दमन-दानह में ट्रेप के बकरे पर निर्भर सीबीआई! भ्रष्ट अधिकारियों में सीबीआई का खोफ ख़त्म?

दमन-दानह में ट्रेप के बकरे पर निर्भर सीबीआई! भ्रष्ट अधिकारियों में सीबीआई का खोफ ख़त्म? | Kranti Bhaskar
Silvassa CBI Office

पिछले कई वर्षों से संध प्रदेश दमन-दीव व दानह में जारी भ्रष्टाचार तथा भ्रष्टाचार के मामलों में अब तक सीबीआई द्वारा की गई कार्यवाही को देखकर लगता है कि सीबीआई यहां पर एक मामूली हवलदार का काम भी ठीक तरह से नहीं कर रही है, या फिर बकरे बिना, किसी भ्रष्ट अधिकारी को पकड़ना सीबीआई के बस की बात नहीं।

ऐसा इस लिए क्यो की पिछले कई वर्षों से दमन-दीव व दानह में सीबीआई ने कई अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथो पकड़ा, लेकिन उन भ्रष्ट अधिकारियों को सीबीआई ने जिस आधार पर पकड़ा, वह तो बस एक ट्रेप था, और जैसा कि बताया जाता है कि, ट्रेप में सीबीआई को अधिकतर सबूत सवय शिकायतकर्ता ही उपलब्ध करा देता है।

अधिकतर ट्रेप में होता यह है कि जब अधिकारी किसी से पैसे मांगता है, तब पैसे देने वाला व्यक्ति शिकायतकर्ता बनकर सवय सीबीआई के पास जाता है, सीबीआई उसे कहती है कि हमारे सामने उसे पैसे दे दो, हम उसे रंगे हाथो पकड़ेंगे, फिर क्या शिकायतकर्ता सीबीआई के कहने पर उस भ्रष्ट अधिकारी को पैसे दे देता है और सीबीआई उस भ्रष्ट अधिकारी को रंगे हाथो पैसे लेते पकड़ लेती है।

ट्रेप एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत भ्रष्ट अधिकारी को पकड़ना कोई बड़ी बात नहीं, शिकायतकर्ता को बकरा बनाकर ही भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ना हो तो वह काम तो कानून के अनुसार एक साधारण हवलदार भी कर सकता है, तो फिर अब तक दमन-दीव व दानह के भ्रष्ट अधिकारियों को ट्रेप के तहत पकड़ कर सीबीआई ने कोनसा बड़ा तीर मार दिया यह सोचने वाली बात है!

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दमन-दानह में भ्रष्ट अधिकारियों के दिलों से सीबीआई का खोफ़ ख़त्म…    

आपको बता दे कि संध प्रदेश दमन-दीव व दानह के कई भ्रष्ट अधिकारियों के बारे में दिल्ली सीबीआई तथा मुंबई सीबीआई को दर्जनों नहीं बल्कि सेकड़ों शिकायते मिली, लेकिन बड़े ताज्जुब की बात है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी दमन-दीव व दानह के ऐसे किसी भ्रष्ट अधिकारी को अब तक नहीं पकड़ पाई, जिसके खिलाफ कोई ट्रेप के लिए सीबीआई को बकरा ना मिला हो।

अगर ट्रेप के सहारे ही सीबीआई भ्रष्ट अधिकारी को पकड़ सकती है तो फिर सीबीआई की क्या जरूरत, ट्रेप के सहारे तो एक मामूली हवलदार भी मामले को वही अंजाम दे सकता है जो सीबीआई देती आई है।

सीबीआई के अधिकारियों को इस बारे में सोचना चाहिए कि कब तक दमन-दीव व दानह के भ्रष्ट अधिकारी सीबीआई की नाकामी पर मौज उड़ाते रहेंगे, सोचना इस पर भी चाहिए कि यदि कोई ट्रेप का श्डियंत्र रचने के लिए सीबीआई का साथ ना देना चाहे या इस झमेल में ना पड़ना चाहे तो क्या इसी तरह अधिकारियों के भ्रष्टाचार का नंगा नाच चलता रहेगा, क्यो की सीबीआई को काम करने के लिए तंख्वाह मिलती है ट्रेप करवाने वाले को सरकार किसी प्रकार की तंख्वाह नहीं देती, वैसे भी अब तक जो ट्रेप सीबीआई ने किए उनमे से अधिकतर अधिकारी पुनः कुर्सी के गणेश बनकर ऐसे भ्रष्टाचार का नंगा नाच करते देखे गए जैस मानों उन्हे भी सीबीआई की औकात पता चल गई हो।

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वेसे सीबीआई के अधिकारियों को समय मिले तो अपनी फाइले खंगाले, हामारी जानकारी के अनुसार सीबीआई की फाइलों में सबसे अधिक शिकायते दमन-दीव व दानह विधुत विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद रामभाऊ इंगले तथा इस विभाग से संबन्धित अधिकारियों सचिवों की है। यह हम इस लिए कह सकते है क्यो की दर्जनों शिकायतकर्ताओं ने यह जानकार सवय क्रांति भास्कर को दी है।

आप यह भी जान ले कि यह वही विधुत विभाग है तथा वही अभियंता है जिसकी खराब कार्यप्रणाली, भ्रष्टनिती और अनियमितताओं के चलते जनता कई बार सडको पर उतरी, क्या दानह सीबीआई कार्यालय ने इस मामले की जानकारी मुंबई सीबीआई के अधिकारियों को नहीं दी थी? आंदोलन के बाद एक बार इस अधिकारी को प्रशासन ने कुछ समय के लिए कुर्सी से अवश्य उतार दिया था, लेकिन जल्द ही फिर से उसी अधिकारी को वही कुर्सी दे दी।

आंदोलन हुआ तो कथित भ्रष्ट अधिकारी को मिल गया इनाम में दानह।

तत्कालीन प्रशासक नरेन्द्र कुमार, तत्कालीन प्रशासक बी-एस भल्ला तथा तत्कालीन प्रशासक आशीष कुन्द्रा, तथा इन प्रशासकों के कार्यकाल में जीतने भी तत्कालीन विधुत सचिव रहे है उन तमाम अधिकारियों के खिलाफ भी विधुत विभाग के अभियंता मिलिंद इंगले को संरक्षण देने के आरोपण में दिल्ली सीबीआई, मुंबई सीबीआई, दिल्ली गृह मंत्रालय तथा प्रधान मंत्री कार्यालय को शिकायते मिलती रही है, तो क्या यह भी सीबीआई को नहीं पता।

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विधुत विभाग के जिस अभियंता के भ्रष्टाचार का ढ़ोल सवय वित्त सचिव प्रशासन के सिर पर फोड़ गए थे उसी अभियंता इंगले को ईमानदार प्रशासक प्रफुल पटेल के राज में प्रमोशन भी दे दिया गया और साथ साथ दादरा नगर हवेली विधुत निगम का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया, और इस सब के बाद भी सीबीआई तमाशा देखती रही, या ट्रेप करवाने वाले बकरे का इंतजार करती रही, सीबीआई का यह इंतजार खत्म हो ना हो, लेकिन सीबीआई को यह जानकार शायद कोई हेरानी ना हो कि अब दमन-दीव व दानह में भ्रष्टाचार करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के दिलों से सीबीआई का खोफ अवश्य खत्म हो गया है।

आज नहीं तो कल जनता को जवाब देना होगा…

फिलवक्त सवाल यह है कि दमन-दीव विधुत विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले के लिखाफ सेकड़ों शिकायतों के बाद भी अब तक प्रशासन द्वारा तथा सीबीआई द्वारा कोई कार्यवाही क्यो नहीं हुई? क्यो तथा किस कारण से दमन-दीव विधुत विभाग के कार्यपालक अभियंता मिलिंद इंगले को दानह का प्रभार दिया गया? क्या अभियंता इंगले के मामले में लिए गए इस फैसले में प्रशासक प्रफुल पटेल की सहमति थी या सलाहकार यादव ने इस मामले में ईमानदार प्रशासक को गुमराह कर अपनी चांदी काटने का इंताम कर लिया? इन सवालों के जवाब के साथ कुछ नए सवाल आने वाले अंकों में।