ओर क्या फाइदा हो सकता है?

तो इसका एक जवाब यह है की जिन लोगो की हफ्ताखोरी और भ्रष्टाचार की दुकाने बंद हो गई, वे ही ऐसी अफवाह उड़ा कर, फेक्ट्री वालो को डराने की कोशिस कर रहे हो, ताकि उनकी हफ़्ता वसूली बदस्तूर जारी रहे ओर उक्त अफ़वाह के चलते कोई फेक्ट्री मालिक प्रशासक प्रफुल पटेल से शिकायत करने की कोशिस ना करें।

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ऐसा इस लिए क्यो कि ऐसी अफवाहों के बाद हफ्ता देने वालो का भयभीत होना लाज़मी है उनके मन में यह सवाल भी उठता होगा की प्रशासक के जाने के बाद क्या होगा ओर जब स्थानीय नेताओं के साथ ही रहना है तो क्यो ना हफ्ता देकर उक्त हफ्ताखोरों का गुस्सा शांत कर दिया जाए, शायद इसी मनोविज्ञान का फाइदा उठाकर नेता और दबंग लोगो ने हफ़्ता वसूली का एक ऐसा तरीका खोज निकाला, जिससे चोट भी लगे ओर आवाज भी ना निकले और प्रफुल पटेल यही समझते रहे की हफ्ताखोरी और गुंडागर्दी बंद हो गई है।

जिस तरह हफ्ताखोर नेताओं ने तबादले की अफ़वाह का सहारा लिया ठीक उसी तरह भ्रष्ट अधिकारियों ने भी रिश्वत लेने ओर बचे रहने के अजीबो-गरीब तरीके खोज निकाले। भ्रष्ट अधिकारियों ने उन्होने अपने मुह से कुछ नहीं कहा पर ऐसे संकेत देने शुरू किए जिसका मतलब यह निकाला जाने लगा कि प्रफुल पटेल के इशारे पर ही यह सबकुछ हो रहा है ओर उनपर प्रशासक प्रफुल पटेल का आशीर्वाद है। जबकि हकीकत यह है की प्रशासक प्रफुल पटेल को पता ही नहीं है की उनकी पीठ पीछे क्या चल रहा है ओर कैसे अधिकारी उनके नाम ओर रुतबे का सहारा लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे है।

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दोनों संध प्रदेशों की जनता का प्रशासक पर भरोसा है लेकिन लगता है कि जनता का अब तक प्रशासन पर भरोसा दृढ नहीं हुआ। समय रहते प्रशासक को ऐसा महोल बनाना होगा कि जनता प्रशासन पर भी भरोसा करने लगे, अगर वे यह भरोसा नहीं बना पाए तो ये नेता और अधिकारी इसी तरह की अफवाह फैलाकर लोगो को लुटते रहेंगे।