वापी के प्रदूषण पर क्रांति भास्कर की ख़ास रिपोर्ट, 15 दिन के अंतराल में गज्जर और 3 माह के अंतराल में नाइडु लेते है नमूना!

वापी के प्रदूषण पर क्रांति भास्कर की ख़ास रिपोर्ट, 15 दिन के अंतराल में गज्जर और 3 माह के अंतराल में नाइडु लेते है नमूना! | Kranti Bhaskar
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वापी की इकाइयो को प्रदूषण फैलाने के लिए तथा खुली छूट देने हेतु प्रतिमाह एवं सालाना कितना शुल्क वसूलते है वापी जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी गज्जर? अत्याधिक प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयो से प्रतिमाह कितनी होती है वसूली? किस किस में बांटा जाता है इस अवैध वसूली का काला पैसा?

वापी में स्थित इकाइयो के प्रदूषण का नज़ारा तो आपने क्रांति भास्कर के पिछले अंक में देखा ही होगा, यदि नहीं देखा तो क्रांति भास्कर की वेबसाइट पर जाकर, उक्त अंक में प्रकाशित ख़बर पर एक नज़र अवश्य डाल लीजिए, उक्त खबर को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए ( Click ) साथ ही साथ वापी दमण गंगा नहीं में छोड़े जा रहे प्रदूषण का वह भयावह वीडियो भी देख लीजिए जिसे क्रांति भास्कर ने अपनी वेबसाइट पर उपलोड किया है। इस वीडियो में आप देखेंगे की गंदा और काला पानी दमन गंगा नदी में बहाया जा रहा है, लेकिन वास्तव में इसका सच कुछ और ही है। वैसे अगर आपको वीडियो से यह पता नहीं चल पाए की उक्त काला पानी कहा से आया और यह कितना घातक है तो इसमे कोई ताज्जुब की बात नहीं है, उक्त वीडियो में दिखाई देना वाला पानी आम गंदे पानी की तरह ही दिखाई देता है लेकिन इसमे और आम दिखने वाले गंदे पानी में कितना अंतर है यह जानकार आपके होश अवश्य उड़ जाएंगे।

इस वीडियो में बहते काले पानी के बारे में पूरी सच्चाई जाने से पहले आप यह भी जान लीजिए की उक्त काला पानी कहा से आया और कैसे आया। आपको बता देते है की उक्त काला गंदा पानी वापी में स्थापित इकाइयो के साथ साथ उन केमिकल्स उत्पादन करने वाली इकाइयो का है जिनका उत्पादन कई राज्यो में प्रतिबंधित बताया जाता है। आपको शायद ही इस बात की जानकारी हो कि वापी क्षेत्र में ऐसी कई इकाइयां स्थापित है तथा ऐसे पदार्थो का उत्पादन बदस्तूर जारी रखे है जिनके उत्पादन पर भारत देश के कई राज्यो में प्रतिबंध बताया जाता है केवल इतना ही नहीं वापी में ऐसी भी कई इकाइयां अपना उत्पादन जारी रखे है जिनके उत्पादन पर भारत देश के बाहर अन्य देशो में भी प्रतिबंध बताया जाता है। अब सीधी सी बात है की जिन इकाइयो के उत्पादन पर अन्य राज्य अथवा देशो में प्रतिबंध हो उनके उत्पादन के बाद ऐसे ही केमिलक्स युक्त काले पानी की उम्मीद की जा सकती है।

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लेकिन इस मामले के अंदर का मामला अभी बाकी है और वह यह है की उक्त तमाम इकाइयो के उत्पादन पर नज़र रखने तथा उन तमाम इकाइयो द्वारा छोड़े जा रहे प्रदूषण पर नियंत्रण रखने के लिए, गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय वापी में स्थित है और उक्त क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारी का नाम गज्जर बताया जाता है जिनका यह जिम्मा है की वह उक्त तमाम इकाइयो के उत्पादन पर नज़र रखे तथा बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगा सके। वही इकाइयो पर नज़र रखने के साथ साथ दमन गंगा नदी में सी-ई-टी-पी द्वारा छोड़े जा रहे प्रदूषित गंदे पानी पर भी नियमित नज़र रखने का जिम्मा गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी गज्जर का है, बताया जाता है 15-15 दिनों के अंतराल में गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी वापी के सी-ई-टी-पी प्लांट द्वारा दमन गंगा नहीं में छोड़े जाने वाले गंदे पानी का नमूना भी लेते है और उसकी जांच भी करवाते है।

वैसे गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अधिकारी गज्जर के अलावे एक और अधिकारी भी है जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नियुक्त किए गए है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक कार्यालय गुजरात के बरोड़ा में स्थित है उक्त कार्यालय के मुख्य अधिकारी बी-आर नाइडु है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बरोड़ा कार्यालय एवं बी-आर नाइडु के जिम्मे भी सी-ई-टी-पी की देख रेख आती है। उक्त कार्यालय से गुजरात तथा महाराष्ट्र दो राज्यो के सी-ई-टी-पी पर नज़र रखी जाती है। बरोड़ा में स्थित केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के कार्यालय एवं संबन्धित अधिकारियों द्वारा भी 3-3 माह के अंतराल में वापी सी-ई-टी-पी द्वारा दमन गंगा नदी में छोड़े जाने वाले प्रदूषित जल का नमूना लिया जाता है और उस नमूने की नियमानुसार जांच होती है।

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इतनी देख-रेख के बाद उधोगपति इन तमाम अधिकारियों को चकमा देकर मनमाना प्रदूषण फैलाए यह बात तो हज़म नहीं होती, क्यो की इकाइयो द्वारा छोड़ा जाने वाला अधिकतर गंदा पानी वापी सी-ई-टी-पी से होते हुए दमन गंगा नहीं में छोड़ा जाता है और उसी सी-ई-टी-पी द्वारा दमन गंगा नदी में छोड़े जाने वाले प्रदूषित पानी पर नज़र रखते हुए, 15 दिन के अंतराल में गुजरात प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्रीय अधिकारी गज्जर नमूना लेते है और 3 माह के अंतराल में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी बी-आर नाइडु। ऐसे में यह मानना तो मुमकिन नहीं की उधोगपति इन दोनों अधिकारियों की आँखों में धूल झोंक प्रदूषण फैला रहे है। ऐसे में अब जो आंखो के सामने दमन गंगा नदी के प्रदूषण का नजारा दिखाई देता है उसे देखने के बाद यही लगता है की गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी गज्जर, प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयो का साथ देकर अपनी जेबे गरम करने में लगे है इस मामले में अधिक शंका गज्जर पर इस लिए भी है क्यो की सी-ई-टी-पी के अलावे गज्जर के जिम्मे प्रदूषण फैलाने वाली वह तमाम इकाइया भी आती है जिनका केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से कोई सीधा संपर्क नहीं।

वैसे गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी गज्जर, वापी की इकाइयो को प्रदूषण फैलाने के लिए तथा खुली छूट देने हेतु प्रतिमाह एवं सालाना कितना शुल्क वसूलते है और किस किस में बांटते है इसकी कुछ एक जानकारी क्रांति भास्कर की टीम के हाथ लगी है मिली जानकारी की सत्यता पर पड़ताल कर क्रांति भास्कर उक्त मामले का पूरा खुलासा करेगी। शेष फिर।

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