टुकवाड़ा का बड़ा प्रोजेक्ट और काले धन का बड़ा घोटाला, पुराने नोटों की लेन-देन और वो भी करोड़ो में।

टुकवाड़ा का बड़ा प्रोजेक्ट और काले धन का बड़ा घोटाला, पुराने नोटों की लेन-देन और वो भी करोड़ो में। | Kranti Bhaskar
Daman News

वलसाड जिले का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट और सबसे अधिक काले धन कि लेन-देन। बिल्डर को कोई फर्क नहीं पड़ता! आयकर विभाग निंद्रा मेंमोदी के आदेशों का खुलेआम उलंधन! भाजपा के बड़े नेता का निवेश!

देश में काले धन को लेकर जब से भारत सरकार और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने 500 रुपये और हज़ार रुपये के नोट पर कड़ा फ़ैसला लिया है तब से कई धन कुबेरों ने अलग थलग रास्ते निकाल सरकार को चुना लगाने की फिराक में दिखाई देने लगे। अपने पिछले अंक में भी क्रांति भास्कर ने काले धन पर प्रमुखता से एक खबर प्रकाशित किया था, लेकिन अभी तक उक्त खबर या मामले में कोई कोई कार्यवाही देखने को नहीं मिली।

लेकिन इस बार क्रांति भास्कर के पास जो मामला है उसे देखने के बाद शायद सरकार को काले धन पर पूर्णतः नकेल कसने के लिए, कोई और रास्ता इतियार करने के बारे में सोचना पड़ सकता है क्यों कि इस मामले को देखने के बाद लगता है कि जहां आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई के लिए लाइन में लग रहा है वही धन के कुबेर बड़े ही शातिर अंदाज से काले धन को सफ़ेद करने के नए नए रास्ते ख़ोज कर सरकार को धत्ता बता रहे है।

अपने पिछले अंक में क्रांति भास्कर ने काले धन को सफ़ेद करने को लेकर जो ख़बर प्रकाशित कि थी शायद उस ख़बर कि कतरन अभी तक सरकार, प्रशासन और आयकार विभाग के अधिकारियों तक नहीं पहुंची या फिर आयकर विभाग के अधिकारी इस बात का इंतजार कर रहे है कि जिस तरह प्रधान मंत्री श्री मोदी ने टीवी पर आकार 500 और हज़ार के नोट पर अपना फ़ैसला सुनाया था वैसे ही आयकर विभाग के अधिकारियों को भी कार्यवाही करने का फ़ैसला सुनाएँगे उसके बाद ही आयकर विभाग के अधिकारी कार्यवाही करेंगे।

100 करोड़ से अधिक काले धन कि लेन-देन… 

इस बार मामला है वापी में स्थित बड़ी-बड़ी इमारतों का तथा उन बिल्डरों का जो अभी भी काले धन कि मांग इतनी बे-फिक्री से कर रहे है जिनहे शब्दो में बयान किया तो शायद सरकार बुरा मान जाएगी! लेकिन सरकार और आयकर विभाग को यह तो सोचना ही होगा कि इन पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए अब आगे क्या किया जाए।

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बताया जाता है कि वापी में स्थित ऐसे कई बड़े बिल्डर है जो अभी भी काले धन के बिना किसी प्रकार कि कोई प्रॉपर्टी नहीं बेचते, और ना ही उन्हे काले धन पर बने नियम अधिनियम से कोई फर्क पड़ता दिखाई देता है। वैसे तो ऐसे कई बिल्डर है जो बे-धड़क सालों से काला धन लेकर प्रॉपर्टी कि खरीद बिक्री करते रहे है, लेकिन सरकार द्वारा काले धन पर लिए गए फैसले के बाद भी काले-धन कि लेन देन जारी रखने वाले बिल्डरों के कुछ चोकाने वाले नाम और काम सामने आए है।

बताया जाता है कि वलसाड जिले के तुकवाड़ा गांव में अवध ग्रुप द्वारा बनाए गए हीलिकोनिया होम तथा उटोपिया में जो मकान बनाकर ग्राहकों को बेचे जा रहे है तथा उक्त प्रोजेक्ट में जिस प्रकार कि खरीद-बिक्री कि जा रही है वह आयकर विभाग के अनियमों को धत्ता बताने के बराबर है। उक्त बिल्डर सरकार को दिन दहाड़े चुना लगाने का काम कर रहा है और वह भी उस वक्त, जब सरकार काले धन को लेकर इतनी सख्त है।

85 लाख से लेकर 3.5 करोड़ तक का बंगला। 85 लाख के बंगले का होता है 40 लाख का रजिस्ट्रेशन। 

क्रांति भास्कर को जब उक्त प्रोजेक्ट में, काले धन कि लेन-देन तथा काले कारनामों के बारे में जानकारी मिली तो क्रांति भास्कर टिम इस मामले कि पड़ताल करने के लिए, टुकवाड़ा में स्थित हीलिकोनिया होम तथा उटोपीय प्रोजेक्ट के कार्यालय ग्राहक बनकर गई, तो पता चला कि उक्त बिल्डर वास्तव में आयकर विभाग के नियमों को धत्ता बताकर, उक्त प्रोजेक्ट में निवेश करने तथा मकान खरीदने आए ग्राहको से सीधे सीधे बे-हिचक ब्लेक मनी यानि काला धन देने कि मांग कर रहा है। जब उक्त प्रोजेक्ट तथा बिल्डर के कार्यालय में पूछा गया कि एक मकान कि वास्तविक कीमत कितनी है तथा रजिस्ट्रेशन कितनी कीमत का होगा तो साफ साफ बता दिया गया कि 85 लाख से लेकर 3.5 करोड़ तक का मकान है तथा 85 लाख वाले मकान का रजिस्ट्रेशन 40 लाख तक किया जाएगा एवं अन्य 85 लाख से अधिक कीमत वाले मकान का रजिस्ट्रेशन 50 फीसदी किया जाएगा। शायद यह जानकार आयकर विभाग को झटका ना लगे, क्यो कि आयकर विभाग के लिए यह कोई पहला और नया मामला नहीं है ऐसे कई मामले समय समय पर सामने आते रहे है, लेकिन प्रधान मंत्री मोदी को अवश्य यह पढ़ने पर झटका लग सकता है कि उस प्रदेश में काले धन कि लेन-देन इस प्रकार हो रही है, जिस प्रदेश के विकास कि मिशाल देकर वह प्रधान मंत्री का चुनाव लड़े और बहुमत हासिल की।

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बात केवल यही नहीं है कि उक्त बिल्डर, उक्त प्रोजेक्ट में काले धन कि मांग कर रहा है, बल्कि उक्त बिल्डर का यह कहना है कि, अभी तक हमने जिन जिन को मकान बेचा है सभी से, इसी हिसाब के अनुसार काला धन लिया है, और इतना ही रजिस्ट्रेशन किया है जितना आप को बता रहे है।

यहाँ 500 और हजार के पुराने नोट भी चलते है….  

इस पर बिल्डर का यह कहना आयकर विभाग को और भी चोका देने वाला है कि जीतने भी 500 और हजार रुपये के नोट है हम लेने को तैयार है, हम ले रहे है, हमने लिए है, और आप भी जितना चाहे दे सकते है। उक्त बिल्डर द्वारा बताया गया कि यदि आप पूरा पैसा अभी काले धन के रूप में देना चाहे या पूरा नगद 500 रुपये या 1000 रुपये के पुराने नोट में दे सकते है, हमने कई ग्राहको से करोड़ो की नगदी ली है और वह भी 500 रुपये और हजार रुपये के पुराने नोटो के रूप में, बिल्डर का कहना है कि, हम बाद में रजिस्ट्रेशन के समय, जितनी रकम का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा उतना नगद आपको वापस देकर आपसे उतनी रकम का चेक लेकर आयकर विभाग को दिखा देंगे।

इस पूरे मामले को देखने के बाद लगता है कि इस बिल्डर कि पहोच और पकड़ या तो बहोत ऊपर तक है या फिर आयकर विभाग के अधिकारियों को पता ही नहीं कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने काले धन को लेकर, इस देश और प्रशासन को क्या निर्देश दिए है, क्यों कि यह मानना तो मुमकिन नहीं लगता कि आयकर विभाग उक्त प्रोजेक्ट में चल रहे काले धन के लेनदेन से अंजान हो क्यों कि ना ही उक्त प्रोजेक्ट छोटा बताया जाता है और ना ही उक्त प्रोजेक्ट के मालिक कि पहोच।

देश में प्रधान मंत्री द्वारा काले धन को लेकर चलाई गई इस मुहिम को देखते हुए आयकर विभाग को चाहिए कि तत्काल उक्त प्रोजेक्ट पर अपनी छापेमारी करे, तथा पता लगाए उक्त प्रोजेक्ट किस किस ने कितना कितना काला धन निवेश किया है तथा वास्तव में कितना काला धन बिल्डर को दिया तथा निवेशक ने कितना बताया?

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दमन-दीव, गोपाल टंडेल का बड़ा घोटाला! 3.5 करोड़ के दो बंगलो का नगद भुगतान!

हालांकि इस मामले में कुछ ख़ास निवेशकों के नाम भी क्रांति भास्कर के पास आए है, लेकिन तमाम निवेशकों की लिस्ट के लिए तो आयकर विभाग को ही छापेमारी करनी होगी। उक्त मामले कि पड़ताल के तहत क्रांति भास्कर कि टिम को पता लगा कि दमन-दीव के गोपाल टंडेल ने 3.5 करोड़ के दो बंगले यानि कुल 7 करोड़ कि प्रॉपर्टी एक साथ पूरा पूरा नगद देकर उक्त बिल्डर से लिए है, इस बात कि पुष्टि बिल्डर द्वारा सवय की गई तथा बताया गया की गोपाल टंडेल ने पूरा पैसा नगद दिया है तथा 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोट में दिए है, अब इसके आगे कि जानकारी आयकर विभाग को निकालनी होगी कि इतनी बड़ी रकम 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट में गोपाल टंडेल कहाँ से लाए और किस से लाए, तथा गोपाल टंडेल उक्त बंगलो का रजिस्ट्रेशन किसके नाम पर करने वाले है तथा कब करने वाले है यह सब जांच का विषय है।

यदि इस पूरे प्रोजेक्ट में हुई अनियमियतता तथा काले धन कि बारीकी से जांच कि जाए तो और कई चौकाने वाले राज़ सामेन आ सकते है, लेकिन पूरे मामले कि जांच केवल आयकर विभाग के बस कि बात नहीं दिखाई देती, इस मामले कि पूरी जांच के लिए सीबीआई को आगे आने कि जरूरत! क्यों कि सूत्रो का कहना है कि ऐसे और कई धन कुबेर है जिनहोने अपने काले धन का निवेश उक्त प्रोजेक्ट में किया है लेकिन वास्तविकता और हकीकत कि टोह तो केवल जांच के मापदंडो पर ही ली जा सकती है! शेष फिर।

फॉर्च्यून ग्रुप, बलार ग्रुप, प्रमुख ग्रुप तथा सोलिटायर जैसे कई बिल्डरों द्वारा काले-धन कि लेंन-देन पर बड़ा खुलासा जल्द…

अवधग्रुप बना काले धन की लेन-देन करने का बड़ा अड्डा।

दिन दहाड़े सरकार को करोड़ो का चुना।  

काले धन पर बड़ा खुलासा, करोड़ो का चुना लगाने वाले बिल्डर बे-नकाब!  

आयकर विभाग कब लेगा संज्ञान?