रॉयल डिस्टलरी और खेमानी डिस्टलरी को मिला क्लोज़र, अब वेलनोन पोलिएस्टर लिमिटेड की बारी…

Khemani
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आखिरकार क्रांति भास्कर की ख़बरों पर संज्ञान ले ही लिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति ने…

संध प्रदेश दमन में स्थित रॉयल डिस्टलरी और खेमानी डिस्टलरी के पास वर्ष 2010 से पीसीसी का कनसंट नहीं है, और दोनों इकाइयां पीसीसी के कनसंट के बिना बे-धडक शराब बना रही है, इस मामले में भूचाल न्यूज नेटवर्क तथा क्रांति भास्कर द्वारा कई खुलासे किए गए, लेकिन प्रशासक आशीष कुन्द्रा और अध्यक्ष संदीप कुमार की खेमानी से आशकी शबाब पर दिखी। जब इस मामले में दमन-दीव प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव देबेन्द्र दलाई ने यह सवम स्वीकार कर लिया की पाँच साल से रॉयल और खेमानी के पास पीसीसी का कनसंट नहीं है और प्रशासक आशीष कुंदरा को इस मामले में पूरी जानकारी है, तो क्रांति भास्कर ने इस मामले की जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति को दी, और उन्हे बताया की यहाँ पीसीसी का कानून बड़े वाजबीय दामों पर नीलाम हो रहा है, दमन-दीव पीसीसी के सदस्य सचिव की कुर्सी पर बैठने वाले अधिकारी पिछले पाँच वर्षों से सदस्य सचिव की कुर्सी गरम करते रहे और विकास आयुक्त के पास पीसीसी के चेयरमेन का प्रभार होने के कारण, अनियमितता फैलाने वाली इकाइयां मौज उड़ती रही।

इस मामले में भी क्रांति भास्कर की खबर पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति ने लिया था संज्ञा…  

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तब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति के कान खड़े हुए और क्रांति भास्कर की ख़बरों पर संज्ञान लेते हुए, दमन-दीव पीसीसी के सदस्य सचिव को फटकार लगाकर तत्काल कार्यवाई करने का निर्देश दिया। इस से पहले भी क्रांति भास्कर पर्यावरण मामलों में कई खुलासे करता रहा है, दमन-दीव व दानह पीसीसी के तत्कालीन सदस्य सचिव से पीसीसी का कार्यभार वापस लेने के लिए भी क्रांति भास्कर ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति को बताया की दमन-दीव पीसीसी के सदस्य सचिव की कुर्सी पर बैठने वाले पालनीकांत उक्त कुर्सी के योग्य नहीं है तथा पालनीकांत उप-वन संरक्षक है जबकि पीसीसी के नोटिफिकेशन के अनुसार सदस्य सचिव पर पर केवल वन संरक्षक की नियुक्ति ही हो सकती है, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उस वक्त भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति ने इस मामले पर कार्यवाई कर 15 दिनों के भीरत संदीप कुमार से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति को रिपोर्ट देने के बजाय पीसीसी के अध्यक्ष संदीप कुमार ने उप-वन संरक्षक पलनीकांत से पीसीसी का प्रभार लेकर वन संरक्षक देबेन्द्र दलाई को दे दिया। लेकिन यह मामला तो अभी भी लंबित है की पीसीसी के नोटिफिकेशन की अवमाना कर के उप-वन संरक्षक पलनीकांत को पीसीसी का सदस्य सचिव बनाया ही क्यों गया, और इस मामले में किस किस अधिकारी से उक्त नोटिफिकेशन की अवमाना हुई है।

अब दमन प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव देबेन्द्र दलाई और उनकी खास साथी भूमिका, दमन-दीव दानह की कंपनियों से पीसीसी कनसंट रिन्यूयल के नाम पर कितने कितने लाख की उगरानी कर रही है इस का खुलासा भी जल्द करेगी, भूचाल न्यूज नेटवर्क।

ना मिलेगा, कनसंट और ना चलेगी प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियां…

बताया जाता है की केंद्रीय प्रदूषण समिति के कुछ नियम ऐसे है जिनका पालन करे बिना खेमानी डिस्टलरी और रॉयल डिस्टलरी चल ही नहीं सकती, और नहीं उन नियमों के पालन के बिना उक्त दोनों डिस्टलरीयों को पीसीसी का कनसंट मिल सकता है। और यह भी बताया जाता है की अगर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति के नियमों का पालन नहीं किया गया तो खेमानी और रॉयल डिस्टलरी को कनसंट मिलेगा ही नहीं, अब आगे क्या होगा यह देखने वाली बात है, लेकिन इस मामले में सभी नियमों के साथ एक पूरी रिपोर्ट इस सोमवार के क्रांति भास्कर में आप पढ़ सकते है…. शेष फिर। कभी अपने घर पर बुला था, आज इसी के घर जाकर दे आए क्लोज़र…