40% ब्लेक-मनी के बिना नहीं मिलता यहां फ्लेट…

जब कभी काले धन की बात आई, कभी सरकार तो कभी अधिकारी सवालों के घेरे में दिखाई दिए। लेकिन समस्या का समाधान नहीं यू-पी-ए सरकार ला पाई न हीं अब एन-डी-ए के दौर में इस समस्या का समाधान होता दिखाई दे रहा है।

अगर काले धन के लेन-देन की बात करे तो देश के हर शहर-गांव में इसका चलन आसमान छु: रहा है, कहीं उधोगपति तो कहीं बिल्डरों ने इस काले धन के जरिए सरकार और जनता दोनों को चुना लगाने में जैसे कोई कसर बाकी नहीं रखी।

वैसे तो आयकर विभाग भी उन तमाम काले-धन के बादशाहों के पीछे डंडा लेकर पड़ा है, लेकिन यह और बात है की उस डंडे का तोड़ भी बिल्डर लॉबी खूब जानती है, फिर चाहे वह तोड़ बड़ी पहोच का हो या संलिप्प्त कर अपनी ऐशगाह आबाद करने का।kankaria_logo1

गुजरात के वापी शहर में भी काले धन को लेकर एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमे बिल्डर द्वारा इतनी मात्रा में काले धन का लेन-देन किया जा रहा है जिसे आम आदमी ना दे तो आशियाना नहीं मिलेगा और दे तो उसके जीवन की सारी गाढ़ी कमाई, बिल्डर लॉबी खा जाएगी। वापी के चला (दमन-रोड) पर स्थित कांकरिया हाउसिंग का सिलसिला भी कुछ ऐसा ही है। इस बिल्डर (कंपनी) को न हीं आयकर विभाग का डंडा दिखाई देता है न हीं भारत सरकार के नियम, बस होड़ तो यह है की गुनाह में भागीदार कितने बने! वापी के इसी प्रोजेक्ट की तहकीकात की गई तो पता चला की पहले इस प्रोजेक्ट में फ्लेट की किमते आसमान छु रही है, उसके बाद काले धन की रकम जमीन फाड़ रही है, इस प्रोजेक्ट में कुल साठ (60) फ्लेट है, तथा प्रति-स्क्वायर फिट कीमत है 3465 रुपये। लेकिन इस रकम का 60% (प्रतिशत) ही व्हाइट दे सकते है, बाकी का 40% रकम उक्त बिल्डर ब्लेक में वसूल रहा है। अब इस प्रोजेक्ट पर हो रही यह अनियमितता आयकर विभाग के अधिकारियों को क्यों दिखाई नहीं दे रही है, इसकी कहानी भी आपको बताएंगे, लेकिन इस से पहले यह जान लेते है की इस प्रोजेक्ट में एक फ्लेट कितने रुपए से शुरू होता है और उसमे कितना काला धन लिया जा रहा है। लगभग 2300/- स्क्वेयर फिट के फ्लेट इस इमारत में है, जिनकी कीमत 3465/- रुपये प्रति स्क्वेयर फिट बताई गई है, इस अनुसार फ्लेट की कीमत 7969500/- होती है जिसका 40% ब्लेक मनी लिया जा रहा है, 40% से एक फ्लेट की मिनिमम ब्लेक मनी 3187800/- रुपये होती है, जो की अपने आप में एक आश्चर्य की बात है। जब एक फ्लेट में 3187800/- रुपये की ब्लेक-मनी का लेन-देन किया जा रहा आहे तो इस पूरे प्रोजेक्ट में कितने काले धन का लेन देन किया गया है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

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अब बात करते है की इस logoबिल्डर को आयकर विभाग से डर क्यों नहीं लगता और क्यों यह बिल्डर बे-धड़क काले धन का लेन-देन कर रहा है, तो इसका एक कारण यह बताया जाता है की इसी बिल्डर की एक और कंपनी है जो अकाउंट तथा आयकर संबंधित मामलों में सलाह तथा सेवा देने का काम करती है, जिससे की बताया जाता है की इस कंपनी के कई भागीदारों की दोस्ती आयकर विभाग के अधिकारियों से है, शायद इसी लिए उक्त बिल्डर को यह परवाह ही नहीं की भारत सरकार और आयकर विभाग के नियम क्या कहते है। इस मामले में आगे भी रिपोर्टिंग जारी रहेगी… शेष फिर।