दानह का करोड़पति आदिवासी नेता!

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Silvassa congress Mohan Delker

संध प्रदेश दादरा नगर हवेली के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर दानह कांग्रेस नेता मोहन डेलकर की चुप्पी, दानह प्रशासक प्रफुल पटेल के नेतृत्व में काम करने वाले अधिकारियों को ईमानदारी का सर्टिफिकेट समझा जाए या नहीं इस सवाल का जवाब दानह कांग्रेस नेता मोहन डेलकर को ही देना चाहिए।

वैसे तो संध प्रदेश दानह में भाजपा के सांसद है, नगर पालिका पर भी इस वक्त भाजपा का ही शासन है और प्रशासक पद भी भाजपा के नेता को नियुक्त किया गया है। जिला पंचायत अवश्य अब तक कांग्रेस के कब्जे में है, लेकिन इसके बाद भी भाजपा का सांसद होने के कारण तथा प्रशासक के पद पर भाजपा नेता नियुक्त होने के कारण, एक तरह से दानह कांग्रेस को जनता विरोध पक्ष के रूप में ही देखती है और जनता दानह कांग्रेस एवं दानह कांग्रेस नेता मोहन डेलकर से यह उम्मीद भी करती है की दानह कांग्रेस एवं दानह कांग्रेस के नेता मोहन डेलकर उन तमाम मामलों में प्रशासन के सामने आवाज बुलंद करेगी, जो जनता के विकास, व्यवस्था और केंद्र से आने वाली विकास राशि से जुड़े हो।

  • दानह कांग्रेस की चुप्पी, दानह प्रशासन को ईमानदारी का सर्टिफिकेट!

बात चाहे अनियमितताओं की हो, भ्रष्टाचार की हो, विकास राशि के दुरुपयोग की हो या अफसरशाही की हो लगभग सभी मामलों में भाजपा के सत्ता में होने के कारण जनता की ऊमीद विरोध पक्ष से रहती है की यदि सत्ता पक्ष एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की अनियमितता तथा भ्रष्टाचार किया गया तो विरोध पक्ष इस मामले में जनता के हकों की रक्षा भी करेगा और जनता के विकास हेतु आई विकास राशि का दुरुपयोग होने पर प्रशसान एवं सत्ता पक्ष के सामने आवाज बुलंद भी करेगा।

  • यह कैसे राजनीति है क्या जनता को जबाव मिलेगा?  
  • मोहन डेलकर की चुप्पी से कांग्रेस की रीढ़ कमजोर, यदि कांग्रेस की रीढ़ कमजोर तो खामियाजा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी उठाना पड़ेगा!
  • कांग्रेस की आला कमान एवं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दानह कांग्रेस अध्यक्ष से, जन हित में कांग्रेस द्वारा किए गए कार्यों एवं लिए गए फ़ैसलों का मांगे ब्योरा।
  • जब कांग्रेस नेता मोहन डेलकर कांग्रेस में शामिल हुए थे तब उनकी एवं उनके परिवार की संपत्ति कितनी थी और इस वक्त कितनी है, इस पर भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को जानकारी हासिल करनी चाहिए!
  • यदि इसका पता लगा लिया तो हो सकता है कि, 2014 में हुए दानह लोक सभा चुनाव में हुई हार का भी अवश्य पता लग जाए!

लेकिन बड़े ताज्जुब की बात है की दानह कांग्रेस मोहन डेलकर को दानह के प्रशासनिक अधिकारियों का ना ही भ्रष्टाचार दिखाई देता है ना अनियमितताएँ और ना ही विकास राशि का दुरुपयोग, यदि पिछले लम्बे समय से दानह कांग्रेस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियों का आंकलन किया जाए तो ऐसा प्रतीत होता है की दानह में इस वक्त प्रशासनिक विभागों में काम करने वाले, सभी प्रशासनिक अधिकारी अचानक से ईमानदार हो गए हो और प्रशासनिक विभागो में होने वाली अनियमितताओं का अंत हो गया हो, अब जनता इस शंसय में है की आखिर कांग्रेस के नेता मोहन डेलकर यह कैसी राजनीति कर रहे है और किस कारण दानह प्रशासनिक विभागो में हो रहे भ्रष्टाचार और अनियंत्ताओं पर चुप्पी साधे हुए है इसका कारण क्या है यह तो अब कांग्रेस की आला कमान और कांग्रेस के मुख्या श्री राहुल गांधी को ही पता लगाना चाहिए, क्यो की दानह कांग्रेस के नेता मोहन डेलकर की चुप्पी कही ना कही कांग्रेस की रीढ़ कमजोर करने का काम कर रही है और यदि कांग्रेस की रीढ़ कमजोर होती है तो उसका खामियाजा कही ना कही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी उठाना पड़ेगा, इस लिए यह और भी आवश्यक हो जाता है की कांग्रेस की आला कमान, दानह कांग्रेस अध्यक्ष से, दानह कांग्रेस द्वारा जन हित में किए गए कार्यों एवं लिए गए फ़ैसलों का ब्योरा मांगे।

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इसके अलावे कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी इस बात का पता भी लगाए की किस कारण दानह कांग्रेस नेता मोहन डेलकर एक लंबे समय से कांग्रेस के लेटर पर प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के बजाए भूतपूर्व सांसद के लेटर पेड़ पर प्रेस विज्ञप्ति जारी रक रहे है।

दानह कांग्रेस के नेता मोहन डेलकर द्वारा भूतपूर्व सांसद के लेटर-पेड़ पर प्रेस विज्ञप्तियाँ जारी होने पर जनता में यह चर्चा और सवाल है कि क्या संध प्रदेश दादरा नगर हवेली के कांग्रेस नेता मोहन डेलकर को कांग्रेस की तरफ से शायद कोई विशेष छूट मिली हुई है या दमन-दीव कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल की भांति दानह कांग्रेस नेता मोहन डेलकर भी कांग्रेस की आला कमान की आंखो में धूल झोंक अपनी ऐशगाह आबाद रखने की राजनीति में लगे हुए है।

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विशेष छूट की बात इस लिए की जा रही है क्यो की पिछले लम्बे समय से देखा गया की जब कभी दादरा नगर हवेली प्रशासन तथा प्रशासक प्रफुल पटेल के नेतृत्व में काम करने वाली प्रशासन की उपलब्धियों को गिनाना हो या उन उपलब्धियों की तारीफ करनी हो तो अचानक मोहन डेलकर कांग्रेस का चोला उतार, भूतपूर्व सांसद का चोला पहन जनता के सामने आ जाते है और जब भी कांग्रेस के किसी नेता की पुण्यतिथि या अन्य कोई कांग्रेस का विशेष कार्यक्रम हो तब वह कांग्रेस का चोला पहन जनता के सामने आ जाते है।

दल बदलने के मामले तो जनता ने बहोत देखे है दल बदलू नेता भी बहोत देखे है लेकिन चोला-बदल नेता पहली बार दिखाई दे रहा है जो कभी कांग्रेस के लेटर पर प्रेस-नोट जारी करता है तो कभी भूतपूर्व सांसद के लेटर पर, यह समझमे नहीं आता कि, क्या मोहन डेलकर को कांग्रेस का चोला पहन कर प्रशासनिक उपलब्धियों की तारीफ करने में शर्म आती है या कांग्रेस की आला कमान इस बात की इजाजत नहीं देती या कोई और बात है।

  • यदि इन सभी मामलों में कांग्रेस की आला कमान तथा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अच्छी तरह पड़ताल कराए तो हो सकता है कि, 2014 में हुए दानह लोक सभा चुनाव में कांग्रेस की हुई हार का भी अवश्य पता लग जाए!
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साथ ही साथ यदि कांग्रेस आला कमान इस बात का ब्योरा भी अकत्रित की करे की जब कांग्रेस नेता मोहन डेलकर कांग्रेस में शामिल हुए थे तब उनकी एवं उनके परिवार की संपत्ति कितनी थी और इस वक्त कितनी है, यदि कांग्रेस की आला कमान यह ब्योरा जमा कर ले तो अवश्य उसे दानह में 2014 में हुए लोक सभा चुनाव में हुई हार का भी अवश्य पता लग जाएगा।

  • लाइफस्टाइल करोडपतियों की और नेता आदिवासियों के!

वैसे क्रांति भास्कर को दानह नेता मोहन डेलकर एवं मोहन डेलकर के परिवार की संपत्ति की जो जानकारी मिली है वह जनता के लिए होश उड़ा देने वाली है, दानह कांग्रेस के नेता मोहन डेलकर अपने आप को आदिवासी का नेता बताते है, आम तौर पर आदिवासी शब्द आते ही हमारे मन में गरीबी और बे-बसी की एक अजीब सी तस्वीर सामने आ जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है क्यो की मोहन डेलकर की अमीरी के सामने बड़े बड़े उधोपति शायद अपने आप को बोना समझे। कितनी जमीन है कितनी नगदी और गोल्ड इसका खुलासा चंद शब्दो में करना तो काफी मुश्किल है फिर भी यदि आप विस्तार में जानकारी हांसील करना चाहते है तो अवश्य इस मामले में वर्ष 2014 को लोक सभा चुवान में मोहन डेलकर द्वारा जारी एफेडेफ़िट को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर देख सकते है।

दानह कांग्रेस नेता मोहन डेलकर एवं मोहन डेलकर के परिवार की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा देखने के लिए यहां क्लिक करें।  

वैसे संपत्ति के मामले तथा नगदी एवं गोल्ड के मामले में इस नेता का कोई जवाब नहीं, सीधी सीधी भाषा में इन्हे करोड़पति आदिवासी नेता कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा, लेकिन यदि मोहन डेलकर की जीवन जीवनी का आंकलन किया जाए तो पता चलेगा की कोई बड़ा उधोगपति भी इस प्रकार का जीवन जीने की कल्पना नहीं कर सकता जैसे की यह नेता करता है, कितने बॉडी गार्ड है और कितनी निजी सचिव यह तो जनता को मालूम ही है लेकिन जनता की सेवा के नाम पर इस नेता ने अबतक कितनी संपत्ति जमा की है यह जनता सव्य मालूम कर ले उन्हे भी उनके भविष्य का अंदाजा हो जाएगा। शेष फिर।