ग्राहको के पैसे से प्रमुख के प्रोजेक्ट, रेरा नियमो का सरेआम उलंधन!

Pramukh Nakshatra - 700 Flat Silvassa
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सूरत, वापी तथा सिलवासा में प्रमुख ग्रुप के कई प्रोजेक्ट है। सूरत में प्रमुख आर्यन, ओरबिट-1 ओरबिट-2, वापी में प्रमुख औरा, प्रमुख सहज़, सिलवासा में प्रमुख गार्डन्स, प्रमुख संगम, योगिमिलन, ओर प्रमुख नक्षत्र। इन प्रोजेक्टो में से वापी में स्थित दोनों प्रोजेक्ट, प्रमुख औरा तथा प्रमुख सहज़ में कई प्रकार की अनियमितताएँ सामने आ चुकी है।
बिल्डर उक्त दोनों प्रोजेक्टो में पार्किंग के नाम पर ग्राहको से 50 हज़ार से लेकर 1 लाख रुपये प्रति पार्किंग वसूल रहा है, इसके अलावे प्रति फ्लेट 3 लाख के आस पास का काला धन भी वसूल रहा है। वापी में स्थित उक्त दोनों प्रोजेक्ट, कुल 1180 फ्लेट का प्रोजेक्ट है। अब प्रति पार्किंग 1 लाख के हिसाब से 1180 फ्लेट की पार्किंग का हिसाब लगाया जाए, तो यह राशि 11 करोड़ पार कर लेती है, वही प्रति फ्लेट 3 लाख ब्लेक में नगद के हिसाब से 35 करोड़ होता है यह आसान सा हिसाब अब तक वापी में बैठे आयकर विभाग के अधिकारी नहीं लगा पाए। अब क्यो नहीं लगा पाए इसका जवाब आप स्वय आयकर विभाग के अधिकारियों से मांग सकते है।
वैसे सोचने वाली बात है कि जब वापी में 2 प्रोजेक्ट में 1180 फ्लेट है तो सिलवासा में 4 प्रोजेक्टो में कुल कितने फ्लेट होंगे? सूरत के दो प्रोजेक्टो में कितने फ्लेट होंगे ओर उन प्रोजेक्टो में पार्किंग के नाम पर तथा नगद के नाम पर कितना काला धन लिया जाता होगा? इसका पता लागाने के लिए सूरत, वापी तथा सिलवासा के आयकर विभाग को एक संयुक्त टीम बनाकर उक्त बिल्डर की जांच करनी चाहिए।
11 करोड़ ओर नगद 35 करोड़ नगद किस खाते में जाएंगे?
ग्राहको के पैसे से प्रमुख के प्रोजेक्ट, रेरा नियमो का सरेआम उलंधन, घोटाले करने के लिए ओर धोखा-धड़ी करने के लिए भी मिलना चाहिए प्रमुख को बड़ा अवार्ड!

रेरा एक्ट के तहत क्या पार्किंग बेचना अपराध नहीं है? रेरा एक्ट के तहत क्या नगद लेना अपराध नहीं है? दरअसल अभी तक कई खरीदारों को पता ही नहीं कि रेरा एक्ट क्या है ओर रेरा एक्ट के तहत कैसे ओर कहा बिल्डर की शिकायत की जाए। खेर क्रांति भास्कर किसी ओर अंक में रेरा एक्ट पर एक विशेष खबर प्रकाशित कर वह सारी जानकारियाँ देने के प्रयास करेगी, फिलवक्त पुनः मुद्दे पर आते है।

अभी कुछ समय पहले ही वित्त मंत्रालय ने बेनामी संपत्तियो पर शिकंजा कसने के लिए “बेनामी संपत्ति सूचनार्थी पुरस्कार योजना 2018” का घोषणा की है। सूरत, वापी तथा सिलवासा के प्रोजेक्टो में कई अधिकारियों ओर नेताओं की बेनामी संपत्ति हो सकती है, उक्त बिल्डर के कई प्रोजेक्ट ऐसे है जिनमे नेताओं ओर अफसरशाहों के काले धन का निवेश हो सकता है। अब प्रमुख के किस प्रोजेक्ट में किस नेता का काला-धन लगा है ओर किस अधिकारी की काली कमाई लगी है इसका पता लगाने के लिए प्रमुख के प्रोजेक्टो की जमीन खरीद से फ्लेट बिक्री तक के दस्तावेज़, आयकर विभाग के अधिकारियों को खँगालने होंगे, साथ ही साथ प्रमुख के प्रोजेक्टो में कुल कितने फ्लेट खाली पड़े है ओर खाली पड़े फ्लेटों का मालिक कौन है यह भी जांच का विषय है।

क्या बिल्डर पार्किंग के नाम पर 50 हजार से 1 लाख तथा 3 लाख का जो नगद धन ले रहा है उसकी जानकारी प्राधिकरण को दे रहा है? रेरा एक्ट के तहत, ग्राहकों से ली गई 70% राशि को अलग बैंक में रखने एवं उसका केवल निर्माण कार्य में प्रयोग का प्रावधान क्या बिल्डर ऐसा कर रहा है? या ग्राहको के साथ साथ रेरा एक्ट को भी चुना लगा रहा है? अब सिकी जांच कोन करेगा?

शिकायत प्रक्रिया
रियल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट 2016 के सेक्शन 31 के अंतर्गत रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी या निर्णायक अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकते है । इनमें मुख्य रूप से प्रमोटरों, आवंटियों या रियल एस्टेट एजेंटों के विरुद्ध शिकायत कर सकते है । अधिकांश राज्यों के नियमों में RERA को अपरिवर्तनीय बनाया गया है |

जिस हिसाब से बिल्डर प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही ग्राहको से करोड़ों का नगद ले रहा है, उस हिसाब से तो यही लगता है बिल्डर ग्राहको से लिए गए धन के सहारे ही अपने दूसरे प्रोजेक्ट बना रहा है!

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प्रमुख सहज़ में, सहजता से काले-धन का निवेश।

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