सचिवालय की लिफ्ट महीनों से बंद, पेन्सन के लिए बुढ़ापे में तीसरी मंजिल चढ़ाया जाता है!

सचिवालय की लिफ्ट महीनों से बंद, पेन्सन के लिए बुढ़ापे में तीसरी मंजिल चढ़ाया जाता है! | Kranti Bhaskar
Silvassa Sachivalay

संध प्रदेश दादरा नगर हवेली में किसी प्रकार के सरकारी काम-काज हेतु जनता कितने चक्कर काटती होगी इसका अंदाजा इस मामले को देखकर लगाया जा सकता है। मामला है रिटायर हुए कर्मचारियो तथा अधिकारियों का।

दानह सचिवालय में पेन्सन विभाग, सचिवालय की आखरी मंजिल यानि कि, तीसरी मंजिल पर बताया जाता है। दानह के सरकारी विभागों में कर्मचारियों तथा अधिकारियों ने अपनी सफल सेवा तो दे दी, लेकिन किसे पता था की रिटायर होने के बाद उन्हे भी वही सब झेलना होगा जो उनके दौर में जनता झेलती आई, सरकारी विभागो के चक्कर तक तो फिर भी बात ठीक थी, लेकिन अब तो हही हो गई बुढ़ापे में चक्कर के साथ साथ तीसरी मंजिल तक चढ़ने और उतरने का काम शायद पेन्सन के साथ बोनस में दे दिया गया है।

वैसे तो दानह सचिवालय में तीसरी मंजिल पर जाने हेतु लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध है लेकिन लगता है उस सुविधा पर भी लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर एस एस भोया सेंध लगाकर बैठे है, पिछली बार सचिवालय की लिफ्ट कब चली थी यह तो पता नहीं, लेकिन इस मामले की जानकारी देते हुए पूर्व में क्रांति भास्कर द्वारा तत्कालीन विकास आयुक्त उमेश कुमार त्यागी से यह आग्रह किया था की कृप्या पेन्सन जैसे विभाग को तीसरी मंजिल से बदलकर नीचे प्रथम मंजिल पर स्थापित कर दीजिए, अथवा पेन्सन के लिए आने वाले वृद्ध रिटायर कर्मचारियों के लिए बंद पड़ी लिफ्ट चालू करवा दीजिए।

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त्यागी जी ने अपने दफ्तर तो खूब बदले, लेकिन इस मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया। आज भी दानह के रिटायर कर्मचारी तीसरी मंजिल तक पैदल जाने को मजबूर है फिर चाहे उनका स्त्वास्थ्य इसकी अनुमति दे या ना दे।

इस मामले की जानकारी के बाद, अब एस एस यादव इस मामले में क्या संज्ञान लेते है यह तो समय ही बताएगा, लेकिन लेकिन इस मामले को देखकर श्री एस एस यादव को अब तो समझ जाना चाहिए की लोक निर्माण विभाग के अभियनता भोया कितने कर्मठ और काबिल है।

  • जरा इस मामले पर भी ध्यान दे और देखे की कैसे अपने लिए चंद घंटो में सचिवालय के कई दफ्तरो को उलट कर रख दिया, लेकिन जब बात जनता की आती है तो महीनों फाइले चलाई जाती है।  
  • एक ही दिन में कितने कार्यालय बदले गए, जे-बी सिह, त्यागी जी के कार्यालय में, तो त्यागी जी रेड्डी जी के कार्यालय में, तो रेड्डी जी पीसीसी के कार्यालय में!
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जब दानह प्रशासक का प्रभार प्रफुल पटेल के पास नहीं था, तब दानह के विकास आयुक्त कार्यालय में उमेश कुमार त्यागी बैठते थे। लेकिन प्रफुल पटेल को जब दानह प्रशासक का प्रभार मिला तब प्रफुल पटेल ने श्री जे-बी सिंह को सलाहकार बनाया, दमन से जिस दिन जे-बी सिंह दानह आए उसी दिन उमेश कुमार त्यागी को विकास आयुक्त कार्यालय खाली करना पड़ा, तब उमेश कुमार त्यागी ने अपना कार्यालय वित्त सचिव कार्यालय में बनाया, लेकिन जब एस एस यादव दानह प्रशासक के सलाहकार बने, तो जे-बी सिंह को विकास आयुक्त कार्यालय खाली करना पड़ा, फिर क्या जे-बी सिंह ने वित्त सचिव कार्यालय को अपना कार्यालय बनाया तो उमेश कुमार त्यागी नए कार्यालय की खोज में मुख्य वन संरक्षक के कार्यालय पहुचे और मुख्य वन संरक्षक के कार्यालय को अपना कार्यालय बनाया, इसके बाद मुख्य वन संरक्षक ओ-वी आर रेड्डी को अपने लिए नया कार्यालय खोजना पड़ा, अंत्त: ओ-वी-आर रेड्डी ने अपना कार्यालय सचिवालय की प्रथम मंजिल पर प्रदूषण नियंत्रण समिति के कार्यालय को अपना कार्यालय बनाया।

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जब एक दिन में बड़े बड़े आई-ए-एस अधिकारी अपनी सुविधा के लिए इतने कार्यालय बदल सकते है तो क्या एक दिन में पेन्सन विभाग तीसरी मंजिल से पहली मंजिल पर नहीं ला सकते? इस मामले के साथ साथ इस सवाल का जवाब भी तभी मिलेगा जब इस मामले में कोई अधिकारी तत्काल कार्यवाही करें।