फोरचून ग्रुप के कई प्रोजेक्टो में काले धन कि लेन-देन।

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नोट बंदी सबको याद होगी ओर शायद ही ऐसा कोई हो जिसने नोट बंदी के समय में दिक्कतों का सामना ना किया हो। जब नोट बंदी हुई तब जनता को ऐसा लगने लगा कि अब काले-धन का लेन-देन नहीं हो पाएगा। लेकिन क्या किसी ने सपने में भी सोचा था कि वापी कि जिस इमारत में आयकर विभाग का कार्यालय स्थित है उसी इमारत के मालिक का नाम सबसे अधिक काले-धन कि लेन-देन में लिया जाएगा?

मामला कुछ ऐसा ही है। वापी चला में, रॉयल फोरचून स्क्वेयर नाम कि इमारत है ओर इसी इमारत में आयकर विभाग का कार्यालय है, हालांकि आयकर विभाग ने उक्त कार्यालय किराए पर ले रखे है। लेकिन जिस बिल्डर द्वारा उक्त इमारत बनाई गई ओर आयकर विभाग को कार्यालय किराए पर दिए गए, उस बिल्डर के प्रोजेक्टो में काले-धन की लेन-देन के चर्चे, कही ना कही अब आयकर विभाग के अधिकारियों कि सफ़ेद कमीज पर काला दाग लगाने का काम कर रहे है।

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चला कि जिस इमारत में आयकर विभाग के कार्यालय है उस इमारत का नाम रॉयल फोरचून स्क्वेयर है ओर बिल्डर का नाम दर्शक शाह है। वापी, दमण तथा सिलवासा में दर्शक शाह के कई निर्माणाधीन कंस्ट्रक्सन प्रोजेक्ट है ओर उन प्रोजेक्टो में काले-धन की लेन-देन धड्डे से की जा रही है। फॉर्च्यून ग्रुप के प्रोजेक्टो में काले धन कि लेन देन, आयकर अधिकारियों कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। वैसे फॉर्च्यून के कुल कितने प्रोजेक्ट है तथा किस प्रोजेक्ट में कुल कितने काले धन कि लेन देन कि गई है, फ्लेट तथा दुकान किस कीमत में बेची जा रही है ओर किस कीमत का दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है इसकी जांच अब आयकर विभाग के अधिकारियों को करनी चाहिए। शेष फिर।

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क्या एसबीआई बेंक कि दुकान किसी आयकर अधिकारी के परिवार के सदस्य के नाम पर है?
चला में स्थित रॉय ल फोरचून स्क्वेयर बिल्डिंग में एसबीआई बेंक है, इस बेंक के बारे में भी बाजार में चर्चा है कि उक्त दुकान किसी आयकर अधिकारी के परिवार के सदस्य के नाम पर है! यह चर्चा कितनी सही है इसका पता तो जांच के बाद चलेगा। आयकर विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि इस मामले में जांच कर पता लगाए कि इस बेंक का किराया किसे मिलता है? इस दुकान का मालिक कोन है, बिल्डर ने दुकान किसे बेची ओर कितनी रकम में बेची? इसकी जांच भी आयकर विभाग के अधिकारियों को करनी चाहिए।