एक बार फिर भूतपूर्व सांसद मोहन डेलकर की प्रशासक प्रफुल पटेल से मुलाक़ात, इस बार भी कांग्रेस पद पर ड़ाले रखा पर्दा, जनता में चर्चा क्या दानह से कांग्रेस मुक्त भारत की शुरुआत?

एक बार फिर भूतपूर्व सांसद मोहन डेलकर की प्रशासक प्रफुल पटेल से मुलाक़ात, इस बार भी कांग्रेस पद पर ड़ाले रखा पर्दा, जनता में चर्चा क्या दानह से कांग्रेस मुक्त भारत की शुरुआत? | Kranti Bhaskar
Mohan Delkar

संध प्रदेश दादरा नगर हवेली कांग्रेस अध्यक्ष मोहन डेलकर किस कारण कांग्रेस की छवि धूमिल करने में लगे है इसका पता कांग्रेस की आला कामन को जल्द लगाना चाहिए, क्यो की एक बड़ी पुरानी काहवत है की समय बड़ा बलवान, एक समय ही ऐसा है जिसके सामने बड़े बड़ो को नतमस्तक होना पड़ता रहा है यह समय का ही खेल है जिनके चलते एक लम्बे समय से दानह कांग्रेस अध्यक्ष मोहन डेलकर कांग्रेस अध्यक्ष होने के बाद भी भूतपूर्व सांसद के लेटर पर प्रेस नोट जारी कर रहे है, यह समय का ही खेल है की दानह कांग्रेस अध्यक्ष की इस कुत्सित राजनीति से दानह की जनता अब तक वाकिफ नहीं हुई है यह समय का ही खेल है की किसी समय कांग्रेस पर अभिमान करने वाले आज बार बार अपने निजी स्वार्थ एवं ऐशगाह आबाद रखने के लिए कांग्रेस का मान भंग करने में लगे है और यह भी समय का ही खेल है की इतना सब हो जाने के बाद भी कांग्रेस की आला कमान को खबर तक नहीं, शायद कई कारणों में से यह एक कारण भी है जिसके चलते कांग्रेस को बार बार चुनावों में मुह की खानी पड़ रही है।

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वैसे जनता में चल रही चर्चा और दानह कांग्रेस नेता मोहन डेलकर द्वारा पिछले लम्बे समय से भूतपूर्व सांसद के लेटर पर जारी विज्ञप्तियों पर एक खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी, इस खबर के बाद क्रांति भास्कर की टीम ने कांग्रेस की आला कमान से संपर्क कर जानकारी भी ली, कि क्या उन्हे इस मामले की जानकारी है या दानह कांग्रेस अध्यक्ष मोहन डेलकर, दानह को कांग्रेस मुक्त प्रदेश बानने की मुहिम में लग चुके है? इतना ही नहीं दादरा नगर हवेली प्रदेश का कांग्रेस प्रभारी कोन है इस मामले में दो दिन पहले दानह कांग्रेस अध्यक्ष के निजी सचिव से जानकारी मांगी थी लेकिन अब तक दानह कांग्रेस अध्यक्ष मोहन डेलकर के निजी सचिव की और से कोई जानकारी नहीं मिली, अब इसे क्या समझा जाए यह तो जनता ही तय करे, लेकिन दानह कांग्रेस को लेकर जिस प्रकार की चर्चा जनता में चल रही है वह कांग्रेस के लिए काफी हायास्पद है।

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वही जब यह जानकारी मिली की दानह प्रशासक प्रफुल पटेल को नए वर्ष की शुभकामनाएँ देने हेतु भी मोहन डेलकर ने अपने आप को केवल भूतपूर्व सांसद ही बताया तथा इस मुलाक़ात में भी कांग्रेस के पद पर पर्दा ड़ाले रखा तो फिर से एक बार कई सवालों का बाजार गरम हो गया, अब उन सवालो का टोकरा भी जनता नुक्कड़ नुक्कड़ लिए घूम रही है, जवाब मिलेगा या नहीं यह तो जवाब देने वाले पर निर्भर करता है लेकिन आज नहीं तो कल जवाब तो देना होगा, क्यो की सवाल की उम्र नहीं होती और जवाब ज़िंदगी का हिसाब सवाल की उम्र जाने बिना लगाया नहीं जा सकता।

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समय रहते यदि कांग्रेस की आला कमान इस मामले में संज्ञान लेकर जनता के सवालों के जवाब दे दे तो हो सकता है आने वाले समय में जनता द्वारा पूछे जाने वाले सवालो में कुछ कटोती हो जाए। शेष फिर।

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