चौदह वर्षों से सोते रहे दमन-दीव व दानह के सभी प्रशासक…

संध प्रदेश दमन-दीव व दानह में अब तक अपनी सेवा देने वाले प्रशासकों की कार्यप्रणाली का यह सच जान कर शायद जनता को फिर से वह दिन याद आ जाए जब वह फ़िरंगियों की त्रासदी झेल अपने भविष्य पर सोच रही थी। कहां जाता है राजा और प्रजा का रिश्ता और विश्वास दोनों केवल और केवल राजा के हाथों में होता है क्यों की प्रजा तो केवल अपना वक्तव्य रखने का हक रखती है और राजा उस वक्तव्य का पालन करे या ना करे यह तो राजा पर ही निर्भर करता है। वैसे तो यहां की जनता ने उस दिन खूब खुशिया मनाई थी जिस दिन उन्हे फिरंगी शासन और हुकूमत से आजादी मिली, लेकिन विडंबना है की आज जनता पुनः अपने आप को उन बेड़ियों में केद समझती है जिनकी चाबी चंद अफसरशाहों के पास है।

ऐसा नहीं है की जनता को भारत सरकार ने कोई हक ही नहीं दिया जनता के पास सबसे बड़ा अधिकार है अपनी बात सरकार और प्रशासन के सामने रखने का प्रशासन की कारगुजारियों का खुल कर विरोध करने का, लेकिन सरकार ने एक हक उन अफसरशाहों को भी दे रखा है और वह है जनता की मांग और बात को दरकिनार करने का। क्रांति भास्कर के पास कुछ ऐसे दस्तावेज हाथ लगे है जिनका सच कुछ ऐसा ही है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय से जानकारी मिली तो पता चला की यहां तो पिछले 14-वर्षों से प्रशासक का वनवास अभी तक पूरा ही नहीं हुआ, उक्त दस्तावेजों को देखकर तथा गृह मंत्रालय से मिली जानकारी को देखकर लगता है की दोनों संध प्रदेशों में जिस प्रकार की भूमिका अब तक यहां के प्रशासक निभाते रहे है वह सवालों के घेरे में भी है और लोकतंत्र पर एक करारा तमाचा भी है।

ये भी पढ़ें-  सूखा पटेल भाजपा के नेता है या कांग्रेस के ?

तो पहले आप को यह बता देते है की आखिर गृह मंत्रालय भारत सरकार से दोनों संध प्रदेशों के बारे में पूछा क्या गया। तो मामला यह है की दोनों संध प्रदेशों में हो रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के संबंध में क्रांति भास्कर द्वारा गृह मंत्रालय भारत सरकार से पूछा की, गृह मंत्रालय में, दमन-दीव व दादरा नगर हवेली के सरकारी विभागों, अधिकारियों, संस्थाओं तथा कंपनियों के संबंध में जनवरी 2000 से अगस्त 2014 तक, जांच हेतु लंबित मामलों की जानकारी उपलब्ध कराएं।

इस मामले में गृह मंत्रालय ने जवाब दिया की, गृह मंत्रालय की शाखा यू-टी-एस-1 के अभिलेखों के अनुसार अब तक कुल 13 शिकायते/मामले दमन-दीव व दादरा नगर हवेली के शिकायतकर्ताओं द्वारा जांच हेतु प्राप्त हुए है, जो कि, दमन-दीव व दादरा नगर हवेली के प्रशासन को विषय पर टिप्पणी हेतु प्रेषित किए गए है। लेकिन संबंधित टिप्पणियाँ अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इस जवाब के बाद अब कोई दो राय नहीं की संध प्रदेशों में अब तक प्रशासकों की भूमिका क्या रही है! इस जावाब से यह साफ पता चलता है की जब तक गृह मंत्रालय को, प्रशासक द्वारा टिप्पणियाँ प्राप्त नहीं होगी, तब तक गृह मंत्रालय आगे की कार्यवाई नहीं कर पाएगी। इसका पूरा पूरा फाइदा उठाया है अब तक के प्रशासकों ने, नहीं इस बात से इंकार किया जा सकता है नहीं इस बात पर अब प्रशासक अपनी कोई सफाई पेश कर सकते है। क्यों की जब गृह मंत्रालय ने यह साफ कर दिया की प्रशासकों ने अभी तक कोई टिप्पणियाँ नहीं भेजी है तो अब इस मामले में जिम्मेवार रहे प्रशासक अब अपना क्या पक्ष रखेंगे यह भी सोचने वाली बात है।

गृह मंत्रालय से मिला जवाब तो खुली कई प्रशासकों की पोल…

जनता चाहे जितनी शिकायते करें, गृह मंत्रालय उन शिकायतों को प्रशासक के पास ही भेजता है…

प्रशासक से टिप्पणी प्राप्त किए बिना गृह मंत्रालय नहीं करता आगे की कार्यवाई…

गृह मंत्रालय में कार्यवाई हेतु कई मामले प्रशासक के पास लंबित…

गृह मंत्रालय को कार्यवाई शुरू करने के लिए प्रशासक की टिप्पणी का इंतजार…

किन मामलों में टिप्पणी भेजने में विलंब कर रहे है प्रशासक…

वर्ष 2000 से प्रशासक के टिप्पणी की राह देख रहा गृह मंत्रालय।

हालांकि इस मामले में गृह मंत्रालय ने अब तक यह नहीं बताया है कि, यह 13 मामले किस विभाग, अधिकारी, सस्थान, तथा कंपनी के वीरुध है, या किस नेता के वीरुध है, जाहिर सी बात है की अगर इन 13 मामलों में गृह मंत्रालय को संध प्रदेश से जवाब तथा टिप्पणी अभी तक नहीं मिली तो जरूर इन मामलों में कोई बड़ी माया और रसुखदार होंगे, लेकिन वह कोन है जिनके बारे में अब तक किसी प्रशासक ने कोई टिप्पणी नहीं की इस मामले में भी क्रांति भास्कर टिम ने गृह मंत्रालय से जवाब माँगा है तथा उनके नामों के साथ साथ उनके कारनामों की लिस्ट भी मांगी है, उक्त जानकारी प्राप्त होने के बाद जल्द उक्त मामले में कुछ नए खुलासे संभव है।

ये भी पढ़ें-  कंपनियों से हफ्ता वसूली मामले में सिलवासा पुलिस ने किया तीन को गिरफ्तार

 

इस मामले के खुलासे के बाद अब गृह मंत्रालय को भी चाहिए की दोनों संध प्रदेशों से गृह मंत्रालय में की गई शिकायतों की फाइलों को खंगाले और अब तक मामलों में ढील देने वाले संबंधित प्रशासकों पर कार्यवाई करें।

ये भी पढ़ें-  सरेआम जनता को बेइज्जत करते रहे हैं DNH-DD के नौकरशाह।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चौकाने वाली बात यह है की दोनों संध प्रदेशों के प्रशासक के पास मुख्य सतर्कता अधिकारी का पद होता है, तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी होने के नाते केंद्रीय सतर्कता आयोग के नियमानुसार उनकी प्रथम प्राथमिका भ्रष्टाचार, अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों का निपटारा करना होता है, लेकिन अब तक ऐसा नहीं देखा गया, गृह मंत्रालय भी अब तक इसी लिहाज से प्रशासक को सभी शिकायते प्रेषित करता रहा है क्यों की प्रशासक के पास मुख्य सतर्कता अधिकारी का पद है, लेकिन अगर सवाल मुख्य सतर्कता अधिकारी की कार्यप्रणाली पर उठे तो शायद इस मामले में अब केंद्रीय सतर्कता आयोग को दमन-दीव व दादरा नगर हवेली के मुख्य सतर्कता अधिकारी पर सख्त कार्यवाई करनी चाहिए। तथा अब तक संध प्रदेशों में प्रशासक के अधीन विभागों में कितना भ्रष्टाचार हुआ है और उन विभागों को अपने मुख्य सतर्कता अधिकारी के पद की ताकत से अब तक कितने अधिकारियों और विभागों को प्रशासक आशीष कुन्द्रा एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी आशीष कुन्द्रा ने रक्षण दिया एवं जांच में देरी की व जांच से बचाया, इस मामले केंद्रीय सतर्कता आयोग को जांच करनी चाहिए।