दाबेल में अवैध निर्माण से करोड़ों की किरया वसूली, राजस्व को करोड़ों का चुना।

DAMAN : खेती की जमीन पर बेहतरीन फ़सल उगाने के लिए यदि भारत सरकार, राज्यों में प्रतयोगिता का आयोजन करें तो अवश्य ही दमण-दीव कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रथम पुरस्कार मिलेगा, क्यो कि दमण में खेती कि जमीन पर केवल अनाज़ ही नहीं, बल्कि औधोगिक व कमर्शियल गोदाम, पेट्रोल पंप, बियर बार, रेस्टोरेन्ट और कई छोटे-बड़े कारखानों कि फ़सल भी फल-फूल रही है। संध प्रदेश दमण में ऐसी कई जमीने है जो कागजों पर तो फ़सल उगाने वाली ( खेती ) की जमीने है लेकिन असल में उन ज़मीनों पर औधोगिक व कमर्शियल गोदाम, पेट्रोल पंप, बियर बार, रेस्टोरेन्ट तथा कई छोटे-बड़े कारखाने चल रहे है। वैसे इस पूरे मामले की जानकारी से पहले आप यह जान लीजिए कि जमीन संबन्धित मामलों में तथा खेती कि जमीन का कमर्शियल अथवा औधोगिक उपयोग करने की क्या प्रक्रिया है तथा क्या नियम है और यह काम काज़ किस विभाग के किस अधिकारी के जिम्मे है।

एग्रीकल्चर जमीन पर कई अवैध निर्माण, एक ही बिज़ली मीटर से कई कनेक्सन।

ज्ञात हो कि संध प्रदेश दमण में किसी भी खेती कि जमीन का कमर्शियल तथा औधोगिक उपयोग करने से पहले उस जमीन को एन-ए करवाने का नियम है तथा जमीन को एन-ए करने के लिए राजस्व विभाग शुल्क वसूलती है जिससे सरकार को राजस्व मिलता है। जमीन एन-ए तथा राजस्व इन दोनों मामलो के सभी कामकाज़ जिला समाहर्ता की देखरेख में होता है तथा जिला समाहर्ता के साथ साथ उप समाहर्ता एवं अन्य कई कर्मचारी भी इस विभाग का काम काज करते है। सीधी सीधी भाषा में यह कह सकते है कि समाहर्तालय में वातानुकूलित कुर्सी पर बैठे बड़े बड़े अधिकारियों के हस्ताक्षर बिना, किसी भी खेती कि जमीन का कमर्शियल तथा औधोगिक उपयोग नहीं किया जा सकता। यदि खेती की जमीन को एन-ए किए बिना उस जमीन का औधोगिक तथा कमर्शियल उपयोग किया जाए, तो यह जमीन एन-ए तथा राजस्व विभाग के नियमों का उलंधन करना होगा और साथ ही साथ ऐसा करने पर राजस्व की चोरी का मामला भी बनता है।

कंस्ट्रक्सन पर्मिशन कि जगह दाबेल में पहले (केतन) पर्मिशन चलती थी।

मामला यह है कि दिनांक 19-03-2019 को तत्कालीन समाहर्ता संदीप कुमार को, दमण के दाबेल क्षेत्र में स्थित सर्वे नंबर 491/2, 492/2, 492/3, 493/4, 494/1, 494/2, 495/2, 495/3 कि जमीन को एन-ए किए बिना, जमीन का कमर्शियल तथा औधोगिक उपयोग किए जाने के संबंध में एवं राजस्व चोरी के संबंध में जानकारी दी गई। इस जानकारी के बाद दमण के भूमि विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा उक्त सभी सर्वे नंबर वाली जमीन का सर्वे किया गया, लेकिन सर्वे के बाद, अब तक कोई ठोस कार्यवाही विभाग द्वारा देखने को नहीं मिली। दिनांक 30-04-2019 को पुनः उक्त सर्वे नंबर वाली जमीन के मामले में समाहर्ता को जानकारी दी गई कि उक्त जमीन में दर्जनों कमर्शियल तथा औधोगिक गोदाम और कार्यालय है और उन सभी कमर्शियल तथा औधोगिक गोदामों एवं कार्यालयों में विधुत विभाग के एक ही मीटर ( कनेकसन ) द्वारा विधुत की सप्लाई की जा रही है जो की नियमों के वीरुध है।

गुजरात सरकार ऐसे मामलों में कई बार जमीन मालिक पर भारी जुर्माना लगा चुकी है।

इसके अलावे बताया जाता है कि उक्त सभी सर्वे नंबर पर बने, कमर्शियल तथा औधोगिक गोदामों के निर्माण हेतु भी जमीन मालिक द्वारा प्रशासन एवं संबन्धित विभाग से कोई अनुमति नहीं ली। ना एन-ए आर्डर है, ना निर्माण अनुमति है। फिर भी जमीन मालिक बेधड़क होकर गोदाम और कार्यालयों का अवैध निर्माण कर, सालों से प्रतिमाह लाखों का किराया वसूल रहा है। शायद जमीन मालिक को भूमि विभाग के अधिकारियों की कामचोरी और भ्रष्टनिती पर कुछ ज्यादा ही भी भरोसा है या फिर नियमों को धत्ता बताने वाले जमीन मालिक ने उक्त मामले से संबन्धित सभी विभागीय अधिकारियों को पहले ही मेनेज कर लिया है?

  • किस खेती कि जमीन पर बड़ी बड़ी इमरते, बड़े बड़े औधोगिक कारखाने, बार एण्ड रेस्टोरेन्ट, पेट्रोल पम्प, बड़े बड़े गोदाम देखकर लगता है कि संध प्रदेश दमण के भूमि ओर राजस्व विभाग के अधिकारियों को, सरकारी तिजोरी कि कोई परवाह नहीं उन्हे तो सिर्फ अपनी अपनी ऐशगाह आबाद करने से मतलब है।
  • खेती की किस जमीन पर किसका ओधोगिक और कमर्शियल गोदाम है इसकी पूरी जानकारी होने के बाद भी यदि जिला समाहर्ता, उप समाहर्ता, मामलतदार और तलाटी कार्यवाई नहीं करें और सरकारी तिजोरी को लुटता देखते रहे तो इसका एक ही मतलब है कि सरकार को चुना लगाने में सब शामिल है।
  • उप समाहर्ता तथा मामलतदार और तलाटी जैसे अधिकारी चंद पैसों के लिए सरकार को चुना लगाने वाले के हाथो अपना ईमान बेच अपनी ऐशगाह आबाद कर, अपने परिवार के लिए सुख खरीदते है?
  • तलाटी की संपत्ति का दौरा कर के देखले प्रशासक महोदय, सब पता चल जाएगा, किसने कितना खाया!

अब सवाल उठता है कि जमीन एन-ए, राजस्व चोरी और विधुत विभाग के नियमों को धत्ता बताने वाले पर, नियमानुसार कार्यवाही क्यो नहीं की जा रही है, कही सर्वे करने वाले अधिकारियों ने समाहर्ता को गलत तथा फर्जी सर्वे रिपोर्ट तो नहीं दी, कही सर्वे करने वाले अधिकारियों ने कमर्शियल तथा औधोगिक गोदामों को कागजों में सर्वे रिपोर्ट में फ़सल तो करार नहीं दे दिया, कहीं सर्वे करने वाले अधिकारियों ने जमीन मालिक से रिश्वत तो नहीं ली? या फिर नीचे से लेकर ऊपर तक सब मिले हुए है?

जमीन एन-ए विभाग, राजस्व विभाग, वैट विभाग इन सभी का प्रभार चार्मी पारेख के पास।

उक्त सभी सर्वे नंबर पर स्थित कमर्शियल तथा औधोगिक गोदामों से जमीन मालिक प्रतिमाह लाखों रुपये का किराया वसूलता है। तो कही ऐसा तो नहीं कि जमीन मालिक ने अधिकारियों को भी किराए का हिस्सा बांट दिया हो? कार्यवाही में देरी का मतलब है सरकारी तिजोरी को नुकसान, अधिकारी कार्यवाही करने में जितना अधिक विलंब करेंगे, भारत सरकार को उतना अधिक नुकसान होगा। इस लिए समाहर्ता महोदय द्वारा समय पर मामले में कार्यवाही ना करने पर, अब प्रशासक प्रफुल पटेल को इस मामले में ध्यान देने की जरूरत है और उक्त सर्वे नंबर पर खेती की जमीन में बने सभी अवैध निर्माण को धव्स्त कर, यह पता लगाने की जरूरत है कि दमण में और ऐसी कितनी खेती की जमीने है जिनका कमर्शियल तथा औधोगिक उपयोग होने की जानकारी होने के बाद भी समाहर्तालय में बैठे संबन्धित विभाग के अधिकारी, सरकारी तिजोरी को चुना लगाने वालों का साथ देकर, अपने अपने हिस्से की चांदी काट रहे है। प्रशासक महोदय यदि इस विषय में जांच की शुरुआत करते है तो दमण में करोड़ों रुपये की राजस्व चोरी के मामले सामने आ सकते है और समाहर्तालय में बैठे कई अधिकारी भी निलंबित हो सकते है।

दाबेल में साई ट्रांसपोर्ट सर्विस के नाम पर चलने वाला पेट्रोल पंप भी इसी जमीन मालिक का है, जमीन मालिक जब जमीन एन-ए किए बिना सालों से राजस्व चोरी कर रहा है तो पेट्रोल बेच कर कितनी टैक्स चोरी की होगी, दाबेल पंचायत द्वारा इस पेट्रोल पंप को प्रतिमाह पेट्रोल के लिए कितने रुपए दिए गए यदि इसकी बारीकी से जांच की जाए पेट्रोल पंप मालिक और दाबेल पंचायत दोनों का बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।

आने वाले अंकों में।

खेती कि किस जमीन पर इमरेते बनी है, किस जमीन पर कारखाने चल रहे है ओर किस जमीन पर बार एण्ड रेस्टोरेन्ट चल रहे है ओर यह सब जारी रखने के लिए ओर कोई कार्यवाही नहीं करने के लिए किस अधिकारी ने कितनी रिश्वत ली होगी? इस पर एक खास ख़बर पढिए क्रांति भास्कर के आने वाले अंकों में।

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