बार एण्ड रेस्टोरेन्ट के लाइसेन्स में कितनी रकम वसूली गई? सीबीआई से जांच करवाए आबकारी आयुक्त।  

Silvassa Patang Bar News
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संध प्रदेश दादरा नगर हवेली में मिहिर जैसे और कितने माहिर खिलाड़ी है और इस गड़बड़झाले जैसे और कितने गड़बड़झाले, निरीक्षक मिहिर के हाथो अंजाम दिए गएइसका पता जांचएजेंसियों को लगाना चाहिए। वैसे एक समय ऐसा भी रहा, जब मिहिर स्वय सतर्कता विभाग में थे, तो इसका मतलत कही यह तो नहीं की उन्हे सतर्कता विभाग की कार्यवाही का कोई भय ही ना हो? अब इस प्रकार की चर्चाए एवं सवाल क्यो हो रहे है यह भी जान लीजिए।

मामला है दादरा नगर हवेली मेंआबकारी विभाग के निरीक्षक मिहिर द्वारा नियमो को धतता बताते हुए तथा अपने पद एवं अधिकारो का दुरुपयोग करते हुएनरोली सिलवासा रोड़ पर,होटल-के पासपुष्पविजय सिंह चंदर्सिनह परमार को पतंग होटल के नाम से बार एण्ड रेस्टोरेन्ट चलाने का लाइसेन्स जारी किए जाने का।

सर्वप्रथम, जून माह में यह मामला सामने आया था, मामले में कितनी सत्यता है तथा बार एण्ड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी किया गया है या नहीं? इस बारे में आबकारी निरीक्षक मिहिर से सवाल भी किए, लेकिन मिहिर ने सभी सवालो से किनारा कर लिया, इस पर क्रांति भास्कर द्वारा दिनांक 11 जून 2018 को प्रमुखता से एक ख़बर प्रकाशित की गई थी तथा प्रशासन से इस मामले में जांच की मांग के साथ साथ नियमो को धतता बताने वाले अधिकारियों पर भी ठोस कार्यवाही की जाने की मांग की गई थी। लेकिन जांच तो हुई नहीं, उल्टा हुआ यह कि,नरोली सिलवासा रोड़ पर पतंग होटल के बार एण्ड रेस्टोरेन्ट का बोर्ड लग गया।

अब जब बोर्ड लगा ही दिया गया है तो इस में कोई दो राय नहीं की लाइसेन्स जारी नहीं हुआ, और लाइसेन्स जारी हुआ है तो इसमे भी कोई दो राय नहीं की इस लाइसेन्स जारी करने की प्रक्रिया में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ? यह और बात है की मामला लाखो का है या करोड़ो का? मामले में केवल निरीक्षक मिहिर शामिल है या मिहिर से भी बड़े बड़े माहिर खिलाड़ियो का हाथ है? यह सब तो जांच का विषय है। इस पूरे मामले में मिहिर ने पतंग होटल को बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी करने के लिए कितनी रकम वसूली है इसकी अब सीबीआई से जांच करवानी चाहिए।

ऐसे लाइसेन्स के लिए करोड़ो की रिश्वत देने और लेने की चर्चाए!

यह जांच इस लिए भी होनी चाहिए क्यो की जब जमीन ही नहीं तो बार एण्ड रेस्टोरेन्ट कैसा, कहने का मतलब यह है की पतंग बार एण्ड रेस्टोरेन्ट के पास पार्किंग की जमीन ही नहीं है तो फिर उक्त पतंग बार एण्ड रेस्टोरेन्ट में आने वाले वाहनो की पार्किंग आबकारी विभाग अपने कार्यालय में करवाएगा? क्या आबकारी विभाग के निरीक्षक इस प्रकार की नई परंपरा इजात करने जा रहे है? क्या समाहर्ता को इस मामले में पूरी जानकारी है? आबकारी आयुक्त को पता है की उनकी नाक के नीचे क्या हो रहा है? क्या समाहर्ता को पता है कि बिना पार्किंग की जगह पर बार एण्ड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स देने और लेने के लिए, करोड़ो की रिश्वत देने और लेने की चर्चाए बाजार हो होती रही है?   

लाइसेन्स प्रक्रिया का हाल देखकर, आबकारी और ओ-आई-डी-सी की कार्यप्रणाली भी शंकास्पद!

जब एक बार एण्ड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी करने में इतना घाल-मेल सामने आया है तो तो दानह के तमाम बार एण्ड रेस्टोरेन्ट को ओ-आई-डी-सी तथा आबकारी विभाग द्वारा शराबआवंटन में कितना घाल-मेल गोल-माल किया जा रहा होगा? क्रांति भास्कर को ओ-आई-डी-सी तथा आबकारी विभाग द्वारा शराब आवंटन के संबंध में भी काफी चौकाने वाली जानकारियाँ मिली है लेकिन उन जानकारियों पर अभी सत्यता की पड़ताल बाकी है जल्द क्रांति भास्कर इस शराब आवंटन में हुई गदबड़ियों को प्रशासन एवं जनता के सामने ईमानदारी से परोसेगी!शेष फिर।

इस मामले में प्रकाशित अन्य ख़बरे पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। 

दानह आबकारी निरीक्षक मिहिर भी घोटाले में माहिर, सरकारी जमीन को पार्किंग बताकर बार एंड रेस्टोरेन्ट का लाइसेन्स जारी करने की चर्चा जोरों पर।

लाइसेन्स के बिना OIDC से शराब कैसे मिली और पार्किंग के बिना लाइसेन्स कैसे मिला? दानह प्रशासन सवालो के घेरे में।

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