लाइसेन्स के बिना OIDC से शराब कैसे मिली और पार्किंग के बिना लाइसेन्स कैसे मिला? दानह प्रशासन सवालो के घेरे में।

Silvassa
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संध प्रदेश दादरा नगर हवेली में मिहिर जैसे और कितने माहिर खिलाड़ी है और इस गड़बड़झाले जैसे और कितने गड़बड़झाले निरीक्षक मिहिर के हाथो अंजाम दिए गए? इसका पता दानह प्रशासन कोई जांच कर के बाद सवय लगाए। वैसे ऐसा क्यो कहा जा रहा है और इस प्रकार की चर्चाए एवं सवाल क्यो हो रहे है यह भी जान लीजिए।

बात यह है कि, दादरा नगर हवेली में, आबकारी विभाग के निरीक्षक मिहिर द्वारा नियमो को धतता बताते हुए तथा अपने पद एवं अधिकारो का दुरुपयोग करते हुए, नरोली सिलवासा रोड़ पर, होटल-7 के पास, पुष्पविजय सिंह चंदर्सिनह परमार को पतंग होटल के नाम से बार एण्ड रेस्टोरेन्ट चलाने का लाइसेन्स जारी किया गया है या किया जाने वाला है, इस मामले में क्रांति भास्कर द्वारा दिनांक 11 जून 2018 को प्रमुखता से एक ख़बर प्रकाशित की गई थी। उक्त ख़बर में प्रशासन से इस मामले में जांच की मांग के साथ साथ नियमो को धतता बताने वाले अधिकारियों पर भी ठोस कार्यवाही की जाने की मांग की गई।

इस मामले में अब जो नई जानकारिया, क्रांति भास्कर की टीम को मिली है वह तो और भी चौकाने वाली है। जानकारी मिली है कि क्रांति भास्कर द्वारा दिनांक 11 जून 2018 को प्रकाशित की गई ख़बर के बाद, पुष्पविजय सिंह चन्द्र्सिंह परमार, पतंग होटल के आस पास पतंग होटल की पार्किंग बनाने व बताने के लिए किराए की जमीन ढूँढने निकला है!

यह बात सही है तो इससे ऐसे कई नए सवाल उभर कर सामने आते दिखाई दे रहे है जिसके बारे में उक्त गड़बड़झाला करने वाले आबकारी निरीक्षक मिहिर ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। सवाल यह है की जब पुष्पविजय सिंह चन्द्र्सिंह परमार के पास पतंग होटल की पार्किंग की जमीन नहीं थी तो उक्त होटलर द्वारा आबकारी विभाग ने कैसे बार एंड रेस्टोरेन्ट के लाइसेन्स हेतु आवेदन को स्वीकार किया? यदि उक्त होटलर के पास आवेदन करते समय नियमानुसार पार्किंग की जगह नहीं थी तो आबकारी विभाग ने उसके आवेदन पर लाइसेन्स जारी करने की प्रक्रिया को कैसे आरंभ किया? वैसे अब तक लाइसेन्स जारी हुआ या नहीं इस बात पर अब भी आबकारी निरीक्षक मिहिर की और से कोई जवाब नहीं दिया गया। यह और बात है की दानह ओ-आई-डी-सी ने पतंग होटल को शराब देकर कुछ नए सवालो को अवश्य जन्म दे दिया है। दानह में यह चर्चा है की पतंग होटल ने ओ-आई-डी-सी से शराब की खरीद शुरू कर दी है, अब आबकारी विभाग के लाइसेन्स के बिना तो ओ-आई-डी-सी शराब देगी नहीं, तो पतंग होटल द्वारा की जाने वाली शराब खरीद को देखते हुए, समझा जाए की पतंग होटल को पार्किंग के बिना ही आबकारी निरीक्षक मिहिर ने लाइसेन्स जारी कर दिया गया है? सवाल कई है लेकिन जवाब केवल प्रशासन के पास।

अब जैसे लाइसेन्स लेने के बाद पार्किंग की जगह खोजी जा रही है उसे देख कर यह चर्चा और सवाल है कि आखिर कितनी बड़ी रकम ली गई है उक्त गड़बड़झाले में जो लौटाई नहीं जा सकती और उसे पार्किंग ढूँढने का समय दिया जा रहा है? क्या दानह में अब सभी लाइसेन्स ऐसे ही मिलेंगे की लाइसेन्स ले जाओ बादमे जगह तलाशना? इस एक मामले में प्रशासन को कितना शर्मिंदा किया इसका अंदाजा शायद प्रशासन के ईमानदार अधिकारियों को नहीं, लेकिन आने वाले समय में इस मामले में प्रशासन की और फजीहत ना हो इसके अंतजाम तो प्रशासन जांच करवाकर कर ही सकती है!

प्रशासन के वरीय तथा ईमानदार अधिकारियों को चाहिए कि, आबकारी विभाग के निरीक्षक द्वारा फैलाई गई कालिख को साफ करने के लिए तत्काल किसी जांच एजेंसी से मामले की बारीकी से जांच करवाए, अन्यथा जांच में होने वाली देरी को देखते जनता तो यही समझेगी की इस मामले में नीचे से लेकर ऊपर तक प्रसाद बंटा है। शेष फिर

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