सोशल मीडिया में घूम रहे अशोक स्तम्भ वाले स्टीकर की तस्वीर का सच क्या है?

jignesh dahyabhai patel daman

इन दिनों सोशल मीडिया में अशोक स्तम्भ वाले स्टीकर लगी एक गाड़ी कि तस्वीर तेजी से  वायरल हो रही है। इससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस तस्वीर में आप साफ़ देख सकते है कि एक  स्टीकर में सदस्य भारतीय संसदीय ग्रुप लिखा हुआ है, इस स्टीकर में  बाकायदा अशोक स्तम्भ की छाप लगी हुई है, इसके बगल में दमन दीव में पंजीकृत मारुती जिप्सी क्र.DD 03 K 0029 अंकित हैये गाड़ी किसी कैलाश यादव के नाम पंजीकृत है। इस स्टीकर को देखने से ये भ्रम होता  है कि ये किसी सांसद की होगी,  क्योकि इस स्टीकर में संसद का लेबल नम्बर104 अंकित है। इस स्टीकर से उठे सभी सवालों का जिक्र हम इसी समाचार में आगे करेंगे लेकिन इससे पहले जिन पाठको को इस घटना क्रम से पहले की घटना का पता न हो, उनके लिए फ्लैश बैक पर नजर डालते हैl

11 सितम्बर 2018 को वेलनोन पॉलिस्टर लिमिटेड कंपनी के मैनेजर ने नानी दमन पुलिस स्टेशन में जागृति वाटर सप्लायर और केतन पटेल के खिलाफ  धमकी देने और अवैध रूप से पैसे मांगने की शिकायत दर्ज कराई थीl इसकेबाद दिनांक 19 सितम्बर को नानी दमन की एक पुलिस टुकड़ी ने केतन पटेल को मुंबई के नरीमन प्वाइंट से पकड़ ही लिया और कोर्ट में पेश कियाहालांकि बाद में काफी मशक्क्त के बाद कोर्ट ने जमानत दे दी फ़िलहाल केतन जमानत पर रिहा है।

केतन पटेल की गिरफ्तारी के बाद, कांफ्रेंस में डीआइजी साहब ने बताया कि केतन पटेल के ऊपर धमकी देने वाला एक दूसरा मामला भी दर्ज हुआ है। इसके अलावा केतन पटेल पर स्कार्पियो गाडी पर गृह मंत्रालय का फर्जी स्टीकर लगाने का मामला भी दर्ज है, जिसकी एफआईआर क्रमाँक 106 /2018 हैउपरोक्त बरामद गाडी बलबिंदर सिंह के नाम रजिस्टर्ड है, वो मार्शल सिक्योरिटी एजेंसी चलाता है। जब इस सम्बन्ध में पुलिस ने भंडारी से पूछताछ की तो उसने कोर्ट 164 के समक्ष ब्यान दिया कि ये गाडी शुरू से ही केतन ही इस्तेमाल कर रहा है

डीआईजी  ने कहा कि  राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को देखते हुए हम पता लगा रहे है कि गृह मंत्रालय का फर्जी स्टीकर लगाने का मकसद क्या थाक्या इसे किसी आपराधिक गतिविधियों के लिए तो इस्तेमाल नहीं किया गयाइस गैंग में कौन कौन लोग शामिल हैये स्टीकर फर्जी है या असली हैइसे किसने जारी कियाये किन किन लोगो को जारी हुआऔर स्टीकर से जुडी वे तमाम बाते जिसे कानून को जानना जरुरी है। इस पर पुलिस जांच कर रही है।

ashok stambh

अब इस सब बार पुनः चर्चा का मुख्य कारण यह है कि एक इन दिनों सोशल मीडिया में मारुति जिप्सी कार पर लगे एक स्टीकर की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, इस स्टीकर में सदस्य भारतीय संसदीय ग्रुप लिखा हुया है,इस स्टीकर में अशोक स्तम्भ छपा है।  इसका लेबल नंबर 104 है और साथ ही इसमें DD 03 k 0029 भी अंकित है। इस स्टीकर की वजह से लोगो को भ्रम होता है कि ये गाडी किसी सांसद की है मगर छानबीन से पता चला कि मारुती जिप्सी नामक ये गाडी किसी कैलाश यादव की है, और पता चला है की केलाश यादव केतन पटेल तथा जिग्नेश पटेल उर्फ जिगगु के लिए काम करता था, फिलवक्त केलाश यादव कहा है तथा अभी भी केतन पटेल तथा जिग्नेश पटेल उर्फ जिगगु के साथ सक्रिय है या नहीं यह तो पता नहीं लेकिन केलाश यादव का एक बेटा अभी भी जिग्नेश पटेल उर्फ जिगगु के साथ काम कर रहा है क्रांति भास्कर को केलाश यादव के पुत्र के साथ जिग्नेश पटेलकी कुछ तस्वीरे भी मिली है और इन तस्वीरों को देखने के बाद यह शिद्ध होता है की केलाश यादव भी जिग्नेश पटेल उर्फ जिगगु का ही आदमी होगा।  

Kalish Yadav Daman

  • कैलाश यादव के नाम पर गाड़ी, गाड़ी पर अशोक स्तम्भ वाला स्टिकर, बेटा जिग्नेश पटेल उर्फ़ जिग्गू के साथ

जिस गाड़ी पर, सदस्य भारतीय संसदीय ग्रुप तथा अशोक स्तम्भ का स्टिकर लगा हुआ फोटो में दिखाई दे रहा है वह गाड़ी, 27 नंबर 2009 को दमन में पंजीकृत कराई गई थी, जबकि लालू पटेल 16 मई 2009 को  सांसद बने थे। इससे लोग काफी हैरान है कि एक सामान्य से व्यक्ति की गाडी में संसद सदस्य का स्टीकर कैसे आया उसने ये स्टीकर किसकी इजाजत से लगाया? क्या कैलाश यादव के परिवार का कोई व्यक्ति सांसद हैया कैलाश यादव ने अपने ही मन से ये स्टीकर लगाया था? इस स्टीकर को हासिल करने के लिए  कैलाश यादव ने कितना खर्च कियाइस स्टीकर का इस्तेमाल कैलाश ने किसके कहने पर कियाक्या केलाश यादव को यह स्टिकर लाकर जिग्नेश पटेल उर्फ जिगगु ने दिया? इन तमाम  सवालों के जबाव जनता जानना चाहती है।  दमन दीव पुलिस प्रशासन को इस मामले की बड़ी गंभीरता से जांच करनी चाहिए ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा कायम रह सके। साथ उन सभी आरोपियों को कठोर से कठोर सजा देनी चाहिए जिन्होंने गृह मंत्रालय और अशोक स्तम्भ का घोर अपमान किया। शेष फिर। 

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