स्वामीनारायण, या पेनल्टी नारायण, वापी की गुरुकुल स्कूल?

  • शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन लगाए, गुरुकुल की मनमानी पर लगाम।
  • उंची पेनल्टी वसूल कर, बच्चों के भविष्य और परिवार की जेबों पर गुरुकुल डाल रहा है डाका।

वापी की स्वामीनारायण स्कूल की इमारत, व्यवस्था और यहां की चका-चोंध देख कर कहीं से यह नहीं लगता की यह किसी पांच सितारा होटल से कम है। लेकिन मजे की बात यह की यहां की शिक्षा व शिक्षा शुल्क भी पांच सितारा में आने वाले बिल से कम नहीं, और उस पर लेट-फी की पेनल्टी, भाई पेनल्टी में तो यह यहां का पेनल्टी किंग ही कहा जाएगा, अन्यथा इसकी जितनी पेनल्टी है और यह जितनी लेट-फी वसूल करता है इतना ब्याज तो दुनिया की कोई बेंक नहीं दे सकती। भला 3000/- रुपये पर एक हजार रुपये की पेनल्टी किसे कहते है यह तो वह माँ-बाप जाने जिनहोने अपने बच्चों के सफल भविष्य का सपना देखा, सोचा होगा उनका बच्चा अच्छी शिक्षा लेकर उनके बुढ़ापे का सहारा बनेगा, उन्हे क्या पता था की यहां का शिक्षा शुल्क और उस पर लगी पेनल्टी उन्हे ऐसी शिक्षा देगा कि भूढ़ापा आने से पहले ही, उनका आज शुल्क के बोझ तले तहस-नहस हो जाएगा।
आम जनों की माने तो यहां पेनल्टी के अलावा भी ऐसे कई शुल्क वसूले जाते है जिनकी रशीद तक नहीं मिलती, शिकायत करे तो कहां करे बच्चों के भविष्य का जो सवाल है यही सोच कर माँ-बाप मोन रहना ही उचित समझते है जिसके चलते प्रबंधन की मनमानी में इजाफा होता जा रहा है, कभी दाखिले के नाम पर तो कभी शुल्क के नाम पर, तो कभी पेनल्टी के नाम पर बस इस शिक्षा का गुरु और माइबाप केवल पैसा ही दिखाई देता, वह भी ऐसा जिस की कोई गारंटी नहीं, मतलब आप जितना चाहे धन देदे रिजल्ट के लिए तो आप स्वयम ही ज़िम्मेवार बताए जाएंगे, वाह रे प्रशासन।

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यह बात यही तक नहीं रुकती, बात है व्यवस्था की, शिक्षा की, प्रशासन की जवाबदेही की, जहां शिक्षा को लेकर सरकार हमेशा इतने वादे करती रहती है, जहां शिक्षा को एक महान दान बताया गया है वहां इस प्रकार की व्यवस्था और प्रबंधन आखिर क्या साबित करना चाहते है यह तो वहीं जाने लेकिन प्रशासन को इस मामले में सोचने की जरूरत है, सोचने की जरूरत है कि आखिर वह बच्चे कहां जाए, जिनके माँ-बाप पेनल्टी नहीं भर सकते और पेनल्टी के नाम पर चल रही इस वसूली का स्कूल प्रबंधन क्या करती है, क्या सरकार ने स्कूल प्रबंधन को इस प्रकार की पेनल्टी वसूलने की छूट दी है, यदि दी है तो सवाल सरकार पर उठते है, और यदि नहीं दी फिर प्रशासन तत्काल इस मामले में संज्ञान लेने की जरूरत है।