वापी पर्यावरण, प्रदूषण और भ्रष्टाचार।

वापी के प्रदूषण पर क्रांति भास्कर की ख़ास रिपोर्ट, 15 दिन के अंतराल में गज्जर और 3 माह के अंतराल में नाइडु लेते है नमूना! | Kranti Bhaskar
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VAPI : वापी में स्थित ओधोगिक इकाइयों के प्रदूषण की शिकायते करने के बाद भी यदि जीपीसीबी के अधिकारी नियमानुसार कार्यवाही नहीं करते तो इसका एक ही मतलब निकलता है कि जीपीसीबी के अधिकारी नाकारा कामचोर और भ्रष्ट है। वापी की औधोगिक इकाइयों द्वारा छोड़े जाने वाले गंदे पानी में कितना ज़हर है और यह गंदा पानी कितना घातक है इसकी जानकारी तो जनता को नहीं, लेकिन जनता जब भी किसी नदी में कलर वाला गंदा ओर प्रदूषित पानी देखती है तो उसे पता चल जाता है की यह ओधोगिक इकाइयों द्वारा छोड़ा गया गंदा ओर जहरीला पानी है। जनता को पर्यावरण संबन्धित नियमों की उनती जानकारी नहीं जितनी जीपीसीबी के अधिकारियों को है इसके बाद भी जनता जीपीसीबी के अधिकारियों से अधिक सतर्क दिखाई देती है क्यो कि जनता भ्रष्ट नहीं है।

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अभी कुछ दिनों पहले वापी की बिलखाड़ी में ऐसा ही हरे रंग का गंदा ओर जहरीला पानी देखने को मिला। कुछ लोगो ने सबूत के तौर पर इस हरे रंग के प्रदूषित पानी की तस्वीरे भी ली, कुछ लोगो ने पानी को बड़े ध्यान से यह सोचकर देखा कि शायद शायद पानी के किसी हिस्से पर इस प्रकार प्रदूषण छोड़ने के लिए जीपीसीबी के अधिकारियों द्वारा ली गई रकम के आंकड़े भी लिखे हो, लेकिन लोगो को पानी में रंग और प्रदूषण के अलावा कुछ नहीं दिखा। वैसे यदि सरकार चाहे तो जीपीसीबी के अधिकारी से यह सवाल कर सकती है यह हरे रंग का प्रदूषित पानी किस इकाई का है ओर जीपीसीबी के अधिकारियों ने उस कंपनी से कितने रुपयों की रिश्वत ली? खेर अब सरकार यह सवाल जीपीसीबी के अधिकारी से करे या ना करें, जनता तो सवाल कर रही है ओर जनता को जवाब भी चाहिए।