दमण भूमि विभाग की कछुआ चाल वाली कार्यप्रणाली से जनता परेशान।

daman collector office

दमण-दीव के भूमि विभाग का काम-काज़ कई वर्षों से मंथर गति से चल रहा है। जिसकी वजह से लोगो के काम अटके हुए है। एक और भारत सरकार तेजी से सबका साथ सबका विकास करने की बात करती है दूसरी और दमण-दीव के भूमि अधिकारी कछुआ चाल से काम कर रहे है, यह हम नहीं कह रहे है, बल्कि भूमि विभाग द्वारा मिले आंकड़े ही यह चीख-चीख कर बता रहे है की उक्त विभाग की कार्यप्रणाली कछुआ चाल से भी धीमी है और विभाग एवं विभागीय अधिकारियों ने कामचोरी का दामन थाम लिया है।

अगर बात जमीन एन-ए के संबंध मे की जाए, तो इसके आंकड़े काफी हैरान करने वाले है, बीते तीन वर्ष में यानि 1 अप्रेल 2015 से 31 दिसंबर 2018 तक विभाग में जमीन एन-ए कराने के 509 आवेदन आए, जिसमे से 217 आवेदन पास किए गए, 38 आवेदन ख़ारिज किए और 254 आवेदन विचारधीन रखे। यानि विभाग ने 1095 दिनों में सिर्फ 255 आवेदन ही निपटाए, इस हिसाब से विभाग ने 4 दिनों में एक आवेदन निपटाया, आंकड़ों को देखकर लगता है कि बाकी के 26 दिन अधिकारियों ने सिर्फ़ कुर्सी गरम करने का काम किया।

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विभागीय अधिकारियों द्वारा जमीन मामलो में बरती गई लापरवाही और कामचोरी का यही आलम भूमि विभाजन मामले में भी देखने को मिला। आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रेल 2010 से 31 दिसंबर 2018 तक भूमि विभाजन मामले के 367 आवेदन आए, जिसमे से 192 आवेदन पास हुए, 1 आवेदन रद्द हुआ और 174 आवेदन विचारार्थ रखे गए, यानि 10 वर्षों में विभाग ने सिर्फ़ 193 मामले ही निपटाए। अगर आंकड़ों को आधार माना जाए तो 10 वर्ष के 3650 दिनों में विभाग ने यह काम निपटाया, मतलब विभाग ने 16 दिन में एक मामला निपटाया। अब इस गति को क्या कहे?

दमण भूमि विभाग का प्रभार दानिक्स अधिकारी चर्मी पारेख के पास बताया जाता है, उक्त अधिकारी के पास कई अन्य विभागों के अतिरिक्त प्रभार भी है। अब ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या केवल इस विभाग का यह हाल है या दानिक्स अधिकारी चर्मी पारेख ने अन्य विभागो की कार्यप्रणालों को भी कछुआ चाल की गति पर ला खड़ा किया है? 4 दिनों में 1 एन-ए का मामला और 16 दिनों में 1 भूमि विभाजन का मामला निपटना अपने आप में कोई रिकार्ड साबित होता है या नहीं, बात यह नहीं है बात तो यह है की एक यदि उक्त विभाग एवं विभागीय अधिकारी मोटी पगार लेने के बाद भी यदि इस गति से काम करे तो जनता को एक मामला कितने में पड़ा होगा? इसका अब दमण-दीव प्रशासन के वरीय अधिकारियों के साथ साथ जनता को भी लगाना चाहिए।

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वैसे अब इस पूरे मामले को देखने के बाद, दमण-दीव प्रशासक प्रफुल पटेल को चाहिए की इस मामले में ध्यान दे। दमण-दीव की जनता ने सड़क बनाने की गति और बिज़ली के खंभे लगाने की गति तो देख ली, लेकिन जमीन संबन्धित मामलो के निपटारों की धीमी गति के जो आंकड़े सामने आए है वह अवश्य चिंता जनक है अब इस मामले में प्रशासक महोदय क्या संज्ञान लेते है यह तो वक्त आने पर पता चलेगा।