NGT द्वारा लगाए गए 10 करोड़ के जुर्माने से भी नहीं सुधरा सीईटीपी।

Vapi News

अभी कुछ समय पहले की ही बात है जब ख़बर आई की NGT ने वापी सीईटीपी पर 10 करोड़ का जुर्माना लगा दिया है। इस ख़बर के बाद वापी के उधोग जगत में खलबली मच गई। उधोगिक इकाइयों के आकाओ के पैरो तले जमीन खिसक गई। जीपीसीबी के अधिकारियों के भी होश उड़ गए, लेकिन इस सबके बाद भी दमण गंगा को न्याय मिलता नहीं दिखाई दे रहा है। दमण गंगा नदी आज भी उसी दुर्दशा में है जिस दुर्दशा के चलते एन-जी-टी ने वापी सी-ई-टी-पी पर 10 करोड़ का जुर्माना लगाया।

वैसे पूर्व में क्रांति भास्कर द्वारा, वापी सीईटीपी के प्रदूषण का वीडियो लिया गया था तथा हाल ही में एनजीटी द्वारा जुर्माना लगाने के बाद दिनांक 25 फरवरी 2019 को भी क्रांति भास्कर द्वारा वापी सीईटीपी के प्रदूषण का जो वीडियो लिया है अब अगर दोनों वीडियो को देखे तो ऐसा लगता है की एन-जी-टी द्वारा लगाए गए जुर्माने के बाद दमणगंगा का प्रदूषण बढ़ गया है।

ये भी पढ़ें-  वापी पर्यावरण, प्रदूषण और भ्रष्टाचार।

दिनांक 25 फरवरी 2019 को लिए गए वीडियो को देखकर लगता है की वापी में प्रदूषण फैलाने वाली तथा वापी सीईटीपी के संचालको को एनजीटी का कोई भय नहीं शायद इन्हे लगता है जिस तरह अपने पैसे और ऊंची पहुँच के दम पर वापी जीपीसीबी के अधिकारियों को मेनेज करते आए है उसी तर्ज पर एनजीटी से भी निपट लेंगे!  

वापी की औधोगिक इकाइयों के प्रदूषण मुद्दे पर दिल्ली एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) द्वारा वापी सीईटीपी पर 10 करोड का जुर्माना लगाया गया है। लेकिन वापी सीईटीपीद्वारा दमण गंगा नदी में छोड़े जाने वाले प्रदूषण को देखकर कही से यह नहीं लगता की वापी सीईटीपी, वापी के उधोगों तथा जीपीसीबी को इसकी कोई परवाह है यह और बात है की जुर्माना से राहत के लिए वापी सीईटीपी भरपूर प्रयास कर रही है लेकिन प्रदूषण खत्म करने का कोई प्रयास नहीं दिखाई देता। जुर्माने के अलावे एनजीटी ने केंद्रीय प्रशासन को दो कमिटी गठित करने का आदेश भी दिया है। लेकिन उक्त कमिटी वापी सीईटीपी, वापी की औधोगिक इकाइयों एवं वापी जीपीसीबी के अधिकारियों की करतूतों से कितनीअवगत हो पाती है यह तो समय बताएगा।

  • 10 करोड़ का जुर्माना लगने से पहले का वीडियो
ये भी पढ़ें-  उधोगपति का अपहरण करने वाले 6 आरोपी गिरफ्तार

  • 10 करोड़ का जुर्माना लगने के बाद का वीडियो

एनजीटी ने 10 करोड़ का जुर्माना लगाकर यह साफ़ कर दिया की पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी इकाई को बखसा नहीं जाएगा। लेकिन बरोड़ा स्थित सीपीसीबी केज़ोनल अधिकारी तथा वापी जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी की लापरवाही और कमाउनीति से अब तक शायद एनजीटी भी अनभिज्ञ है, एनजीटी के आदेशानुसार केंद्रीय प्रशासन ने जिन दो कमिटियों का गठन किया, उन दो कमिटीयो को बरोड़ा स्थित सीपीसीबी के ज़ोनल अधिकारी तथा वापी जीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी की कार्यप्रणाली की जांच भी करनी चाहिए। क्यो की अधिकारियों की मिलीभगत के बिना वापी सीईटीपी, दमण गंगा को प्रदूषित नहीं कर सकती। अब कितने अधिकारी दमण गंगा को के प्रदूषण में भागीदार है और कितने अधिकारियों ने दमण गंगा के प्रदूषण के नाम पर कितनी कमाई की यह सभी पता लगाना तो जांच एजेंसियो का काम है यदि केंद्रीय प्रशासन उक्त मामले में संबन्धित अधिकारियों की जांच नहीं करवाती तो पर्यावरण की रक्षा हेतु सवय एनजीटी को संबन्धित अधिकारियों की जांच के आदेश देने चाहिए तभी वापी की दमण गंगा नदी का प्रदूषण बंद होगा। शेष फिर।

ये भी पढ़ें-  VIA में जी.एस.टी. के प्रति जागरूकता के लिए विशेष सेमिनार का आयोजन 

यह ख़बरे भी पढ़े