दानह के बाद अब दमण में भी बढ़ रही है श्रमिकों कि शिकायते, नहीं मिल रहा वेतन, नहीं सुन रही प्रशासन।

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वापी। गरीब श्रमिकों कि शिकायतों के लिए इस डिजिटल इण्डिया में भी अब तक कोई टोल-फ़्री नंबर नहीं है। कंपनी के बाहर या अंदर श्रम निरक्षक के कार्यालय का पता भी तो नहीं है। श्रम विभाग कहा है, श्रम अधिकारी का नाम क्या है, श्रम निरीक्षक का संपर्क नंबर क्या है तथा श्रमिकों के अधिकार क्या है? इस सब कि जानकारी भी तो श्रमिकों को नहीं है। ऐसा लगता है जैसे मानों जानकारियों का अभाव श्रमिकों के लिए मुसीबत का पहाड़ बन गया ओर उस पहाड़ के भारी-भरकम वज़न ने श्रमिकों कि गरीबी अपना सारा वज़न रख दिया। जरा सोचिए यदि श्रमिक गरीब ना होते तो क्या उनका शोषण इतना आसान होता? दरअसल श्रमिक कि समस्या का सबसे बड़ा कारण गरीबी ही है ओर यह समस्या उन सभी कि है जो गरीब है फिर चाहे वह किसी कंपनी में काम करते हो या सवय अपना छोटा-मोटा कारोबार चलते हो। गरीब को न्याय आसानी से नहीं मिलता क्यो कि न्याय के लिए मुकदमा करना पड़ता है और मुकदमे के लिए वकील चाहिए, अब जरा सोचिए प्रतिमाह 10-15 हजार के वेतन पर अपने पूरे परिवार का पेट पालने वाला ग़रीब न्याय के लिए वकील कहा से लाए?

अब यह सब हम इस लिए बता रहे है क्यो कि पिछले कुछ दिनों से वलसाड, वापी, उमरगांव, सरिगांव, दमण और दादरा नगर हवेली में काम करने वाले श्रमिकों कि शिकायते बढ़ती जा रही है श्रमिकों का कहना है उन्हे वेतन नहीं मिल रहा है ओर इकाइयां इस पर अपनी ओर से कोई सफाई भी नहीं दे रही है। पिछले दिनों दादरा नगर हवेली से भिलोसा इंडस्ट्रीज, सनातन, डीएनएच स्पिनर्स जैसी इकाइयों के श्रमिकों कि शिकायते सामने आने लगी कि उन्हे समय पर नियमानुसार वेतन नहीं मिल रहा है। दादरा नगर हवेली के बाद वलसाड जिले के उमरगांव और सरिगांव क्षेत्र के श्रमिक भी इकाई ओर ठेकेदार कि शिकायते करते देखे गए, इसके बाद वापी कि जानी-मानी इकाई वेल्सपन कंपनी के श्रमिक भी वेतन को लेकर शिकायत करने के लिए सामने आए। अब दमण में स्थित सेलों प्लास्ट में काम करने वाले श्रमिकों के विडियों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है। दमण में स्थित सेलों प्लास्ट के श्रमिकों का भी वही कहना है जो अन्य श्रमिक कह रहे है कि उन्हे वेतन नहीं मिल रहा।

वलसाड जिला समाहर्ता तथा दानह एवं दमण-दीव के प्रशासक को उधोगिक इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों के शोषण पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ेंगे क्यो कि श्रमिकों के पलायन के पीछे एक मुख्य कारण उनका शोषण भी है। आज ही वलसाड जिला समाहर्ता ने अपने ट्विटर एकाउंट पर जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 11 रेल गाड़ियों से 16000 से अधिक श्रमिकों को उनके गाँव भेजा गया है तथा आगे ओर 7  रेल गाड़ियों कि मंजूरी मिलना बाकी है, वलसाड जिला समाहर्ता ने श्रमिकों को धेर्य और शांति रखने कि बिनती भी कि है। वैसे जिस तरह श्रमिकों कि शिकायते मिल रही है उन शिकायतों को देखते हुए वलसाड जिला समाहर्ता को एक ट्वीट और करना चाहिए कि इकाइयां श्रमिकों का वेतन ना रोके और श्रम निरीक्षक इस संकट कि घड़ी में इकाई और ठेकदारों के साथ साठ-गांठ ना करें। शायद समाहर्ता के इस एक और ट्वीट से इकाई, ठेकदार और श्रम निरीक्षक कि मरणासन पर पड़ी मानवता जाग जाए और उन्हे यह एहसास हो जाए कि कफ़न में पाकेट नहीं होती!

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वैसे श्रम विभाग के अधिकारी कितने ईमानदार है यह प्रशासन भी जानती है और श्रमिक भी लेकिन यह समय श्रमिकों का साथ देने का है फिर चाहे एक के बाद एक अधिकारी को निलंबित ही क्यों ना करना पड़े। श्रम विभाग के वरीय अधिकारियों को चाहिए कि अपने अपने क्षेत्र में कितनी इकाइयां कार्यरत है तथा किस इकाई में कितने ठेकदार है एवं कितने श्रमिक है? इसकी जानकारी जमा कर, सभी इकाइयों को 100% ई-पेमेंट करने का एक आदेश जारी करना चाहिए ताकि श्रमिकों कि शिकायतों का हमेशा के लिए समाधान हो सके।