उदवाड़ा का यह ठेकेदार, ठगो के सरदार से कम नहीं!

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Rajesh Bihar

वलसाड जिले एवं दमन की इकाइयों में ठेका चलाने वाली कंपनी सुनेना कॉर्पोरेशन के बारे में काफी चौकाने वाली जानकारिया मिली है, लेबर कोंट्रेक्टर का ठेका चलाने वाली कंपनी का नाम सुनेना कॉर्पोरेशन बताया जाता है और उक्त कंपनी के रजिस्ट्रेशन में दिया गया पता तो वलसाड जिले के उदवाड़ा गाँव का है वैसे उदवाड़ा गांव की जिस जगह सुनेना कोपोरेशन ने रजिस्ट्रेशन करवाया है वह कोई कार्यालय नहीं है वैसे इस मामले में कभी और विस्तार से चर्चा करेंगे, फिलवक्त तो यह जान लीजिए की गुजरात तथा दमन के श्रम निरक्षक की आँखों में धूल झोंकने के लिए एवं पी-एफ विभाग के अधिकारियों को अंधेरे में रखने के लिए, सुनेना कॉर्पोरेशन के नाम पर दमन के भीमपोर क्षेत्र से, दमन तथा वलसाड की कई इकाइयों में लम्बे समय से इस कंपनी द्वारा ठेका चलाया जा रहा है और बड़े धद्द्ले से सरकारी तीजोरी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।  

बताया जाता है कि उक्त कंपनी मजदूरो के हकों का पैसा भी हड़प कर जाती है, ना ही पी-एफ मिलता है ना ही समय पर मजदूरी मिलती है, मजदूरो के साथ गाली-गलोच और दुर्व्यवहार तो मानो आम बात है, कई बार सुनेना कॉर्पोरेशन के मालिक राजेश चोधरी के दुर्व्यवहार और श्रमिकों के साथ धोखा-धड़ी के मामले सामने आ चुके है, श्रमिकों को समय पर वेतन ना देने तथा श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार करने के कारण, पूर्व में श्रमिकों ने सुनेना कॉर्पोरेशन के मालिक राजेश चोधरी की कई बार जमकर पिटाई भी की थी लेकिन इस पिटाई के बाद ना ही राजेश चोधरी की करतूते बदली ना ही श्रम विभाग एवं पी-एफ विभाग के अधिकारियों की नींद उडी, बताया जाता है की आज भी इस ठेकदार द्वारा श्रमिकों का शोषण जारी है।

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श्रमिकों द्वारा पूर्व में हुई राजेश चोधरी की पिटाई की कुछ तस्वीरे क्रांति भास्कर के हाथ लगी है इन तस्वीरों को देखने के बाद अब तो श्रम विभाग को नींद से जाग जाना चाहिए और यह पता लगाना चाहिए की जब से सुनेना कॉर्पोरेशन ने ठेकेदारी का काम शुरू किया है तब से अब तक उक्त ठेकेदार ने किन किन इकाइयों में कितने कितने श्रमिकों का ठेका चलाया और कितने श्रमिका शोषण कर उनके पी-एफ का पैसा हड़प किया।     

बताया यह भी जाता है कि पिछले कई वर्षों से सेकड़ों श्रमिकों का पी-एफ हड़प करने के बाद भी उक्त ठेकदार बदस्तूर पी-एफ चोरी जारी रखे है, क्रांति भास्कर ने इस मामले में पी-एफ अधिकारियों से बात की तो पता चला की उक्त कंपनी ने कभी पी-एफ भरा ही नहीं, जबकि उक्त कंपनी सवय इस बात का दावा कर रही है की उसके सेकड़ों श्रमिक दमन की दर्जनों इकाइयों में सालों से काम कर रहे है, अब इसे खुली लूट समझे या अधिकारियों की ढील यह तो अधिकारी सवय करे।

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वैसे इसके अलावे इससे पहले भी उक्त ठेकदार की एक और कंपनी थी जिसका नाम भारती कॉर्पोरेशन बताया जाता है उक्त कंपनी में भी उक्त ठेकदार ने करोड़ो की टैक्स चोरी की है ऐसी जानकारी मिली है लेकिन वास्तव में कितनी चोरी की गई यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन भारती कॉर्पोरेशन में टैक्स घोटाला करने के बाद उक्त ठेकदार को सुनेना कॉर्पोरेशन के नाम पर पुनः ठेका चलाने का लाइसेन्स कैसे मिला यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है।  

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श्रमिकों का शोषण, श्रमिकों के साथ अत्याचार, दुर्व्यवहार और श्रमिकों की मेहनत की कमाई हड़प करने वाले श्रमिकों की नजर में यह ठेकेदार किसी ठगो के सरदार से कम नहीं, वैसे इस ठेकेदार को ठगो का सरदार इस लिए भी कहा जा रहा है क्यो की श्रमिकों को सुविधा के लिए जो राशन, बर्तन कपड़े इत्यादि, ठेकदार दुकानदार से उधार लेकर श्रमिकों को देता है उनके पैसे तो श्रमिक के वेतन में से काट लिए जाते है लेकिन बर्तन, राशन और कपड़े देने वाले दुकानदार को केवल चकार ही कटाए जाते है, किसी को कभी ना पास होने वाला चेक देकर लौटा दिया जाता है तो किसी को चक्कर कटा कटा के थका दिया जाता है, दमन तथा वापी के कई दुकानदार भी काफी लंबे समय से इस ठग ठेकदार को ढूंढ रहे है लेकिन अब तक उक्त ठेकदार किसी के हाथ नहीं आया।

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वलसाड श्रमिक विभाग, दमन श्रमिक विभाग एवं वलसाड पी-एफ विभाग को सुनेना कॉर्पोरेशन एवं भारती कॉर्पोरेशन की बारीकी से पूरी जांच कर यह पता लगाने की आवश्यकता है की अब तक उक्त ठेकेदार ने कितनी कंपनियो में ठेके चलाए और कितने श्रमिकों का पी-एफ चोरी किया। शेष फिर।