संध प्रदेश दमन-दीव के भ्रष्टाचार का ऐतिहासिक खुलासा, भ्रष्टाचार में भागीदार सीबीआई!

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प्रशासक, विकास आयुक्त, विधुत सचिव समेत कइयों का भ्रष्टाचार में हिस्सा तय।नगदी, गोल्ड, एवं डायमंड के रूप में भ्रष्टाचार का लेन-देन!

अगर आपको यह पता चले की आपके घर का रखवार ही लुटेरा है तो शायद आप उस बात को पचा लेंगे, लेकिन अगर आप को यह पता चले आप ने लुटेरे को अपने घर में रखा है तो इस बात को पचाना जरा मुश्किल है। भूचाल डॉट कॉम एक ऐसा खुलासा आपके सामने करने जा रहा है जिसे नहीं आप पचा पाएंगे नहीं इस देश की सरकारे। मामला यह है की भूचाल की खोजी टिम ने संध प्रदेश दमन-दीव व दादरा नगर हवेली में होने वाले तथा हुए भ्रष्टाचारों की छान-बीन की और उक्त खोज-बीन के तहत कुछ ऐसे सूत्र भूचाल टिम को मिले है जिन की कल्पना नहीं इस देश की सरकारे कर सकती है नहीं आम जनता।
संध प्रदेश दमन-दीव एवं दादरा नगर हवेली के भ्रष्टाचार की बात कोई आम बात नहीं है, नहीं इस मामले में यह खुलासा कोई आम खुलासा है, इस देश में भ्रष्टाचार की गटनाए तो बोहट बनी काइयों को रंगे हाथों तो काइयों को घोटाले के बाद पकड़ा गया, लेकिन इस बार खुलासा उन पहरेदारों से जुड़ा है, जिनकी जिम्मेवारी भ्रष्टाचार खत्म करने की है, लेकिन वहीं भ्रष्टाचार में भागीदार बने बैठे है, और वह है, दमन-दीव व दादरा नगर हवेली की विजिलेन्स, जांच एजेंसियाँ एवं सीबीआई, हां आपने बिलकुल ठीक पढ़ा हम जांच एजेंसियों के साथ साथ सीबीआई की भी बात कर रहे है, और यह खुलासा मुख्य रूप से इसी मामले में है।
  • लेकिन आपको पहले यह बता दे की आखिर इस भ्रष्टाचार की मूल कहानी क्या है और कोन कोन अधिकारी एवं कर्मचारी इस भ्रष्टाचार में हिस्सेदार है।

तो जनाब आप को यह जानके बड़ी हेरत होगी की संध प्रदेश में वैसे तो कई विभाग है जहां भ्रष्टाचार बेतहाशा है, जिनमे प्रमुख रूप से दमन-दीव विधुत विभाग, दमन-दीव लोक निर्माण विभाग एवं अन्य कई विभाग शामिल है, यहां भ्रष्टाचार केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि किसी के तबादले एवं प्रमोशन में भी बड़े धड्ड्ले से भ्रष्टाचार होता रहा है, और इस भ्रष्टाचार में दमन-दीव विधुत विभाग के अभियंता मिलिंद इंगले, लोक निर्माण विभाग के अभियंता सोमानी, एवं कई अन्य अभियन्ताओं के साथ साथ वह वरीय अधिकारी भी शामिल है जिनहे दिल्ली से यहां बड़ी कुर्सी के साथ साथ बड़ी ज़िम्मेदारी देकर भेजा गया है, उन बड़ी कुर्सी पर बैठे बड़े भ्रष्टाचारियों में विधुत सचिव, विकास आयुक्त एवं स्वयम प्रशासक भी शामिल है। आप को शायद यह बात हजम न हो लेकिन यही हकीकत है इस हकीकत की तह तक जाने के लिए भूचाल टिम में कई स्ट्रिंग के तहत कई अधिकारियों से यहां हो रहे भ्रष्टाचार की हकीकत जानने के प्रयत्न किए, उन स्ट्रिंगोन में पीउन से लेकर प्रशासक की कहानी शामिल है।
  • अब आप सोच रहे होंगे की आखिर यह भ्रष्टाचार कितने करोड़ का है, तथा इसका हिस्सा किन-किन में बांटा जाता है, और कोन-कोन है इस भ्रष्टाचार के भागीदार।

तो आपको बता दे की यहां के भ्रष्टाचार का आंकड़ा इतना अधिक है जिसके सामने यहां दिल्ली से आई विकास राशि भी कम लगती है, यहां के करोड़ों के भ्रष्टाचार में लगभग सब के हिस्से तय है चाहे फिर वह कोई द्वितय श्रेणी का कर्मचारी हो या प्रथम श्रेणी का जिसका जैसा पद उसका वैसा ही हिस्सा, इसके आलावे कई विभागों के प्रमुख एवं मुख्या होने के नाते हिस्से उस सचिव एवं सचिव को भी दिया जाता है, जिनमे विकास आयुक्त एवं विधुत सचिव, लोक निर्माण विभाग के सचिव संदीप कुमार, एवं तमाम प्रशासन के मुख्या प्रशासक कुन्द्रा भी शामिल है।

  • इस मामले में सीबीआई को जांच करते समय यह अवश्य ध्यान देने की जरूरत है की अधिकारियों के परिजनों एवं सगे-संबंधियों के पास कितना पैसा है तथा उनके पैसों का स्त्रोत क्या है क्यों की अधिकारी अपने काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए सबसे बेहतर इसी विकल्प का इस्त्माल करते है ताकि वह जांच एजेंसियों को अपनी खाली जेब बताकर चुना लगाने में सफल हो, लेकिन अब जांच एजेंसियों को यहां की वासविकता एवं कार्यकलापों की तह तक जाने के लिए उन अधिकारियों के परिजनों के पास जमा की गई संपत्ति की भी जांच करनी होगी, तभी उक्त मामले में जांच में कोई निर्णायक नतीजे एवं सत्यता तक पहुचने में सीबीआई कामयाब हो पाएगी। 

  • वैसे तो भारत में सीबीआई को लेकर एवं यू-पी-ए के दौर में सीबीआई की कार्यप्रणाली को लेकर सीबीआई पर कई बार सवाल खड़े हुए है, लेकिन कभी भी सीबीआई पर भ्रष्टाचार में शामिलगिरी के आरोप नहीं लेगे, और हमारी यही कामना है की आगे भी सीबीआई पर भ्रष्टाचार में शामिलगिरी के आरोप न लगे, लेकिन आज के इस खुलासे एवं दमन-दीव के भ्रष्ट अधिकारियों ने अवश्य अपनी गंदगी के छीटे सीबीआई पर उड़ा दिए है, यहां की भ्रष्टाचार एवं भ्रष्ट नीति के साथ साथ अधिकारियों के लालच एवं कमाऊ नीति ने सीबीआई को भी भ्रष्टाचार में भागीदार बना रखा है ऐसे हमारे सूत्रों का कहना है।

  • अब आप यह भी सोच रहे होंगे की इस भ्रष्टाचार की लेनदेन कैसे और कहां होती है, और कोन करता है यह सारी लेन-दें, तो जनाब लेन-देन करने वालों के नामों का खुलासा किसी जांच के बाद हो तो ही मुनासिब होगा, लेकिन लेन-देन करने के कुछ जरिए एवं लेन-देन करने वालों की जगहों और तरीकों के बारे में हम अवश्य बता देंगे, तो जनाब यह लेन-देन अधिकतर दिल्ली में किया जाता है तथा उन अधिकारियों की उन जगहों पर जहां वह अपना काला धन जमा करना या करवाना चाहते हो, कई बार लेन देन नगद राशि में किया जाता है तो कई बाद गोल्ड एवं डाइमंड के रूप में भी किया जाता है, मामला इतना ही नहीं अधिकारी जिस जगह, जिस वक्त एवं जिस सगे-संबंधी के पास पैसे पहोचाने के लिए बताता है पहोचा दिए जाते है, इस मामले में हवाले का इस्त्माल भी होता है और कारोबारियों का इस्त्माल भी।


अब आप यह सोच रहे होंगे इस भ्रष्टाचार में जांच एजेंसियों का क्या लेना-देना, तो जनाब पहले तो हम दमन-दीव की जांच एजेंसियों के बारे में आपको यह बता दे की यहां की विजिलेन्स एवं जांच विभाग के मुख्या या तो प्रशासक रहते है या विकास आयुक्त के पास उक्त विभाग का कार्यभार रहता है तो जाहीर सी बात है की जब जांच एजेंसियों का प्रमुख अन्य विभागों का प्रमुख बनकर भ्रष्टाचार में हिस्सा लेता है तो उन भ्रष्टाचारों की जांच कोई अन्य मामूली अधिकारी कैसे कर सकता है, और रही सीबीआई की बात तो पूर्व में यहां के विधुत विभाग एवं लोक निर्माण विभाग से सीबीआई भी भ्रष्टाचार में कमाई राशि का हिस्सा लिया करती थी, ऐसे हामारे सूत्रों का कहना है, तथा कुछ चुनिन्दा अधिकारियों ने भी सीबीआई को हिस्सा देने वाली बात पर अपनी मुहर लगाई है, इसके अलावे जहां तक दमन की विजिलेन्स एवं जांच एजेंसियों की बात है तो इस मामले में विजिलेन्स के अधीक्षक के भूचाल के खुफिया केमेरे के सामने विधुत विभाग के सचिवों के भ्रष्टाचार का ढ़ोल पीट डाला यह तो गनीमत थी की विधुत विभाग ने अपने भ्रष्टाचार में विधुत सचिव संदीप कुमार एवं प्रशासक कुन्द्रा को भी शामिल कर रखा है, इस लिए इस मामले की जांच किसी अधिकारी ने नहीं कारवाई, अन्यथा उन अभियन्ताओं के साथ कई सचिव भी सलाखों के पीछे होते।
खेर अब तक तो संध प्रदेश दमन-दीव के भ्रष्ट अभियंता अपने भ्रष्टाचार का हिस्सा ऊपर तक देकर बचते आए है, विकास आयुक्त एवं प्रशासक जैसे मुख्य स्तंभ को अपने काले कारनामों में शामिल करते आए है, लेकिन अब सीबीआई की शामिलगिरी पर उठते सवाल जरूर इस मामले में जांच के दरवाजे खोलते है, साथ ही साथ देश की सबसे विश्वसनीय जांच एजेंसी होने के नाते भी अब सीबीआई एवं भारत सरकार इस मामले में संज्ञान अवश्य लेगी ऐसा लगता है, क्यों की अब-तक तो केवल कुछ अभियन्ताओं के भ्रष्टाचार की बात थी, लेकिन अब प्रशासन में बैठे प्रमुख अधिकारी एवं सीबीआई की शामिलगिरी की बाते सामने आई है। यहां की इस कदर भ्रष्टता गृह मंत्रालय के कान भी अवश्य खड़े कर देगी, लेकिन उक्त गृह मंत्रालय में बैठे सममानीय मंत्री, एवं वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए की इस मामले में अब जल्द जांच करवाए एवं उन भ्रष्ट अधिकारियों के ख्लाफ सख्त से सख्त कार्यवाई करे।