इन अधिकारियों की सीबीआई जांच, प्रशासक प्रफुल पटेल करवाएँगे या प्रशासक प्रफुल पटेल की सीबीआई जांच प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी करवाएँगे?

इन अधिकारियों की सीबीआई जांच, प्रशासक प्रफुल पटेल करवाएँगे या प्रशासक प्रफुल पटेल की सीबीआई जांच प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी करवाएँगे? | Kranti Bhaskar
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संध प्रदेश दमन-दीव व दानह में भ्रष्टाचार तथा अनियमितताएँ तो कम होती नहीं दिखाई दी, लेकिन चाटुपत्रकारिता के चलते इन मामलों की ख़बरें अखबारों में आनी अवश्य कम हो गई, इसका कारण क्या है इस पर अवश्य कभी विस्तार में चर्चा करेंगे, लेकिन पहले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मुद्दे पर वो रोशनी डालते है जिसकी वजह से बेवजह जनता पिसती जा रही है और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है।

इस वक्त मामला है दमन-दीव व दानह के उन विभागों का तथा उन कातिथ भ्रष्ट अधिकारियों का जिन पर प्रशासक प्रफुल पटेल के राज में भी कोई ठोस कार्यवाही होती दिखाई नहीं दे रही है, दमन-दीव व दानह में प्रशासक प्रफुल पटेल की नियुक्ति के बाद जनता में एक उम्मीद देखी गई की अब दमन-दीव व दानह जल्द भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनेगा, और प्रधान मंत्री श्री मोदी का भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना इस प्रदेश से साकार होने की शुरुआत करेगा, लेकिन दमन-दीव व दानह के उन कथित भ्रष्ट अधिकारियों की सलामती और विभागों में जारी भ्रष्टाचार ने मानों जनता की इस उम्मीद पर भी पानी फेर दिया हो

संध प्रदेश दमन-दीव विधुत विभाग के कार्यपालक अभियाता मिलिंद इंगले, सहायक अभियंता सुरजीत सिंह, अभियंता सुरेश पटेल, अभियंता राजु, तथा लोक निर्माण विभाग के अभियंता पंकज पटेल, सहायक अभियंता मयंक राणा, कनिय अभियंता बिपिन पवार, दानह श्रम विभाग के अधिकारी प्रशांत जोशी, दानह आर-टी-ओ निरीक्षक चोहान, दमन आर-टी-ओ निरीक्षक बिपिन पवार, तत्कालीन उप वन संरक्षक तथा पीसीसी के सदस्य सचिव डेबेन्द्र दलाई, जैसे कई अधिकारियों के भ्रष्टाचार की शिकायते तथा जांच लंबित है। पहले तो आपको यह बता देते है की जब भी कभी एक से अधिक अधिकारियों की कारगुजरारियों की खबर एक ही खबर में आती है तो यह सबसे पहले यह कहते है की जो सबका होगा वही मेरा होगा, इनको अपने वरीय अधिकारियों की उदारता और साथ पर इतना भरोसा होता है की इन्हे सीबीआई से भी भय नहीं लगता, या फिर कही ऐसा तो नहीं इनके वरीय अधिकारी इन्हे भ्रष्टाचार करने के लिए विवश करते है ताकि वह अपनी चांदी काट सके?

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इन अधिकारियों की शिकायते प्रशासन में शायद सालों से लंबित है, तथा इनके द्वारा कई मामलों में बरती गई अनियमितताएँ तथा भ्रष्टाचार की ख़बरें भी पब्लिसिटी विभाग की फाइलों मौजूद है।

इनमे से कई अधिकारी ऐसे भी है जिनकी करतूतों से तंग आकार जनता द्वारा गृह मंत्रालय से लेकर प्रधान मंत्री कार्यालय तक शिकायते की गई, जिनकी जांच हुई या नहीं यह तो पता नहीं, लेकिन इन तमाम अधिकारियों पर दमन-दीव व दानह प्रशासन तथा प्रशासक प्रफुल पटेल की मेहरबानी के बिना कैसे इनमे से कई अधिकारियों को एक के बाद एक अतिरिक्त प्रभार मिलते रहे इसकी जांच तो प्रधान मंत्री को सीबीआई से करवानी चाहिए।

इस मामले की जांच सीबीआई से इस लिए भी होनी चाहिए क्यो की इनमे से कई अधिकारी ऐसे भी है जिनके भ्रष्टाचार की वजह से दमन-दीव व दानह के पूर्व प्रशासकों पर भी कीचड़ उड़ता रहा, इनमे से कई अधिकारी ऐसे भी है जिनके बारे में जनता यह मानती रही की इनकी मनमानी, भ्रष्टाचार तथा अनियमितता की शिकायतों के बाद भी यह अब तक इस लिए बचे हुए है क्यों की प्रशासक तथा अन्य सचिवो तक को मेनेज कर अपने पक्ष में कर लेते है, वास्तव में यह सभी भ्रष्टाचार करने के लिए तथा अपने वरीय अधिकारियों की काली कमाई करवाने के लिए विवश तो नहीं? इनमे से कई अधिकारी ऐसे भी है जिनकी वजह से जनता सडको पर आई और इनकी काली करतूतों की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की, लेकिन प्रशासन के सामने जनता के पलड़े से भ्रष्ट अधिकारियों के पलड़े के भारी देखा गया। इनमे से कई अधिकारी ऐसे भी है जिनकी भ्रष्टनिती तथा करतूतों की वजह से इस मामले के सवाल देश के गृह राज्य मंत्री से भी पूछे गए तथा देश के गृह सचिव से भी पूछे गए, लेकिन सबने मामले में यह कह कर किनारा कर लिया की मामला प्रशासक के पास लंबित है, तो अब सवाल फिर से वही है की क्या प्रशासन के वरीय अधिकारी सवय इनसे भ्रष्टाचार करवाते है तथा अपनी ऐशगाह आबाद करने के लिए इन्हे संरक्षण देते है?

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कई मामलों में जनता द्वारा की गई शिकायतों की फाइले, कभी गृह मंत्रालय से अग्रित होकर दमन-दीव व दानह प्रशासक कार्यालय आई तो कभी प्रधान मंत्री कार्यालय से अग्रेषित होकर, लेकिन किसी मामले में जनता को न्याय नहीं मिला बल्कि उन शिकायतों को दबाकर उस शिकायतकर्ता को इतने चक्कर कटाए जाने लगे की एक शिकायतकर्ता को भी पता चल जाए की शिकायत करने का दण्ड क्या होता है।

फिलवक्त दमन-दीव व दानह के प्रशासक पद पर प्रफुल पटेल है, क्रांति भास्कर के सूत्रो के अनुसार प्रशासक प्रफुल पटेल के कार्यकाल में भी गृह मंत्रालय तथा प्रधान मंत्री कार्यालय से प्रशासक कार्यालय में अग्रेषित शिकायतों का दौर जारी रहा, लेकिन पूर्व की तरह अब भी किसी शिकायत पर किसी प्रकार की कार्यवाही की जानकारी अब तक नहीं मिली, इससे सवाल यह उठता है की क्या दमन-दीव व दानह के कथित भ्रष्ट अधिकारी जैसे पूर्व के प्रशासकों को मेनेज करके अपने पक्ष में कर लेते थे क्या वैसे ही उन अधिकारियों ने प्रशासक प्रफुल पटेल को भी मेनेज करके अपने पक्ष में कर लिया है?

वैसे आपको यह भी बता दे कि यह पहली बार नहीं है जब क्रांति भास्कर इन अधिकारियों की जांच को लेकर खबर लिखी, इससे पहले भी करती भास्कर इन तमाम अधिकारियों की कुत्सित्कार्यप्रणाली को लेकर कई खबरे प्रमुखता से प्रकाशित कर चुकी है, इन अधिकारियों पर कितने कितने आरोप कब कब लगे यदि इस मामले में पूरी खबर विस्तार से लिखे तो शायद कई दिनों तक भी खबर पूरी नहीं होगी, इतनी लंबित इनकी कारगुजारिया है, इस लिए केवल शिकायतों का हावला देकर, मुख्य रूप से यह सवाल है की जांच क्यों नहीं, और शामिल कोन कोन?

अब वास्तव में इसका क्या कारण है यह तो सीबीआई ही पता लगा सकती है, अब इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश प्रशासक प्रफुल पटेल देंगे या प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, यह तो समय ही बतागा।

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वैसे तो इन सभी मामलों में विरोध पक्ष को आगे आकार प्रशासन से इन मामलों में सवाल करने चाहिए, लेकिन लगता है पूर्व की करनी और कारनामों ने उनके मुह पर भी फेविकोल लगा दिया, या फिर हाल में जारी उनकी हफ्ता वसूली और भाईगीरी इनकी मुह-बंदी का हरजाना है? दमन-दीव व दानह की जनता के हकों की बात करने वाले जन प्रतिनिधि यदि चुप्पी साधे बैठे रहे तो उनकी राजनीति का क्या होगा यह सवाल भी जरूरी है? दमन की जनता ने जिनहे अपना प्रतिनिधि माना उनका इस मामले में क्या सोचना है इसका जावाब तो जनता को ही उनसे मांगना चाहिए, वैसे क्रांति भास्कर की टिम उन तमाम अधिकारियों पर नजर रखे हुए है जो जनता की लिस्ट में भ्रष्ट है, प्रशासन चाहे जनता की आवाज सुने ना सुने क्रांति भास्कर जनता की आवाज बनकर प्रशासन को न्याय के लिए आवाज लगती रहेगी, इसी पर किसी ने ठीक कहाँ है वह जागे ना जागे यह उसके मुकद्दर की बात है, मेरा तो फर्ज ही है आवाज लगाते रहना।

देखना यह भी है की इस खबर के बाद प्रशासन मामले में कोई ठोस कार्यवाही करती है या क्रांति भास्कर से भी चाटुपत्रकारिता करवाने के लिए कोई दबाव या साजिश रचरी है, यहाँ पर दबाव और शाजिश का अर्थ चंद शब्दो में बयान करना मुश्किल है तो आने वाले अंकों में अवश्य इस पर बात करेंगे, वैसे इस खबर के साथ साथ क्रांति भास्कर यह बात भी साफ कर देती है की क्रांति भास्कर चाटुपत्रकारिता में ना विश्वास रखती है ना ही करना जानती है आज की जनता और नई पीढ़ी भी इतनी होशियार है की अब तो वह भी खबर पढ़कर अंदाज लगा देती है की खबर उनके उजवल भविष्य के लिए है या चंद अफसरशाहों और नेताओ की चमचागीरी करने के लिए, क्रांति भास्कर इसी अंदाज में जनता की आवाज बनकर प्रशासन से तथा जन प्रतिनिधियों से सवाल करती आई है और आगे भी इसी मुहिम के लिए प्रतिबध्द है। शेष फिर।