काम करने मे जिरो और वसुली मे हिरो…

दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति की SEIAA समिति का समय समाप्त। SEIAA  समिति की समयावधि समाप्त होने से समिति हुई भंग। नई समिति के गठन हेतु अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं भेजा सदस्य सचिव दलाई ने। नई समिति के गठन तक बड़े प्रोजेक्टों क्लियरेंस नहीं मिलेगा। इस मामले की पूरी-पूरी जिम्मेवारी रहती है सदस्य सचिव की।  

सदस्य सचिव की कामचोरी का एक और काला सच!

सब के सब मोदी के साथ साथ विकास का रट्टा लगाते लगते, व्यवस्था की बात करना शायद भूल गए, भूल गए की प्रधान मंत्री मोदी ने मिनिमम गवारमेंट और मेक्सिमम गवर्नेंस का वादा भी किया था। लेकिन दमन-दीव प्रशासन को शायद कुछ और ही मंजूर है।

दमन-दीव प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव की कामचोरी अपने शाबाब पर देखी गई, उक्त समिति के सदस्य सचिव देवेन्द्र दलाई एवं विभागीय कार्यवाइयों को लेकर क्रांति भास्कर ने कई चौकाने वाले खुलासे किए, लेकिन प्रशासक आशीष कुन्द्रा न जाने किस किसम के कापूस को अपने कान में ठुसे बैठे है या इस विभाग और विभागीय कार्यप्रणाली के बारे में भी संध प्रदेश प्रशासक कुन्द्रा को संबंधित विभागीय अधिकारी गुमराह कर रहे है। मामला चाहे जो भी हो पिछले कुछ समय से प्रशासक की कार्य प्रणाली को देखते हुए यह तो अवश्य कहां जा सकता है की उक्त प्रशासक अपने कुशल नेतृत्व में दमन-दीव का भला करने ही आए है, लेकिन उक्त प्रशासक के कुछ चुनिंदा चापलूस प्रशासक को गुमराह कर वास्तविक स्थितियों पर पर्दा डाल प्रशासक को गुमराह करने का काम कर रहे है। वरना मामला पर्यावरण का हो और प्रशासक कुछ न करे यह भी मुमकिन नहीं।

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फिलवक्त क्रांति भास्कर के पास एक ऐसा चौकाने वाला मामला आया है जिसे देखकर लगता है की यदि इस मामले को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए या किसी जांच एजेन्सी से इस मामले की तहकीकात कारवाई जाए, तो जरूर न्यायालय और जांच एजेंसियाँ कामचोरी और अनियमीत्ताओं को देखते हुए दमन-दीव प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव पर मामला दर्ज करेने का आदेश देंगी! हालांकि मामला ऐसा है जो शायद इस संध प्रदेश में ही नहीं बल्कि इस देश में पहला मामला ऐसा होगा जिस में संध प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण समिति के अस्तित्व पर सवाल खड़े होते है।

बताया जाता है की संध प्रदेश दमन-दीव व दानह प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव द्वारा Seiaa कमिटी गठित करने हेतु वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में प्रस्ताव भेजने का प्रावधान बताया जाता है। तथा इस कमिटी के गठन की पूरी पूरी जिम्मेवारी केवल और केवल सदस्य सचिव की बताई जाती है, इस कमिटी के गठन में नहीं पीसीसी के अध्यक्ष का कोई रोल है नहीं प्रशासक का, लेकिन शायद अब इस मामले में सदस्य सचिव अपने वरीय अधिकारियों पर अपनी करतूतों की टोकरी उलट नहीं पाएँगे। इस कमिटी के बारे में बताया जाता है यदि दमन-दीव व दानह में कोई बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने हो तो उन तमाम प्रोजेक्टों को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय क्लियरेंस के लिए नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि उक्त कमिटी से कई प्रोजेक्टों को क्लियरेंस दिया जाएगा, हालांकि कई क्लियरेंस इस कमिटी द्वारा दिए भी गए है, लेकिन फिलवक्त उक्त कमिटी के अस्तित्व को ही ख़तरे में डाल दिया सदस्य सचिव दलाई ने।

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बताया जाता है की वर्ष 2014 के अंत में पूर्व में गठित समिति की समायावधि समाप्त हो चुकी थी, जिसके बाद इस मामले में नई समिति का गठन करने हेतु, दमन-दीव व प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव दलाई द्वारा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय एक नया प्रस्ताव भेजना था, लेकिन बताया जाता है की उक्त मामले में अभी तक सदस्य सचिव द्वारा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को उक्त नई कमिटी के गठन हेतु कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया। इसके आलावे यह भी बताया जाता है की प्रस्ताव में विलंब के कारण उक्त पूर्व में गठित समिति की समायावधि समाप्त होने की वजह से अब उक्त समिति किसी प्रकार का क्लियरेंस नहीं दे सकती, तथा जब तक नहीं समिति का गठन न हो एवं वन एवं पर्यावरण मंत्रालय नई समिति के गठन की स्वीकृति ना दे तब तक के लिए यहां के विकासीय कार्यों पर एक विराम लगता दिखाई दे रहा है। दमन-दीव व दानह पीसीसी के सदस्य सचिव देवेन्द्र दलाई की इस कामचोरी को देखते हुए शायद अब प्रशासक आशीष कुन्द्रा को भी यह यकीन आ जाएगा की यह सदस्य सचिव केवल पैसों की वसूली जानते है, जनता की समस्याओं और प्रदूषण से बढ़ती दिक्कतों का इनसे कोई नाता नहीं दिखाई देता।

दमन-दीव प्रसासक आशीष कुन्द्रा को चाहिए की दमन-दीव व दानह पीसीसी के सदस्य सचिव द्वारा हुई तमाम गडबड़ियों और अनियमीताओं की जांच करें, तथा उक्त सदस्य सचिव पर सख्त से सख्त कारवाई करे।